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संत पापा कनोसियन धर्मबहनों के साथ संत पापा कनोसियन धर्मबहनों के साथ  (ANSA)

संत पापा कनोसियन धर्मबहनों से: "ईशवचन की महिलाएँ" बनें

कनोसियन डॉटर्स ऑफ चारिटी की महा सभा के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने धर्मबहनों को ईश्वर और गरीबों की सेवा के उनके मिशन में प्रोत्साहित किया और उन्हें माता मरिया के नक्शेकदम पर चलने के लिए "ईशवचन को जीने वाली महिलाएँ" बनने हेतु आमंत्रित किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 27 अगस्त 2022 (वाटिकन न्यूज) संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार को वाटिकन में कनोसियन डॉटर्स ऑफ चारिटी का महासभा में प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्हें संबोधित करते हुए, संत पापा ने परिचय भाषण के लिए धर्मसंध की सुपीरियर जनरल को धन्यवाद दिया। संत पापा ने उनके साथ महासभा के विषय " ईशवचन को जीने वाली महिलाएँ, शर्तहीन प्रेम" पर अपने चिंतन को साझा किया।

ईश वचन की महिलाएं

संत पापा ने धन्य कुंवारी मरिया को "ईश वचन को जीने वाली महिला" और एक शिष्य के रूप में पेश किया। संत पापा ने कहा कि धर्मबहनें माता मरियम को देखते हुए और प्रार्थना में उनके साथ संवाद करके सीख सकती हैं कि "ईश वचन की महिला" होने का क्या अर्थ है।

यहां, बड़ी बुजुर्ग धर्मबहनें अपनी जवान धर्मबहनों को सिखा सकती हैं कि "विस्मय जो कम नहीं होता है, एक प्रशंसा जो उम्र के साथ बढ़ती है, उस वचन की स्वीकृति जो जीवन में पूर्ण और अधिक ठोस बन जाती है।"

छोटी धर्मबहनें अपनी ओर से बुजुर्ग धर्मबहनों को जीवन में खोज करने के लिए उत्साहित रहने हेतु प्रेरित कर सकती हैं। अपने दिलों की गहराई में मौन रुप से वचनों को प्रतिध्वनित करना सीखती हैं, खुद को आश्चर्यचकित करती हैं, यहां तक प्रभु से सवाल जवाब करती हैं।”

जहाँ तक मध्यम आयु की धर्मबहनों के लिए, संत पापा ने स्वीकार किया कि वे अधिक जोखिम समय में हैं क्योंकि यह कुछ नुकसानों के साथ बीतने का युग है और अधिक जिम्मेदारी का एक चरण भी है, इस प्रकार कामों में अत्यधिक सक्रियता में फिसलना आसान हो जाता है।

संत पापा ने आग्रह किया कि महासभा के आदर्श वाक्य को सभी धर्मबहनें फिर से चिंतन करें, "माता मरियम के स्कूल में खुद को रखें और ऐसी महिलाएं बनें जो शर्तहीन प्यार करती हैं।"

शर्तहीन प्यार करना

आदर्श वाक्य ‘शर्तहीन प्यार करना’ का दूसरा तत्व, "एक क्षमता है जो पवित्र आत्मा से आती है", हमारे प्रयासों से नहीं बल्कि "ईश्वर से जो हमेशा बिना शर्त प्यार करते है।"

संत पापा ने आगे कहा कि महा सभा का विषय आज के मिशन में और उसके लिए "पवित्रता के जीवन हेतु पुन: विन्यास" की बात करता है। उन्होंने आगे कहा कि "पवित्रता" और "मिशन" ख्रीस्तीय जीवन के संवैधानिक आयाम हैं और एक दूसरे से अविभाज्य हैं और सरल शब्दों में, "हर संत, हर पवित्र व्यक्ति का एक मिशन है" जैसा कि कैनोसा की संत मैग्दलीन की गवाही द्वारा देखने को मिलता है।

ईश्वर और गरीबों की सेवा

संत मैग्दलीन के जीवन पर विचार करते हुए, संत पापा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि उन्हें पूरी तरह से खुद को ईश्वर को समर्पित करने और गरीबों के करीब रहने के लिए बुलाया गया था।

उसने कहा कि इस दोहरे संबंध में, पवित्र आत्मा उसे ठोस परिस्थितियों में मार्गदर्शन करता था और वह खुद को पवित्र  आत्मा से निर्देशित होने देती थी; वह अपना रास्ता खुद खोजती थी लेकिन हमेशा विनम्र रहती थी। इस तरह से संत मैग्दलीन ने अपने दैनिक जीवन में माता मरियम को आदर्श मानते हुए मसीह के साथ पवित्र मिशनरी जीवन जीया।

इस प्रकार संत पापा फ्राँसिस ने धर्मबहनों को धर्मसभा के आदर्श वाक्य पर चलने, "ईश्वर और गरीबों से प्यार करने के लिए पवित्र आत्मा द्वारा निर्देशित" होने हेतु प्रोत्साहित किया। उन्होंने उनके "दिलों और चेहरों" में साहस, उदारता और खुशी के लिए भी उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने आगे कहा कि "आनंद आत्मा के फलों में से एक है और सुसमाचार का एक स्पष्ट संकेत है," खासकर जब यह कठिनाई और हाशिए में पड़े भाइयों और बहनों के साथ साझा करने में चमकता है।

समुदाय

संत पापा फ्राँसिस ने प्रबोधन ‘गौदेते एत एसुलताते’(आनंदित हो और खुशी मनायें) को याद करते हुए सामुदायिक आयाम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि "पवित्रता में बढ़ना समुदाय की एक यात्रा है ... यह भाईचारे को बढ़ावा देता है और हमें एक पवित्र और मिशनरी समुदाय बनाता है।"

संत पापा ने कहा कि समुदाय में रोजमर्रा के कार्य बहुत साधारण लगते हैं परंतु बहुत मायने रखते हैं क्योंकि जिस समुदाय में प्रेम है, जिसके सदस्य एक दूसरे की परवाह करते हैं और एक खुले और सुसमाचार प्रचार का वातावरण बनाते हैं, वह एक ऐसा स्थान है जहां पुनर्जीवित प्रभु मौजूद हैं और इसे पिता की योजना के अनुसार पवित्र करते हैं।

आराधना प्रार्थना

संत पापा ने तब  पवित्र साक्रामेंट की आराधना और प्रार्थनाओं के महत्व पर जोर दिया। संत पापा ने  संस्थापिका की गवाही को याद दिलाया, जिन्होंने अन्य संतों की तरह, प्रभु की उपस्थिति में आराधना के दौरान प्रेरितिक प्रेरणा को पाया था।

उन्होंने आगे कहा कि "पवित्र आत्मा हमें स्वयं केंद्रित से मसीह केंद्रित बनाता है, वह पड़ोसी की सेवा को संभव बनाता है जो कि धर्मपरायणता या कल्याणवाद नहीं है, बल्कि दूसरे के लिए खुलापन, निकटता और खुद को साझा करना है; एक शब्द में यह दया है।"

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27 August 2022, 17:08