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कज़ाकिस्तान में सन्त पापा फ्राँसिस की अध्यक्षता में  विश्व शांति बैठक, प्रतीकात्मक तस्वीरः 15.09.2022 कज़ाकिस्तान में सन्त पापा फ्राँसिस की अध्यक्षता में विश्व शांति बैठक, प्रतीकात्मक तस्वीरः 15.09.2022  (AFP or licensors)

ख्रीस्तानुयायी शांति के साक्षी बनें, सन्त पापा फ्राँसिस

इटली के मिलान शहर में 20 सितम्बर से दो अक्टूबर तक जारी मिशन महोत्सव के प्रतिभागियों को गुरुवार को सम्बोधित कर सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि ख्रीस्त के अनुयायियों को शांति के गवाह बनकर मिशनरी भावना को विकसित करना चाहिये, इसलिये कि मिशन कलीसिया के जीवन का प्राण है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

मिलान, शुक्रवार, 30 सितम्बर 2022 (रेई, वाटिकन रेडियो): इटली के मिलान शहर में 20 सितम्बर से दो अक्टूबर तक जारी मिशन महोत्सव के प्रतिभागियों को गुरुवार को सम्बोधित कर सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि ख्रीस्त के अनुयायियों को शांति के गवाह बनकर मिशनरी भावना को विकसित करना चाहिये, इसलिये कि मिशन कलीसिया के जीवन का प्राण है।

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन द्वारा हस्ताक्षरित तथा मिलान के महाधर्माध्यक्ष मारियो देलपीनी को सम्बोधित पत्र में सन्त पापा फ्राँसिस ने मिशन महोत्सव के प्रतिभागियों का अभिवादन किया तथा  "वरदान से जीना" शीर्षक से आयोजित उनकी सुन्दर पहल की सराहना की।

मिशन जागरूकता प्रोत्साहित हो

सन्त पापा ने कहा, "युग के इस परिवर्तनकाल में विश्वास और कलीसिया की मिशनरी विशिष्टता को दिखाना महत्वपूर्ण है ताकि आज के लोगों में भी यह घोषणा की जा सके कि ईश्वर सदैव हमारे साथ है और हमसे प्रेम करते हैं।"

इताली काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की प्रेरितिक इकाई इताली मिशन न्यास के तत्वाधान में उक्त मिशन महोत्सव का आयोजन मिलान महाधर्मप्रान्त द्वारा किया गया है।

सन्त पापा ने आशा व्यक्त की कि इन दिनों जारी मिशन महोत्सव में जारी प्रार्थना, श्रवण, चिन्तन और विचारों का आदान-प्रदान प्रत्येक ख्रीस्तानुयायी में मिशनरी जागरुकता को प्रोत्साहित करे। उन्होंने कहा कि मिशन विश्वास का उपांग नहीं है, बल्कि "कलीसियाई जीवन का प्राण और उसका केन्द्र है।"

समस्त ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों का उन्होंने आह्वान कि वे स्वतः की अस्मिता को मिशन के साथ आत्मसात करें ताकि अन्यों को "आलोकित और प्रबुद्ध कर सकें,  अन्यों का उत्थान कर सकें, उन्हें चंगाई प्रदान कर सकें तथा मुक्ति का रास्ता प्रदर्शित कर सके।"

शांति के साक्षी बनें

ख्रीस्तीयों से शांति के गवाह बनने का अनुरोध कर सन्त पापा ने कहा, समकालीन चुनौतियों और युद्धों की त्रासदी के बीच, शांति के साक्षी बनने मिशन का एक महत्वपूर्ण आयाम है जिसे प्रभु येसु के शब्दों -  "शांति तुम्हारे साथ हो, मैं तुम्हें अपनी शांति देता हूं"- को याद वैयक्तिक रूप से जिया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि हम ख्रीस्तीय इस तथ्य से वाकिफ़ है कि यथार्थ शांति पुर्नजीवित ख्रीस्त का वरदान है, और इस वरदान को सत्य, न्याय एवं करुणा के कार्यों द्वारा अन्यों में साझा करने के लिये हम बुलाये गये हैं।

सन्त पापा ने कहा, "सत्य, न्याय और दया का एक अविभाज्य साथी है", और तीनों संयुक्त रूप से शांति के निर्माण के लिए आवश्यक हैं। इस प्रकार, शांति का साक्ष्य हर दिन अलग-अलग स्थितियों में जीने की प्रतिबद्धता है, ताकि हम "दरवाजे से दरवाजे तक" मिशनरी बन सकें।

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30 September 2022, 11:55