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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

पोप ने पुतिन से युद्ध रोकने एवं जेलेन्सी से शांति के लिए खुले होने की अपील की

संत पापा फ्राँसिस ने यूक्रेन में युद्ध पर परमाणु हथियारों के खतरे एवं सैन्य वृद्धि पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, देवदूत प्रार्थना के पूर्व अपने पूरे संदेश को वहाँ की स्थिति की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट करने एवं शक्तिशालियों से तत्काल युद्ध विराम की अपील करने के लिए समर्पित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार, 2 अक्तूबर 2022 (रेई)- वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 2 अक्टूबर को संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो सुप्रभात।

यूक्रेन में युद्ध की स्थिति अत्यन्त गंभीर, विनाशकारी और खतरनाक हो चुकी है, जिससे बहुत अधिक चिंता बढ़ गई है। इसलिए आज मैं देवदूत प्रार्थना के पूर्व अपने पूरे चिंतन को इसी पर केंद्रित करना चाहता हूँ। निश्चय ही, मानवता के लिए इस भयानक और अकल्पनीय घाव से उपचार के बजाय, और अधिक खून बह रहा है, तथा इसके फैलने का खतरा बढ़ गया है।

मैं बहुत दुःखी हूँ कि इन महीनों में खून और आँसू की नदियाँ बहे हैं। मैं हजारों पीड़ितों के लिए परेशान हूँ, विशेषकर, बच्चों के लिए तथा उस विनाश के लिए जिसने कई लोगों और परिवारों को बेघर कर दिया है एवं जिसने एक विशाल क्षेत्र को ठंढ़ और भूख के लिए खोल दिया है। ऐसे कृत्यों को कभी भी न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। यह परेशान करनेवाला है कि दुनिया यूक्रेन के भूगोल को बुचा, इरपिन, मारियुपोल, इज़ियुम, ज़ापोरिज़्ज़िया और अन्य क्षेत्रों जैसे नामों से जान रही है, जो अवर्णनीय पीड़ा और भय का स्थान बन गया है। इस तथ्य के बारे में क्या है कि मानवता एक बार फिर परमाणु खतरे का सामना कर रही है?  बेतुकी बात है।

संत पापा ने युद्ध विराम की अपील करते हुए कहा, "आगे क्या होगा? और कितना खून बहना बाकी है कि हम उस चेतना में आ सकेंगे कि युद्ध कभी भी हल नहीं है, केवल विनाश है? ईश्वर के नाम और मानवता की भावना के नाम पर जो हरेक व्यक्ति के हृदय में है, मैं तत्काल युद्धविराम की अपील करता हूँ। आइये, हम हथियारों को विराम दें और समझौता की शर्तों की खोज करें जो हमें समाधान की ओर ले जायेगा। जिसे बल द्वारा नहीं थोपा जा सकता बल्कि सहमति, न्यायसंगत और स्थिरता से प्राप्त किया जा सकता।" संत पापा ने कहा कि यह तभी संभव होगा जब मानव जीवन के पवित्र मूल्य के साथ-साथ प्रत्येक देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता, एवं अल्पसंख्यकों के अधिकारों और वैध चिंताओं का सम्मान किया जाएगा।

संत पापा ने परमाणु हथियारों के खतरे को देखते हुए कहा, "मैं उस गंभीर स्थिति की कड़ी निंदा करता हूँ जिसमें हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय नियम के सिद्धांतों के विरूद्ध कारर्वाई किये गये हैं। जो दुनिया भर में अनियंत्रित और विनाशकारी परिणामों की आशंकाओं को उत्पन्न करते हुए, परमाणु वृद्धि के जोखिम को बढ़ा रहा है।"

तब रूस के राष्ट्रपति को सम्बोधित करते हुए संत पापा ने कहा, "मेरी अपील सबसे पहले और सबसे बढ़कर रूस के राष्ट्रपति से है, मैं उनसे आग्रह करता हूँ कि इस हिंसा और मौत की कुंडली को रोकें, कम से कम अपने लोगों के खातिर।"

फिर यूक्रेन के राष्ट्रपति को सम्बोधित करते हुए संत पापा ने कहा, "हमले के कारण यूक्रेनी लोगों की अत्याधिक पीड़ा से दुःखी होकर, मैं यूक्रेन के राष्ट्रपति से उसी दृढ़ से अपील करता हूँ कि वे शांति के लिए गंभीर प्रस्तावों के प्रति खुले रहें।"   

संत पापा ने सभी अंतरराष्ट्रीय नायकों एवं राष्ट्रों के राजनीतिक नेताओं से अपील की कि वे युद्ध के अंत के लिए हर संभव प्रयास करें, युद्ध की भयांकर वृद्धि में सहयोग न दें बल्कि वार्ता के प्रयास को सहयोग और समर्थन प्रदान करें। युवा पीढ़ी शांति की हितकारी हवा में सांस ले सके, न कि युद्ध की प्रदूषित हवा में, जो पागलपन है!

सात महीनों के युद्ध के बाद, आइये हम हर प्रकार के कूटनीतिक साधनों का प्रयोग करें, ताकि इस खतरनाक त्रासदी का अंत किया जा सके। युद्ध अपने आपमें एक त्रुटि और एक डरावनी है।

संत पापा ने माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा ईश्वर से प्रार्थना करने हेतु विश्वासियों का आह्वान करते हुए कहा, "आइये हम ईश्वर की करुणा पर भरोसा करें, जो हृदय बदल सकते हैं तथा शांति की रानी की ममतामय मध्यस्थता द्वारा, पोम्पेई की रोजरी की माता मरियम से, तीर्थस्थल में एकत्रित लोगों और विश्व के विभिन्न हिस्सों के विश्वासियों के साथ मिलकर अर्जी करें।

देवदूत प्रार्थना में संत पापा का संदेश

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02 October 2022, 13:03