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अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेनेवाले माता मरियम के दल के 250 युवाओं से मुलाकात करते हुए संत पापा फ्रांँसिस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेनेवाले माता मरियम के दल के 250 युवाओं से मुलाकात करते हुए संत पापा फ्रांँसिस  (Vatican Media)

माता मरियम के दल से पोप ˸ विश्वास, आशा व भाईचारा के साहसी साक्षी

संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार, 6 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेनेवाले इक्वीप नोड्र डम (माता मरियम दल) के 250 युवाओं से वाटिकन के क्लेमेंटीन सभागार में मुलाकात की तथा उन्हें सामुदायिक जीवन, युवाओं और विवाहित दम्पतियों की मदद करने और खुद को प्रतिदिन कुँवारी मरियम को सौंपते हुए विश्वास का साक्ष्य देने का प्रोत्साहन दिया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 6 अगस्त 2022 (रेई) ˸ संत पापा ने कहा, "कलीसिया उन्हें प्यार करती है जिन्हें येसु प्यार करते हैं। सुसमाचार हम पढ़ते हैं कि एक दिन येसु ने एक युवक को गौर से देखा, उसे प्यार किया एवं अपने मिशन में अपना अनुसरण करने का निमंत्रण दिया। दुर्भाग्य से उस युवक ने येसु के इस निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया। किन्तु कुछ लोगों ने अपना सब कुछ छोड़कर उनका अनुसरण किया। येसु की यही स्नेही नजर हर सदी में, पीढ़ी दर पीढ़ी पार होती और हम प्रत्येक तक पहुँचती है।"

संत पापा ने कहा, "येसु के लिए हरेक युवा एक आशा का स्रोत है ˸ मित्रता की आशा, एक साथ यात्रा की आशा, मिशन हेतु मिलकर बाहर निकलने की आशा। आप प्रत्येकजन कलीसिया की आशा के स्रोत भी हैं। और खास रूप से कलीसियाई अनुभव, इक्वीप नोड्र डम की आशा के स्रोत हैं।     

संत पापा ने गौर किया कि युवा सदस्य के रूप में, वे येसु और कुँवारी मरियम के साथ संबंध में बढ़ते हुए और अपने दैनिक जीवन में अपनी मिशनरी बुलाहट को पहचानते हुए काथलिक धर्मसिद्धांत के अनुसार जीने के लिए समर्पित हैं।

संत पापा ने अपने सम्बोधन में इक्वीप, नोड्र डम और युवाओं पर चिंतन किया।

दल के रूप में कार्य करें

संत पापा ने कहा, "इक्वीप में आपका अनुभव एक दल का है। यह एक वरदान है जिसको हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक समुदाय का हिस्सा, परिवारों के एक परिवार का हिस्सा होना है जो विश्वास को जीता है, एक महान वरदान है। कोई नहीं कह सकता कि मैं अकेला खुद से बच सकता हूँ। हम सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं ताकि एक साथ दल में काम करना सीख सकें।

ईश्वर संबंधों के इस जाल का हिस्सा बनना चाहते हैं। वे समुदाय के रूप में हम सभी को एक साथ लाते हैं और हमारी पहचान एवं सहभागिता की भावना के द्वारा हमारे जीवन को पूर्णता प्रदान करते हैं। प्रभु हमें अपनी प्रजा बनाकर हमें बचाते हैं। दुनिया हमें यह सोचने के लिए प्रेरित न करे कि हम खुद बेहतर कर सकते हैं। हम खुद से कुछ सफलता हासिल कर सकते हैं किन्तु प्रेम, सहानुभूति, लोगों के साथ सहभागी होने, एक साथ होने के सपने का निःशुल्क अनुभव, एक साथ जोखिम उठाने, पीड़ा सहने और खुशी मनाने के अवसरों को खो देंगे।

संत पापा ने युवाओं से कहा कि वे खुले होने, जोखिम उठाने एवं दूसरों से नहीं डरें। उन्होंने स्वीकार किया कि बदमाशी, दुर्व्यवहार, बेईमानी और विश्वासघात, का डर होता है। किन्तु डर हमसे बड़ा नहीं होता। हम डरनेवाले व्यक्ति नहीं हैं क्योंकि हम अकेले नहीं होते हमारे साथ हमारे प्रियजन, हमारे परिवार, मित्र हैं और ईश्वर जो हमारे पिता हैं हमें कभी नहीं छोड़ते। संत पापा ने उन्हें प्रोत्साहन देते हुए कहा कि इस वर्चुवल युग में और एकाकीपन के बीच उन्होंने दल में जुड़ने का निर्णय लिया है। वे इसमें बढ़ते रहें, सेतुओं का निर्माण करें एवं दल के रूप में कार्य करें।  

माता मरियम की भक्ति

संत पापा ने कहा, जब कभी हम माता मरियम को अपने जीवन में स्वीकार करते हैं, तब केंद्र जो प्रभु हैं वे हमसे दूर नहीं होते। माता मरियम कभी भी अपनी ओर इंगित नहीं करती बल्कि येसु एवं हमारे भाई बहनों की ओर इशारा करती है। हम येसु के उन शब्दों पर चिंतन करें जिसको वे अपने शिष्य योहन के लिए कहते हैं, ये आपकी माता हैं। सचमुच येसु ने अपनी माता को हमारे लिए दिया है। और मरियम ने इसे हाँ कहकर स्वीकार किया है इस तरह वह कलीसिया की माँ बन गई हैं। हम उन्हें एक बच्चे की तरह, एक गरीब और दीन व्यक्ति की तरह अपने आपको सिपूर्द कर सकते हैं। संत पापा ने प्रोत्साहन दिया कि वे हरेक दिन अपने आपको कुँवारी मरियम को समर्पित करें। ताकि हम वार्ता एवं आपसी स्वीकृति की भावना में बढ़ सकें।  

भविष्य युवाओं के हाथों में

संत पापा ने कहा कि भविष्य युवाओं का है। किन्तु यह उन्हीं युवाओं का है जिनके पास दो गुंण हैं- पंख और जड़। पंख उड़ने, सपने देखने और रचनात्मक होने के लिए तथा जड़ बुजुर्गों की प्रज्ञा से अपने को समृद्ध बनाने के लिए।

अतः हम अपने आप से पूछे, "मेरे पास किस तरह के पंख हैं? क्या मेरी आँखें झुकी हुई हैं? क्या मैं अपने आप में बंद हूँ? अथवा क्या मैं अपनी नजर उठाने और क्षितिज की ओर देखने के लिए तैयार हूँ? क्या मेरे हृदय सपनों, बड़ी योजनाओं और आकांक्षाओं से भरे हैं? अथवा क्या ये शिकायतों, नकारात्मक विचारों, न्याय और पूर्वाग्रह के कारण झुक गये हैं?"

उसके बाद पूछ सकते हैं ˸ मेरी जड़े कैसी हैं? क्या मैं सोचती हूँ कि दुनिया मुझ से शुरू हुई है अथवा क्या मैं एक बड़ी नदी का हिस्सा होना महसूस करता जो काफी दूर बह चुका है? क्या मैं भायशाली हूँ कि मेरे दादा-दादी अब भी जिंदे हैं, मेरे साथ उनका क्या संबंध है?

अंततः संत पापा ने वयस्कों, विवाहितों एवं उनके संचालक पुरोहितों को सम्बोधित कर कहा कि युवाओं की यात्रा में उनका साथ देते हुए वे हमेशा उनके सामने साक्ष्य प्रस्तुत करें, ख्रीस्त और कलीसिया के प्रेम का, सुनने एवं वार्ता करने के लिए तत्परता का, उदार सेवा एवं प्रार्थना का। अंत में, संत पापा ने उन्हें धन्यवाद दिया एवं उनपर ईश्वर की आशीष की कामना की तथा उन्हें कुँवारी मरियम को सिपूर्द किया।

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06 August 2022, 16:07