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2022.09.12स्विटजरलैंड के एक छात्र संघ के सदस्यों के साथ संत पापा फ्राँसिस 2022.09.12स्विटजरलैंड के एक छात्र संघ के सदस्यों के साथ संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

संत पापा स्विस छात्रों से : 'शिक्षा को हमेशा सच्चाई की खोज करनी चाहिए

संत पापा फ्राँसिस ने स्विटजरलैंड के एक छात्र संघ के साथ मुलाकात की, जो स्विटजरलैंड और संघ के संरक्षक, फ्लू के संत निकोलस के संत घोषणा की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर रोम की तीर्थयात्रा पर हैं। संत पापा ने प्रतिभागियों से सत्य की तलाश के लिए हमेशा शिक्षा को नियोजित करने का आग्रह किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी,सोमवार 12 सितम्बर  2022 (वाटिकन न्यूज)  : संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के संत क्लेमेंटीन सभागार में स्विस छात्र संघ के करीब 160 सदस्यों से मुलाकात की, जो स्विटजरलैंड और उनके संघ के संरक्षक फ्लू के संत निकोलस के संत घोषणा की 75वीं वर्षगांठ पर रोम की तीर्थयात्रा पर हैं। संत पापा ने सोसाइटी के अध्यक्ष को उनके परिचय भाषण के लिए धन्यवाद दिया। संत पापा ने कहा कि वे स्विट्ज़रलैंड में सबसे बड़े छात्र संघ का हिस्सा हैं, जो विभिन्न पीढ़ियों के लोगों को एक साथ लाता है, पीढ़ियों के बीच मुलाकात और संवाद, यह बहुत सकारात्मक है। यह भी महत्वपूर्ण है: आप एक निगम के सदस्य नहीं हैं, आप छात्र हैं या छात्र रहे हैं और यही आपको एकजुट करता है।

संत पापा ने सर्वप्रथम उनके साथ मिलकर इस अवसर के लिए ईश्वर को धन्यवाद दिया कि उन्हें स्वतंत्र रुप से और अपनी इच्छा अनुसार अध्ययन करने का अवसर मिला है। संत पापा ने इस बात को इंगित किया कि दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जिनकी पहुंच शिक्षा तक नहीं है और अन्य - विशेष रूप से महिलाएं - जिन्हें खुद को केवल निचले स्तर या कुछ विशेष प्रकार के अध्ययनों तक ही सीमित रखना पड़ता है। अभी भी कुछ जबरन शिक्षा प्राप्त करने के लिए बाध्य हैं। संत पापा ने उनके संघ को अध्ययन के अधिकार की प्राप्ति के पक्ष में कुछ ठोस स्थिति का प्रभार लेने का प्रस्ताव दिया। संत पापा ने कहा कि अगर उनका संघ पहले से ही इस प्रकार की गतिविधियों का हिस्सा है, तो वे उन्हें बधाई देते हें और नए सिरे से प्रतिबद्धता के साथ इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

एक तीर्थयात्री के रूप में  छात्र

संत पापा ने कहा कि वे इस वर्ष स्विटजरलैंड और संघ के भी संरक्षक संत निकोलस के संत घोषणा की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। और रोम की तीर्थ यात्रा पर हैं। संत पापा ने कहा, “एक छात्र होने और एक तीर्थयात्री होने के बीच एक सुंदर समानता है। अध्ययन एक यात्रा है और आपकी संगति हमें याद दिलाती है कि व्यापक अर्थों में विद्यार्थी जीवन भर के लिए विद्यार्थी होते हैं। एक विशिष्ट अध्ययन, निश्चित रूप से, विशिष्ट, अच्छी तरह से परिभाषित समय और वस्तुएं हो सकती हैं और होनी चाहिए। लेकिन एक मानवीय दृष्टिकोण से अध्ययन को हमेशा विकसित किया जा सकता है। इस अर्थ में, एक छात्र होने का अर्थ है सीखना, जानना, किसी भी उम्र में लगातार जानने और सीखने की भावना रखना।”

ईश्वर के प्रेम को सीखने के लिए शिक्षा

संत पापा ने कहा कि शिक्षा किसी के साथ एक नए अस्तित्व में जाने का एक तरीका है, जो हमें "ईश्वर के साथ एकता में जीवन की पूर्णता को जीने के लिए" और दूसरों के समाने खुद को खोलती है।

"येसु मसीह इतिहास के सबसे बड़े शिक्षक हैं: पिता के प्रेम और पवित्र आत्मा के कार्य के द्वारा, वे हमें 'ऊपर' के अस्तित्व में लाते है, जैसा कि उसने निकोदेमुस से कहा था। (सीएफ योहन 3:3) वे हमें स्वयं के बंधन से मुक्त करते हैं और हमें ईश्वर के साथ, दूसरों के साथ, प्राणियों के साथ और यहां तक कि स्वयं के साथ एकता में जीवन की पूर्णता के लिए खोलते हैं।"

एक जर्मन पुरोहित और दार्शनिक फादर रोमानो गार्डिनी, का हवाला देते हुए, संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि शिक्षा "सेवा, सहायता, स्वतंत्रता" का एक साधन है। "जन्म के रहस्य" का अर्थ, येसु मसीह के प्रेम के पूर्ण ज्ञान को प्राप्त करना है।

सत्य की खोज

 संत पापा ने उनसे एक प्रश्न पूछा, “क्या आप ईश्वर के वचन के "छात्र" हैं? क्या वे अपना कुछ समय बाइबिल, सुसमाचारों को पढ़ने के लिए समर्पित करते हैं? यदि आप खोज में यात्रा करने वाले लोग हैं, तो क्या आपको भी लगता है कि आप ईश्वर के साधक हैं? क्या आप येसु के शिष्यों की तरह महसूस करते हैं, जो उनकी बात सुनने, उनसे प्रश्न पूछने, उनके शब्दों और कार्यों पर मनन करने के लिए उत्सुक हैं?” ... आगे संत पापा ने कहा कि तीर्थयात्री होने का मतलब है: "प्राप्त करने" से संतुष्ट नहीं होना, बल्कि जीने की इच्छा रखना और येसु वे हैं जिसे पिता ने हमें "परिपूर्ण" जीवन देने के लिए भेजा है। (योहन 10:10)। वही अकेला हमें अनन्त जीवन दे सकते हैं, क्योंकि उनके पास "अनन्त जीवन के वचन" है। (योहन 6:68) हमसे बेहतर येसु हमें जानते हैं क्योंकि वे खुद से ज्यादा हमारे करीब है (सीएफ. ऑगस्टीन, कॉन्फ 3, 6, 11)।

अंत में संत पापा ने उन्हें यहाँ आने के लिए धन्यवाद दिया और फ्लू के संत निकोलस की मध्यस्ता से हमेशा सच्चाई, अच्छाई और सुंदरता के उत्साही साधक बने रहने हेतु प्रोत्साहित किया।

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12 September 2022, 16:14