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संयुक्त राष्ट्र संघीय महासभा को सम्बोधित करते हुए कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन, तस्वीरः 24.09.2022  संयुक्त राष्ट्र संघीय महासभा को सम्बोधित करते हुए कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन, तस्वीरः 24.09.2022   (AFP or licensors)

संघर्ष विराम सम्भव ही नहीं यह अत्यावश्यक है, कार्डिनल पारोलीन

इटली की काथलिक साप्ताहिक पत्रिका "ला फामिलिया क्रिस्तियाना" के साथ एक साक्षात्कार में, वाटिकन राज्य के सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन ने इस बात की पुष्टि की कि यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध को रोकने के लिये सबसे पहले हथियारों को मौन होना पड़ेगा क्योंकि यदि पक्षपातपूर्ण हित प्रबल होते हैं तो "हमारा कोई भविष्य नहीं हो सकता"।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2022 (रेई, वाटिकन रेडियो): इटली की काथलिक साप्ताहिक पत्रिका "ला फामिलिया क्रिस्तियाना" के साथ एक साक्षात्कार में, वाटिकन राज्य के सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन ने इस बात की पुष्टि की कि यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध को रोकने के लिये सबसे पहले हथियारों को मौन होना पड़ेगा क्योंकि यदि पक्षपातपूर्ण हित प्रबल होते हैं तो "हमारा कोई भविष्य नहीं हो सकता"।

कार्डिनल पारोलीन ने कहा कि इस धरती का उद्धार मूल रूप से योजनाओं का प्रश्न है। विचारों के आदान-प्रदान की, यथार्थवादी बातचीत की तथा "विश्वास के इशारे" की ज़रूरत है, जो घृणा की कठोरता और संघर्ष से पहुँचने वाले घावों पर काबू पाने में सक्षम हैं।

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश, युद्ध में ऐसी रणनीतियाँ होती हैं जो मानवता के विपरीत हैं तथा पक्षपातपूर्ण हितों जैसे "हिंसा, पूर्वाग्रह, आर्थिक और वैचारिक उपनिवेशवाद एवं सबसे मज़बूत के कानून" को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने कहा कि इसमें कोई सन्देह नहीं कि इस प्रकार की मानसिकता द्वारा मानवता "विनाशकारी परिणामों के साथ, बिना किसी वापसी के चक्रव्यूह में फँसने" का जोखिम उठाती है।

क्षमा के बिना न्याय नहीं

कार्डिनल पारोलीन ने कहा कि यूक्रेन को परेशान करनेवाले इस संघर्ष को समाप्त करने के लिये शुरुआती बिंदु वे अपीलें हैं जिन्हें सन्त पापा फ्राँसिस फरवरी माह से आज तक आग्रहपूर्ण रीति से जारी करते रहे हैं।

कार्डिनल पारोलीन ने कहा कि वे युद्धविराम को न केवल सम्भव ही नहीं मानते, बल्कि इसे आवश्यक और जरूरी मानते हैं। उन्होंने इस तथ्य की पुनरावृत्ति की कि "शांति का निर्माण केवल न्याय और कानून के आधार पर हो सकता है।" सन्त पापा जॉन पौल के शब्दों का स्मरण दिलाकर उन्होंने कहा, "क्षमा के बिना न्याय सम्भव नहीं है और क्षमा के लिए "मनपरिवर्तन की नितान्त आवश्यकता होती है, अर्थात व्यवहार में परिवर्तन जो कार्यों में परिलक्षित हो"।

"हथियारों का कोलाहल बंद करो"

किसी प्रकार की भविष्यवाणी न करते हुए कार्डिनल पारोलिन ने कहा, "मैं आपको यह बताने में सक्षम नहीं हूं कि शांति संभव हो सकेगी अथवा नहीं, लेकिन निश्चित रूप से यह कह सकता हूँ कि शांति स्थापना के लिये हथियारों, बम विस्फोटों औरविनाश को रोकना एक आवश्यक और पहला कदम है।" ऐसा कदम जो "धमकी भरा न हो, बल्कि विश्वास और सद्भावना के इशारों से परिपूर्ण हो, बातचीत के लिए स्थितियां उत्पन्न करने में सक्षम हो और वार्ताओं का मार्ग प्रशस्त कर सके।"

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13 October 2022, 12:03