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एल सल्वाडोर के तीर्थयात्रियों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस एल सल्वाडोर के तीर्थयात्रियों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

एल साल्वाडोर के तीर्थयात्रियों से पोप ˸ अपने शहीदों के पदचिन्हों पर चलेें

संत पापा फ्राँसिस ने एल सल्वाडोर के तीर्थयात्रियों से मुलाकात करते हुए उन्हें अपने शहीदों के पदचिन्हों पर चलने का प्रोत्साहन दिया। तीर्थयात्री अपने शहीदों की धन्य घोषणा पर ईश्वर को धन्यवाद देने रोम आये थे।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2022 (रेई) ˸ तीर्थयात्रियों ने शहीद रूतिलियो ग्रांदे गार्चा, कोस्मे स्पेसोत्तो, मानुएल सोलोरजानो एवं नेलशन रूतिलियो लेमुस की धन्य घोषणा के लिए ईश्वर को धन्यवाद देने हेतु वाटिकन की तीर्थयात्रा की।

संत पापा ने तीर्थयात्रियों को सम्बोधित कर कहा, "जैसा कि हम सभी जानते हैं, शहादत प्रभु की ओर से एक मुफ्त वरदान है। धन्य कोस्मे स्पेस्सोत्तो के अनुसार यह सबसे बहुमूल्य वरदान है जिसको ईश्वर कलीसिया को प्रदान करते हैं क्योंकि उनमें वह महान प्रेम प्रकट होता है जिसको येसु ने क्रूस पर दिखलाया है। उनका रक्त न केवल शिष्यों द्वारा अपने मुक्तिदाता का अनुकरण करना अथवा सेवकों का अपने स्वामी के लिए बहाया जाना है बल्कि एक रहस्यमय संयुक्ति है।" जिसको धर्माचार्यों ने गतसमनी में येसु के शरीर को ढँकनेवाले लहू की बूंदों में निरूपित देखा है।" उन्होंने याद किया कि लहू की इन चार बूंदों ने माणि की तरह येसु के निर्बाध वस्त्र पर कढ़ाई की और "हम इन कीमती रत्नों के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं"।

प्रभु ने ही उन्हें इस संघर्ष के लिए आमंत्रित किया, उन्हें विजय पाने की शक्ति प्रदान की और अब हमारी आध्यात्मिक उन्नति के लिए उन्हें हमारे सामने रखते हैं। वे एल सलवाडोर की कलीसिया के लिए एवं विश्वव्यापी कलीसिया के लिए भी एक महान वरदान हैं। उनकी सार्थकता ईश्वर के रहस्य में हमेशा बनी रहेगी।

संत पापा ने कहा, "हालाँकि, इस वास्तविकता को हमारे समुदायों में और गहरा किया जा सकता है। यह ध्यान रखना दिलचस्प है कि धन्यों की मृत्यु का पहला फल कलीसिया की एकता में बृद्धि है।

14 मार्च 1977 को फादर रूतिलियो ग्रांदे के अंतिम संस्कार में, संत ऑस्कर रोमेरो ने धन्य की मृत्यु को कलीसिया की एकता की पुन: स्थापना के रूप में प्रकाश डाला था।

संत ऑस्कर रोमेरो

संत ऑस्कर रोमेरो ने अपने उपदेश के अंत में कहा था, "आइये हम इस कलीसिया को समझें, हम इस प्रेम से प्रेरित हों, हम इस विश्वास को जीयें और मैं आप सभी को यकीन दिलाता हूँ कि इसमें हमारी एक बड़ी समस्या का हल है।" संत पापा फ्राँसिस ने उल्लेख किया कि यह "इस शब्द पर प्रार्थना में 'चिंतन' करने का एक अच्छा तरीका हो सकता है, जिसे इन गवाहों के खून के माध्यम से, ईश्वर ने अल सल्वाडोर की कलीसिया में सुनाया है"।

संत पापा फ्राँसिस ने तब ध्यान दिया कि इस समय जब हमें कलीसिया की धर्मसभा पर चिंतन करने के लिए बुलाया गया है, "हमारे पास इन शहीदों में 'एक साथ चलने' का सबसे अच्छा उदाहरण है" और "आप में से प्रत्येक, धर्माध्यक्ष, पुरोहित और प्रचारक, आज प्रभु से बिनती करें, ताकि आप भी ऐसा कर सकें।”

"हमारी वास्तविकताएँ निश्चित रूप से उस समय की नहीं हैं, लेकिन प्रतिबद्धता, निष्ठा, ईश्वर में विश्वास और हमारे भाइयों और बहनों के प्रति प्यार को पहली जगह में रखने, आशा में बने रहने का बुलावा है जो कालातीत है, क्योंकि यह सुसमाचार है, एक जीवित सुसमाचार, जिन्हें किताबों से नहीं, बल्कि उन लोगों के जीवन से सीखा जा सकता है जिन्होंने हमें विश्वास की धरोहर सौंप दी है"।

येसु का क्रूस हरेक का क्रूस

अपने प्रवचन को समाप्त करते हुए, संत पापा फ्राँसिस ने उपस्थित लोगों को याद दिलाया कि "क्रूस हमेशा येसु का क्रूस होता है, लेकिन साथ ही यह हम सभी का क्रूस है। यह कलीसिया का क्रूस है, जो ख्रीस्त के शरीर के रूप में प्रेम के सर्वोच्च बलिदान, जैसा कि उन्होंने हमें सिखाया" द्वारा उसका अनुसरण करता है।

अंत में, संत पापा ने बतलाया कि "हम सभी इसे उठाते हैं, एक-दूसरे को प्रोत्साहित करते हैं, जो मुश्किल में हैं उनके लिए प्रार्थना करते हैं, और ईश्वर को धन्यवाद देते हैं कि हम एक पवित्र और विश्वस्त प्रजा के रूप में एक साथ चल सकें, अपनी कमजोरियों के बावजूद दूसरों को गवाही देते हुए, ताकि वे भी जीवन के उतार-चढ़ाव में आराम पा सकें।"

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14 October 2022, 17:25