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धर्मशिक्षकों के तृतीय अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस के करीब 1400 प्रतिभागियों के साथ संत पापा फ्राँसिस धर्मशिक्षकों के तृतीय अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस के करीब 1400 प्रतिभागियों के साथ संत पापा फ्राँसिस   (ANSA)

पापा धर्मशिक्षकों से : 'विश्वास का एक जीवंत अनुभव साझा करें'

संत पापा फ्राँसिस धर्मशिक्षकों के तृतीय अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस में भाग लेने वाले धर्मशिक्षकों का स्वागत किया और उन्हें येसु मसीह के प्यार को दिखाने के लिए उनके आह्वान को याद कराते हुए, विश्वास के एक जीवंत अनुभव को साझा करने हेतु प्रोत्साहित किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 10 सितम्बर 2022 (वाटिकन न्यूज) : धर्मशिक्षकों के तृतीय अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस के करीब 1400 प्रतिभागियों से संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के संत पापा पॉल षष्टम सभागार में मुलाकात की। संत पापा ने बड़ी संख्या में देश विदेश से आये धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, धर्मबहनों और लोकधर्मियों को देखकर खुशी जाहिर करते हुए कहा मैं आप सभी धर्मशिक्षकों का हादिक स्वागत करता हूँ। प्रभु ने हम सभी को अपने सुसमाचार को हर व्यक्ति तक पहुँचाने हेतु हमें बुलाया है।

संत पापा ने इस बात को स्वीकार किया कि उनहें बुधवारीय आम दर्शन समारोह पसंद है क्योंकि वे हर हफ्ते मैं कई लोगों से मिलते हैं जो धर्मशिक्षा में भाग लेने आते हैं। यह एक विशेषाधिकार प्राप्त क्षण है क्योंकि, ईश्वर के वचन और कलीसिया की परंपरा पर विचार करते हुए, हम परमेश्वर के लोगों के रूप में चलते हैं, और हम दैनिक जीवन में सुसमाचार की गवाही देने के लिए भी बुलाये गये हैं।

धर्मशिक्षक बनने से कभी न थकें

संत पापा ने कहा कि वे धर्मशिक्षक बनने से कभी न थकें। धर्मशिक्षा को स्कूल के अन्य विषयों की भांति सिखाया नहीं जा सकता। लेकिन यह विश्वास का एक जीवंत अनुभव है, हम में से प्रत्येक नई पीढ़ियों को इसे बांटने की इच्छा महसूस करता है। बेशक, हमें यह सुनिश्चित करने के सर्वोत्तम तरीके खोजने होंगे कि विश्वास का संचार हमारी बात सुनने वाले लोगों की उम्र के आधार पर हो। उनमें से प्रत्येक के साथ हमारी व्यक्तिगत मुलाकात निर्णायक है। केवल पारस्परिक मुलाकात ही पहली उद्घोषणा प्राप्त करने के लिए हृदय को खोलती है और ख्रीस्तीय जीवन में उसी गतिशीलता के साथ बढ़ने की इच्छा रखती है और धर्मशिक्षा उसे लागू करने की अनुमति देता है। धर्मशिक्षा के लिए नई निर्देशिका, जो हाल के महीनों में आपको वितरित की गई है, आपके लिए अपने धर्मप्रांतों और पल्लियों में धर्मशिक्षा को नवीनीकृत करने में बहुत उपयोगी होगी।

धर्मशिक्षा: प्रभु से मुलाकात एवं उनका स्वागत करना

संत पापा ने धर्मशिक्षा के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए इसे "सुसमाचार प्रचार का एक विशेषाधिकार प्राप्त चरण" के रूप में वर्णित किया, जहां हर कोई येसु मसीह का सामना करता है और उसे हमारे जीवन में विकसित होने देता है।

संत पापा ने याद किया कि इस तीसरी अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस का विषय, "धर्मशिक्षक, मसीह में नये जीवन का साक्षी", काथलिक कलीसिया की धर्मशिक्षा के तीसरे भाग पर केंद्रित है। उन्होंने गौर किया कि  विशेष रूप से, सही मायने में इस नए जीवन के गवाह होने के बारे में धर्मशिक्षा क्या कहती है।

"जब हम येसु मसीह में विश्वास करते हैं, उसके रहस्यों में भाग लेते हैं और उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं, तो उद्धारकर्ता स्वयं हम में, अपने पिता और अपने भाइयों, हमारे पिता और हमारे भाइयों से प्रेम करता है। आत्मा के माध्यम से वे हमारी गतिविधि का जीवित और आंतरिक नियम बन जाते हैं।" (काथलिक कलीसिया की धर्मशिक्षा, न. 2074)

संत पापा ने कहा, "येसु ने हमें आज्ञा दी है, जैसा कि मैंने तुमसे प्यार किया है, वैसे ही तुम एक दूसरे से प्यार करो। सच्चा प्यार ईश्वर से आता है और येसु ने हमारे बीच अपनी उपस्थिति के रहस्य, उपदेश, चमत्कार और विशेष रूप से उनकी मृत्यु और पुनरुत्थान से प्रकट किया।"

"मसीह का प्रेम नए जीवन की सच्ची और एकमात्र आज्ञा के रूप में बना रहता है, जिसे ख्रीस्तीय, पवित्र आत्मा की सहायता से, अपने दिन-प्रतिदिन की यात्रा में बनाता है जो कभी नहीं रुकती।"

प्यार के स्रोत के पास लौटना

अंत में, सत पापा ने धर्मशिक्षकों को याद दिलाते हुए कहा, "आप येसु मसीह को दृश्यमान और मूर्त बनाने के लिए बुलाये गये है, येसु हम प्रत्येक से प्यार करते हैं, हमारे जीवन का मार्गदर्शन करते हैं और हमारे नैतिक कार्यों को समझने में हमारी मदद करते हैं।"

"प्यार के इस स्रोत से कभी भी मुंह न मोड़ें, क्योंकि यह हमेशा और हर चीज के बावजूद खुश और आनंद से भरपूर रहने की शर्त है। यह नया जीवन है जो बपतिस्मा के दिन हमारे भीतर शुरु हुआ और हमें सभी के साथ इसे बांटने का दायित्व मिला है ताकि यह प्रत्येक व्यक्ति में विकसित हो सके और फल दे सके।"

संत पापा ने संक्षिप्त रूप से उन धर्मशिक्षकों के बारे में बात की जो उनके अपने जीवन और विश्वास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया है। विशेष रूप से, उन्होंने एक बुजुर्ग सिस्टर दोलोरेस को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने उन्हें बचपन में सिखाया था और जिन्हें आज वे उनके समर्पण, देखभाल और साक्ष्य को याद करते हैं। उन्होंने धर्मशिक्षकों को प्रोत्साहित किया कि वे अपने स्वयं के कामों में दूसरों पर पड़ने वाले अच्छे काम और प्रभाव को कभी भी नज़रअंदाज़ न करें, जैसा कि सिस्टर दोलोरेस ने उनके साथ किया था।

अंत में संत पापा ने उन्हें माता मरियम और शहीद धर्मप्रचारकों की मध्यस्ता में सौंपते हुए अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

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10 September 2022, 17:03