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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

यूखरिस्तीय कॉन्ग्रेस में पोप : दुनिया की मेज पर रोटी बांटी जाए

संत पापा फ्राँसिस ने 25 सितम्बर को ख्रीस्तयाग अर्पित कर मातेरा शहर में आयोजित 27वें राष्ट्रीय यूखरिस्तीय कॉन्ग्रेस का समापन किया। उन्होंने ख्रीस्तीयों को स्मरण दिलाया कि गरीबों के प्रति सहानुभूति के बिना यूखरिस्तीय समारोह नहीं मनाया जा सकता।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

संत पापा ने ख्रीस्तीयों को निमंत्रण दिया कि वे "उस रोटी के स्वाद की ओर लौटें, जो याद दिलाती है कि जब इस संसार में हमारा अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, तब यूखरिस्त पुनरुत्थान की प्रतिज्ञा का पूर्वाभास है और एक नए जीवन की ओर ले चलता है जो मृत्यु पर विजय दिलाता।"

दक्षिणी इटली के शहर मातेरा में रविवार को 27वें राष्ट्रीय यूखरिस्तीय कॉन्ग्रेस के समापन मिस्सा बलिदान में संत पापा फ्राँसिस ने उपदेश के दौरान संत लूकस रचित सुसमाचार पर चिंतन किया, जो एक धनी व्यक्ति एवं लाजरूस की कहानी प्रस्तुत करता है। गरीब लाजरूस अमीर की मेज की जूठन से अपनी भूख मिटाने के लिए तरसता था। (लूक.16,16-31)

संत पापा ने कहा, "सुसमाचार जिसको हमने अभी-अभी सुना, बतलाता है कि दुनिया की मेज पर रोटी हमेशा नहीं बांटी जाती; यह हमेशा समन्वय की खुशबू उत्पन्न नहीं करती; इसे हमेशा न्याय के साथ नहीं तोड़ा जाता।"  

संत पापा ने विश्वासियों को येसु द्वारा बतलाये गये दृष्टांत पर चिंतन करने हेतु प्रेरित किया जो एक ओर अमीर व्यक्ति को प्रस्तुत करता है जो बैंगनी वस्त्र और मलमल पहन कर हर दिन दावत उड़ाया करता था और दूसरी ओर एक कंगाल व्यक्ति है जिसका पूरा शरीर फोड़ों से भरा था। वह अमीर की मेज की जूठन से अपनी भूख मिटाने के लिए तरसता था और कुत्ते आकर उसके फोड़े चांटा करते थे।

संत पापा ने कहा कि इस विरोधाभास की स्थिति पर चिंतन करते हुए हम अपने आप से पूछें कि "ख्रीस्तीय जीवन का स्रोत एवं केंद्र" यूखरिस्त संस्कार, हमसे क्या मांगता है?

मातेरा में ख्रीस्तयाग
मातेरा में ख्रीस्तयाग

ईश्वर को प्राथमिकता

संत पापा ने कहा कि सर्वप्रथम यूखरिस्त हमें ईश्वर की प्राथमिकता की याद दिलाता है। दृष्टांत का धनी व्यक्ति ईश्वर के साथ संबंध के लिए खुला नहीं था: वह सिर्फ अपना स्वार्थ देखी, अपनी जरूरतों को पूरा किया और जीवन में ऐश आराम करता रहा। वह अपने आपको खुश करता एवं दुनियावी दौलत की पूजा करता था। वह अपनी ही छोटी दुनिया में बंद था। वह आत्मनिर्भर, धन का मतवाला, घमंड में चूर था। उसके जीवन में ईश्वर के लिए कोई स्थान नहीं था क्योंकि वह सिर्फ अपनी पूजा करता था।"

उन्होंने कहा कि यह कोई संयोग नहीं है कि उसका नाम नहीं लिया गया है : उसे अमीर कहा गया है क्योंकि उसकी पहचान उस दौलत से होती है जिसपर वह राज करता था।

संत पापा ने कहा कि यह एक दुखद सच्चाई है जिसको हम आज भी देखते हैं, "जब हम अपने पास जो हैं (सम्पति) उससे हम क्या है (पहचान) के भ्रम में पड़ते हैं, जब हम लोगों की तुलना उनके धन से, उनके पद से, उनकी भूमिका से अथवा उनके कपड़ों के लेबल से करते हैं।"   

संत पापा ने इसे "रखने और दिखाने का धर्म कहा जो अक्सर दुनिया पर राज करता है लेकिन अंत में हमें खाली हाथ छोड़ देता है।"

दूसरी ओर, गरीब व्यक्ति लाजरूस है जिसका अर्थ है "ईश्वर मदद करेंगे।"

मातेरा में ख्रीस्तयाग
मातेरा में ख्रीस्तयाग

"गरीबी और हाशिये पर जीवनयापन करने के बावजूद उसकी पहचान बरकरार है क्योंकि वह ईश्वर के साथ जीता है। उसके नाम में ही ईश्वर जुड़ा है और अपने जीवन में वह ईश्वर पर अटल भरोसा रखता है।"

संत पापा ने कहा कि हमारे लिए चुनौती यहीं हैं जिसको यूखरिस्त हमारे जीवन के लिए प्रदान करता है कि हम ईश्वर की उपासना करें, अपने आपकी नहीं।

ईश्वर को अपने जीवन के केंद्र में रखने का निमंत्रण देते हुए संत पापा ने विश्वासियों से कहा, "यदि हम अपने आपकी पूजा करने लगेंगे तो हम अपने ही अंदर बंद होकर सांस के अभाव में मर जायेंगे; यदि हम दुनिया के धन की पूजा करेंगे तब हम उनके चंगुल में फंस जायेंगे और वे हमें अपना गुलाम बना लेंगे; यदि हम दिखावे के देवता की पूजा करेंगे तब हम फिजूल खर्ची हो जायेंगे और देर-सबेर जीवन हमें बिल पेश करेगा।"

जबकि यदि हम यूखरिस्त में उपस्थित प्रभु येसु की आराधना करेंगे तो हम अपने जीवन के लिए नया 'दृष्टिकोण' प्राप्त करेंगे कि "मैं वह वस्तु नहीं हूँ जो मेरे पास है अथवा सफलता जिसको मैंने प्राप्त की है; मेरा जीवन उस पर निर्भर नहीं करता है कि मैं कितना दिखा पाता हूँ; और न ही समाप्त होता है जब मैं असफल होता और गिर जाता हूँ।"

"मैं एक प्यारा पुत्र हूँ; ईश्वर का आशीर्वाद मुझमें है; उन्होंने मुझे सौंदर्य से विभूषित किया है एवं चाहते हैं कि मैं हर प्रकार के बंधनों से मुक्त रहूँ। जो ईश्वर की उपासना करता वह किसी का गुलाम नहीं बनता।"

मातेरा में ख्रीस्तयाग
मातेरा में ख्रीस्तयाग

अपने भाइयों एवं बहनों के लिए प्रेम

संत पापा ने कहा कि ईश्वर को प्राथमिकता देने के साथ-साथ यूखरिस्त हमें भाइयों एवं बहनों से प्रेम करने का निमंत्रण देता है।

उन्होंने कहा कि यह प्रेम का संस्कार है। "ख्रीस्त ही हमारे लिए अपने आपको अर्पित करते और हमारे लिए तोड़ते तथा हमें भी वैसा ही करने के लिए आमंत्रित करते हैं।"

सुसमाचार का अमीर व्यक्ति इस कर्तव्य से चूक गया और जीवन के अंत में जब प्रभु मेज पर आये, तब उसे लाजरूस की याद आई, किन्तु अब्राहम ने उससे कहा : "हमारे और तुम्हारे बीच एक भारी गर्त अवस्थित है।" (लूक. 16:26)

संत पापा ने समझाया कि "हमारा अनन्त भविष्य इस वर्तमान जीवन पर निर्भर करता है; यदि हम अपने आप और अपने भाइयों के बीच गहरी खाई खोदेंगे; यदि हम अपने भाइयों से अलग होने के लिए दीवार बनायेंगे, तब हम अकेलापन में बंद हो जायेंगे और मर जायेंगे।"  

हमारे समय की कहानी

संत पापा ने गौर किया कि इस दृष्टांत की कहानी हमारे समय की भी कहानी है : "अन्याय, असमानता, पृथ्वी के संसाधनों का असमान वितरण, कमजोर लोगों पर बलवान लोगों का शोषण, गरीबों के रूदन पर उदासीनता, उपेक्षा के द्वारा हर दिन खाई खोदना, हमें तटस्थ नहीं छोड़ सकता।"  

संत पापा ने ख्रीस्तीयों का आह्वान यह पहचानने के लिए किया कि यूखरिस्त एक नई दुनिया की भविष्यवाणी है, यह येसु की उपस्थिति है जो हमें प्रेरित करती है कि हम मन-फिराव करें: "उदासीनता से सहानुभूति की ओर, बर्बाद करने से बांटने की ओर, स्वार्थ से प्रेम और व्यक्तिवाद से भाईचारा की ओर बढ़ें।"

मातेरा में ख्रीस्तयाग
मातेरा में ख्रीस्तयाग

एक यूखरिस्तीय कलीसिया

संत पापा ने कहा कि "एक यूखरिस्तीय कलीसिया को उन महिलाओं एवं पुरूषों से बनना चाहिए, जो खुद को उन लोगों के लिए रोटी के समान तोड़ते हैं, जो कोमलता एवं सहानुभूति के भूखे हैं और जिनका जीवन आशा के उत्तम खमीर के बिना टूट गया है।"

यह कलीसिया, यूखरिस्त के सामने घुटनी टेकना और रोटी में उपस्थित प्रभु की आराधना करना जानती है, लेकिन यह पीड़ितों के घाव के सामने झुकना, गरीबों को उठाना, दुखियों के आँसू पोछना, खुद को सभी लोगों के लिए आशा एवं आनन्द की रोटी बनाना भी जानती है।"     

"लाजरूसों के प्रति सहानुभूति के बिना सच्चा यूखरिस्त आराधना नहीं हो सकता जो आज भी हमारी बगल में चलते हैं।"

कॉन्ग्रेस की विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए संत पापा ने विश्वासियों को निमंत्रण दिया, कि वे उस रोटी के स्वाद की ओर लौटें, क्योंकि जब हम प्रेम और आशा के लिए भूखे हैं अथवा जीवन की कठिनाइयों एवं पीड़ाओं से परेशान हैं येसु हमारे जीवन के भोजन बन जाते हैं जो हमें पोषित करता एवं हमें चंगा करता है।

भाईचारा के प्रेरित

संत पापा ने कहा, "आइये हम उस रोटी के स्वाद की ओर लौटें क्योंकि जब दुनिया में गरीबों के विरूद्ध अन्याय और भेदभाव जारी है, येसु हमें बांटने की रोटी देते और प्रत्येक दिन भाईचारा, न्याय एवं शांति के प्रेरित के रूप में भेजते हैं।"

"आइये हम यूखरीस्तीय कलीसिया की रोटी के स्वाद की ओर लौटें जो येसु को केंद्र में रखती और सभी लोगों के लिए कोमलता एवं करूणा की रोटी बनती है।"

"आइये हम उस रोटी के स्वाद की ओर लौटें, यह याद करने के लिए कि जब इस पृथ्वी पर हमारा अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, तब यूखरिस्त, पुनरूत्थान की प्रतिज्ञा का पूर्वाभास है और यह हमें एक नये जीवन की ओर ले चलता है जो मौत पर विजयी है।"

संत पापा ने ख्रीस्तीयों तब-तब उस रोटी के स्वाद की ओर लौटने के लिए निमंत्रण दिया, जब-जब आशा मुरझा जाती और हम हृदय में अकेलापन, आंतरिक थकान, पाप की पीड़ा, सफल न होने का भय महसूस करते।”  

उन्होंने कहा, "आइये हम येसु की ओर मुड़ें, येसु की आराधना करें, येसु का स्वागत करें क्योंकि उन्होंने मौत पर विजय पायी है और वे हमारे जीवन को सदा नवीकृत करते हैं।"

मातेरा में ख्रीस्तयाग

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25 September 2022, 13:45