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कोलोसेयुम में शांति प्रार्थना सभा में भाग लेते धर्मगुरू कोलोसेयुम में शांति प्रार्थना सभा में भाग लेते धर्मगुरू 

हिंसा और आतंक ईश्वर के नाम की महिमा नहीं कर सकते, पोप

रोम के ऐतिहासिक स्थल कोलोसेयुम में संत इजिदियो समुदाय द्वारा मंगलवार को आयोजित "शांति की पुकार प्रार्थना" में संत पापा फ्राँसिस ने जोर दिया कि धर्मों का प्रयोग युद्ध के लिए कभी नहीं किया जाना चाहिए तथा उन्होंने राष्ट्रों का आह्वान किया कि संघर्षों का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाए।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

रोम, बुधवार, 26 अक्टूबर 2022 (रेई) ˸ संत पापा ने प्रार्थना सभा में भाग ले रहे धार्मिक नेतों से अपील करे हुए कहा, "धर्मों का इस्तेमाल युद्ध लड़ने के लिए नहीं किया जा सका। सिर्फ शांति पवित्र है और ईश्वर की स्तुति करने के लिए आतंक एवं हिंसा का प्रयोग बिलकुल नहीं किया जा सकता। यदि आप अपने आसपास युद्ध देखते हैं, तो आप न भागें। लोग शांति चाहते हैं।"  

असीसी के मनोभाव पर शांति हेतु मंगलवार को आयोजित प्रार्थना में संत पापा ने याद किया कि इसी स्थान पर एकत्रित होकर, इन्हीं शब्दों को धर्मगुरूओं ने एक साल पहले दुहराया था। उन्होंने कहा, हमारे द्वारा शुरू की गई अपील "आज और अधिक सामयिक है," और "हमें हर दिन बेहतर करने का प्रयास करना चाहिए।"

"आइये, हम युद्ध के सामने कभी इस्तीफा न दें। हम मेल-मिलाप के बीज बोयें। आज हम शांति के लिए अपनी याचना को स्वर्ग की ओर उठायें।"

परमाणु हथियार के खतरे एवं पीड़ा के सामने, पोप ने चेतावनी दी कि युद्ध विफलता है तथा सुझाव दिया कि इसे रोकने के लिए हर स्तर पर, हरसंभव प्रयास करने हेतु सभी लोग बुलाये जा रहे हैं।

संत पापा जॉन पौल द्विलीय की असीसी की भावना

तीन दिवसीय प्रार्थना सभा की विषयवस्तु थी, "शांति की पुकार", जिसका आयोजन संत इजिदियो समुदाय द्वारा किया गया था जिसमें देश के नेताओं, धर्मगुरूओं एवं कई उच्च अधिकारियों ने भाग लिया।

इस वर्ष की प्रार्थना सभा, संत पापा जॉन पॉल द्वितीय द्वारा आयोजित 27 अक्टूबर 1986 को शांति के लिए अंतरधार्मिक प्रार्थना के ऐतिहासिक विश्व दिवस के मद्देनजर शुरू की गई सभा का 36वाँ संस्करण था।

हार्दिक निवेदन 'जहां शांति को कुचला गया है'

संत पापा ने कहा कि शांति के लिए इस वर्ष की प्रार्थना का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा, "इस वर्ष की प्रार्थना एक हार्दिक निवेदन बन गई है क्योंकि आज शांति को कुचला, उसपर हमला किया गया एवं उसे रौंदा गया है और यह यूरोप में हुआ है, उसी महाद्वीप पर जिसने पिछली शताब्दी में दो विश्व युद्धों की भयांकर स्थिति को झेला है।"

दुःख की बात है कि तभी से, युद्धों ने लगातार रक्तपात किया है और पृथ्वी को दरिद्र बना दिया है।

विशेष रूप से नाटकीय

"फिर भी जिस परिस्थिति का हम अनुभव कर रहे हैं वह विशेष रूप से खतरनाक है।"

 यही कारण है कि हमने अपनी प्रार्थना ईश्वर से की है जो हमेशा अपने बेटे बेटियों की पीड़ा को सुनते हैं। शांति धर्मों के केंद्र में है, उनके पवित्र लेखों एवं शिक्षाओं में है।

"आज इस शाम में मौन प्रार्थना के बीच हमने शांति की पुकार सुनी है, दुनिया के इतने सारे क्षेत्रों में दबी हुई शांति, हिंसा के बहुत सारे कृत्य, और यहां तक कि बच्चों और बुजुर्गों को भी छोड़ दिया गया हैं, जिन्हें युद्ध के कड़वे कष्टों से नहीं बख्शा गया है। ”

धर्म हिंसा को बढ़ावा नहीं दे सकते

संत पापा ने सराहना व्यक्त की कि विगत कुछ वर्षों में धर्मों के बीच भाईचारा की भावना में वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी दोहराया कि धर्मों का प्रयोग युद्ध के लिए नहीं किया जा सकता और आतंक एवं हिंसा से ईश्वर के नाम की महिमा नहीं होती है।

संत पापा ने अपने सम्बोधन के अंत में राष्ट्रों एवं लोगों से अपील की कि वे कभी भी युद्ध के आदी नहीं बनें अथवा इसे छोड़ दें। मेल-मिलाप पर जोर देते हुए शांति के लिए स्वर्ग की ओर आवाज उठाने का आह्वान किया।

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26 October 2022, 11:30