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कार्डिनलों को सम्बोधित करते संत पापा फ्रांँसिस कार्डिनलों को सम्बोधित करते संत पापा फ्रांँसिस   (ANSA)

पोप ˸ कलीसिया में पुरूषों और महिलाओं द्वारा दुर्व्यवहार 'एक 'राक्षसी' है

सी एन एन पुर्तगाल के साथ एक साक्षात्कार में संत पापा फ्राँसिस ने कहा है कि कलीसिया, यौन शोषण और कलीसिया में पुरुषों एवं महिलाओं द्वारा अधिकार एवं शक्ति के दुरुपयोग के कारण पीड़ित है। एक विस्तृत साक्षात्कार में विश्व युवा दिवस, वार्ता का महत्व और सिनॉडालिटी पर सिनॉड जैसे विषयों पर चर्चा की गई है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

पोप फ्राँसिस ने सोमवार शाम को सीएनएन पुर्तगाल के साथ एक साक्षात्कार में, दूसरों के साथ यौन दुराचार करनेवाले पुरोहितों की बात आने पर कलीसिया की "शून्य सहिष्णुता" के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया।

संत पापा कहा, "मैं इसपर स्पष्ट होना चाहूँगा ˸ कलीसिया के पुरूषों और कलीसिया की महिलाओं के दुराचार – अधिकारियों के दुराचार, सत्ता का दुरूपयोग एवं यौन दुराचार एक राक्षसी है क्योंकि कलीसिया के पुरूष या महिला चाहे वह पुरोहित, धर्मबंधु या धर्मबहन अथवा लोकधर्मी पुरूष या महिला क्यों न हो, वह सेवा देने, एकता उत्पन्न करने और वृद्धि करने के लिए बुलाया गया है, दुराचार हमेशा नष्ट करता है।"  

संत पापा ने कहा, "दुराचार सभी समय की किन्तु हमारे समय की एक दुखद सच्चाई है।" उन्होंने गौर किया कि कई बार दुराचार परिवार में या पड़ोस में होता है तथा खेलों, क्लबों और स्कूलों में भी पाया जाता है। यद्यपि, कलीसिया में कम ही ऐसा होता हो, कलीसिया में दुर्व्यवहार का एक भी मामला "राक्षसी" है।  

दुराचार के जवाब में संत पापा ने कहा कि आधुनिक समाज में दुराचार की वास्तविकता को जानना जरूरी है; यह सुनिश्चित करने के लिए कि अन्य विभागों में दुराचार, खासकर, परिवारों में, उसे न ढका जाए और उन क्षेत्रों में हो रहे दुराचार का सामना करना कलीसिया की जिम्मेदारी है। संत पापा ने दुर्व्यवहार के प्रति शून्य सहिष्णुता के लिए कलीसिया की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा, "एक पुरोहित, पुरोहित नहीं रह सकता यदि वह एक दुराचारी है। वह नहीं रह सकता।"    

सीएनएन पुर्तगाल के साथ संत पापा फ्राँसिस के साक्षात्कार को सोमवार शाम को प्रसारित किया गया, जिसको 11 अगस्त को रिकॉर्ड किया गया था।

विश्व युवा दिवस

पुर्तगाल के लिस्बन में आगामी विश्व युवा दिवस 2023 के पूर्व, संत पापा फ्राँसिस ने संत पापा जॉन पौल द्वितीय की सराहना की जिन्होंने विश्वभर के युवाओं को एक साथ आने हेतु प्रेरित किया ताकि उन्हें मजबूत किया जा सके एवं उन्हें समर्थन दिया जा सके। युवाओं की रचनात्मकता एक चिन्ह है कि वे वर्तमान से जुड़कर, भविष्य की ओर देख रहे हैं...यह उन्हें खुद को पाने और भविष्य की ओर आगे बढ़ने में मजबूत महसूस करने में मदद देता है।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि "पोप विश्व युवा दिवस 2023 में जायेंगे: "या तो फ्राँसिस जायेंगे या जॉन 24वें जायेंगे," ऐसा कहते हुए उन्होंने उस संभावना की ओर इशारा किया कि उस अवसर तक एक और पोप हो सकते हैं, "लेकिन पोप जायेंगे।"

संत पापा ने युवाओं के साथ बात करने की आवश्यकता बतलायी, उन्हीं की भाषा में जो उनकी युवा संस्कृति से आती है। "आपको चीजों के लिए उनकी व्याख्या के अनुसार सुनना होगा और उन्हीं की समझ ...एवं आज के उनके अनुभव के अनुसार जवाब देना होगा।”

पोप किस तरह प्रार्थना करते हैं?

अपने प्रार्थनामय जीवन के बारे पूछे जाने पर संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि वे दैनिक प्रार्थनाओं को हर दिन करते हैं तथा रोजरी एवं बाईबिल पर मनन-ध्यान करते हैं। दूसरे शब्दों में वे विभिन्न रूपों में प्रार्थना करते हैं। "मैं अपने आपको ईश्वर के सामने लाता हूँ और कई बार भटक जाता हूँ किन्तु वे नहीं भटकते जो मुझे सांत्वना देता है। हरेक व्यक्ति को पवित्र आत्मा की प्रेरणा के अनुसार प्रार्थना करनी चाहिए।”

तब संत पापा ने पवित्र आत्मा की आवाज पहचानने के बारे बतलाया। उन्होंने कहा कि पवित्र आत्मा सभी भाषाएँ बोल सकते हैं किन्तु विविधताओं में सामंजस्य लाना जानते हैं। यह सामंजस्य कलीसियाई भावना है- एक ऐसी भावना जो उन लोगों में अनुपस्थित है जिनके पास धार्मिक भावना है, लेकिन पवित्र आत्मा की कमी है।

संत पापा ने सिनॉड के सवाल पर पवित्र आत्मा द्वारा उत्पन्न सामंजस्य के विषय में बोलते हुए कहा कि सिनॉडालिटी पर सिनॉड का मूल संत पापा पौल छटवें की उस पहचान में है कि लातीनी कलीसिया ने सिनॉडल आयाम खो दिया है।

संत पापा ने जोर दिया कि सिनॉड कोई संसद नहीं है जहाँ जो चाहें बोल दें। बल्कि सिनॉड में सभी उस सौहार्द की खोज करते हैं जिसको पवित्र आत्मा उत्पन्न करते। अतः सिनॉड में हरेक के बोलने में पृथकता है लेकिन पवित्र आत्मा हैं जो सामंजस्य उत्पन्न करते हैं।”

वार्ता का महत्व

संत पापा ने वार्ता के महत्व पर भी बल दिया, खासकर, रूस और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों को क्या कहेंगे के सवाल पर। संत पापा ने याद किया कि दोनों नेताओं ने युद्ध से पहले रोम में उनसे मुलाकातें की थीं। "मैं मानता हूँ कि वार्ता हमेशा आगे बढ़ाता है" लेकिन यह भी गौर किया कि वार्ता हमेशा कठिन होता है।

संत पापा इस बात पर निश्चित नहीं थे कि वे कीएव या मोस्को की यात्रा कर पायेंगे क्योंकि कनाडा की यात्रा के बाद उनके पैर में फिर से मुश्किलता हो रही थी। फिर भी उन्होंने कहा कि वे उन चीजों को कर रहे हैं जिनको कर सकते हैं और सभी से आग्रह किया कि वे जो कर सकते हैं उन्हें करें। उन्होंने कहा कि "हम एक साथ कुछ कर सकते हैं।" बतलाया कि वे इस परिस्थिति का साथ अपने दुःख और प्रार्थनाओं द्वारा दे रहे हैं।

विश्व युवा दिवस के पूर्व ˸ खिड़की खोलो!

संत पापा फ्राँसिस के साथ साक्षात्कार में कई अन्य विषयों को भी शामिल किया गया, जिसमें अच्छी धर्मविधि का महत्व, कलीसिया में महिलाओं की भूमिका और उनकी दिनचर्या शामिल हैं।

अंत में, यह पूछे जाने पर कि विश्व युवा दिवस से पहले पुर्तगाल की कलीसिया के लिए आप क्या संदेश देंगे, संत पापा फ्राँसिस ने कहा, "खिड़की को देखो। खिड़की को देखो। और अपने आप से पूछो, क्या मेरे पास एक खुली खिड़की है? यदि यह नहीं खुलती, तो इसे जितना जल्दी हो सके खोलो। अपनी नाक को दीवार से सटाकर न रखें, किसी समस्या के बारे में, चाहे वह कुछ भी हो। जाने कि हम भविष्य की ओर एक साथ चल रहे हैं, कि एक रास्ता है। रास्ता को देखो...खिड़की खोलो! अपनी नाक से परे देखो! देखो, खोलो, क्षितिज को बनाए रखो, और अपने हृदय को चौड़ा करो।”

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06 September 2022, 17:55