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एशिया के धर्माध्यक्षों से पोप ˸ पवित्र आत्मा आपसे क्या कह रहे है

थाईलैंड में एकत्रित एशियाई काथलिक धर्माध्यक्षों के संघ को सम्बोधित अपने संदेश में संत पापा फ्राँसिस ने धर्माध्यक्षों को पवित्र आत्मा की प्रेरणा को सुनने की सलाह दी। एशियाई काथलिक धर्माध्यक्षों के सम्मेलनों के संघ की सभा बैंकॉक में 12 से 30 अक्टूबर 2022 तक आयोजित है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 12 अक्तूबर 2022 (रेई) ˸ सभा का उद्घाटन 12 अक्टूबर को स्थानीय समयानुसार शाम 4.30 बजे यूखरिस्त समारोह के साथ किया गया। सभा में मुख्य रूप से "उभरती वास्तविकताएँ और एशिया में कलीसिया", "एशिया में कलीसिया के लिए नए रास्तों की खोज" आदि विषयों पर चर्चा की जायेगी। धर्माध्यक्षों की सभा के दौरान फोकलारे मूवमेंट के साथ मुलाकात, एशिया की पल्लियों का वर्चुवल भ्रमण, थाईलैंड के शहर अयूथाया की तीर्थयात्रा आदि कार्यक्रम शामिल होंगे।

सच्चा समुदाय

सभा शुरू होने के पूर्व 12 अक्टूबर को एक वीडियो संदेश में संत पापा ने कहा, "प्यारे भाइयो, एशियाई धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के संघ के सदस्यो, आपने 1970 में धर्माध्यक्षों की सभा की शुरूआत की, और मेरे पूर्वाधिकारी संत पौल छटवें ने जब एशिया की प्रेरितिक यात्रा की एक बड़ी संख्या के महादेश को पाया। अधिकांश लोग युवा थे और एशिया को विभिन्न संस्कृतियों एवं धर्मों के घर के रूप में पहचाना जाता है।

धर्माध्यक्षों ने गौर किया था कि लोग भाग्यवाद से जागरूक होकर व्यक्ति के योग्य जीवन की ओर बढ़ रहे थे; युवा भी जाग रहे थे, वे आदर्शवादी, जागरूक, चिंतित, अधीर और बेचैन थे; सांस्कृतिक रूप से विविध समाज, एक सच्चा समुदाय बनने के लिए सचेत हो रहे थे।

भाईचारा, विचारों का आदान-प्रदान

इसका अर्थ है कि एशिया की कलीसिया, गरीबों की कलीसिया, युवाओं की कलीसिया और अन्य आस्थाओं के एशियाई साथियों के साथ वार्ता की कलीसिया के रूप में अधिक विश्वस्त कलीसिया बनने के लिए बुलाई गई है।

एशिया की कलीसिया से पवित्र आत्मा

इस समय जब आप एक साथ मिल रहे हैं, मैं एक तरह से आपका साथ देना चाहता हूँ, भाईचारा एवं विचारों के आपसी आदान-प्रदान के कार्य में, जिसको आप सम्पन्न करेंगे। यह महत्वपूर्ण है कि स्थानीय सम्मेलन एक निश्चित दृढ़ता के साथ मिलें, इसके द्वारा कलीसिया का निर्माण होगा, यह मजबूत बनेगी और मौलिक सवाल ˸ आत्मा एशिया की कलीसिया से क्या कह रही है? का उत्तर दिया जा सकेगा।

लोकधर्मियों का महत्व  

संत पापा ने लोकधर्मियों का महत्व बतलाते हुए कहा, लोकधर्मी अपने बपतिस्मा को धारण कर सकें, एक लोकधर्मी के रूप में अपने कार्यों को ले सकें एवं हरेक कलीसिया की विलक्षणता का सम्मान कर सकें, क्योंकि विश्वव्यापी कलीसिया एकरूपता की कलीसिया नहीं है, जी नहीं, यह विश्वव्यापी है, अतः हरेक कलीसिया की खासियत का सम्मान किया चाहिए।"

ईश्वर आप सभी को आशीष प्रदान करें, मैं आप सभी के लिए प्रार्थना करता हूँ और आप भी मेरे लिए प्रार्थना करें। धन्यवाद।"

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12 October 2022, 17:13