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जैतून के पेड़ पर मिट्टी डालते संत पापा फ्राँसिस जैतून के पेड़ पर मिट्टी डालते संत पापा फ्राँसिस  (AFP or licensors)

पोप ˸ सृष्टि की स्तुति का मधुर गीत 'पीड़ा याचना' बन गया है

संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार को सृष्टि की देखभाल हेतु विश्व प्रार्थना दिवस मनाने के लिए एक संदेश भेजा।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 21 जुलाई 2022 (रेई) ˸इस साल सृष्टि की अवधि के लिए विषयवस्तु है, "सृष्टि की आवाज सुनना।" ख्रीस्तीय एकतावर्धक वार्ता की पहल पर स्थापित इस अवधि की शुरूआत 1 सितम्बर को सृष्टि की देखभाल हेतु विश्व प्रार्थना दिवस के साथ होगी और इसका समापन 4 अक्टूबर को संत फ्राँसिस असीसी के पर्व के साथ होगा।

संत पापा ने संदेश में लिखा, "यह सभी ख्रीस्तीयों के लिए हमारे आमघर की देखभाल हेतु प्रार्थना एवं एक साथ कार्य करने हेतु एक विशेष समय होगा।" कुस्तुनतुनिया के प्राधिधर्माध्यक्ष से प्रेरित, यह काल हमारे "पारिस्थितिक रूपांतरण" को विकसित करने का एक अवसर है। इस परिवर्तन का प्रोत्साहन संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने "पारिस्थितिक आपदा" के जवाब के रूप में दिया था तथा संत पापा पौल छटवें ने 1970 में इसकी भविष्यवाणी की थी।"

संत पापा ने कहा, "यदि हम सुनना सीख जाते हैं, तो हम सृष्टि की आवाज को, एक बेसुरापन के रूप में सुन सकते हैं। एक ओर, हम अपने प्यारे सृष्टिकर्ता की स्तुति में मधुर संगीत सुनते हैं ; वही दूसरी ओर, हमारे आमघर की एक व्यथित याचिका को सुनते हैं जो हमारे दुर्व्यवहार पर विलाप करती है।"

सृष्टि का मधुर संगीत हमें "पारिस्थितिक आध्यात्मिकता" का अभ्यास करने का निमंत्रण देता है, प्रकृति जगत में ईश्वर की उपस्थिति पर ध्यान देने हेतु प्रेरित करता है।" यह हमारी आध्यात्मिकता को इस चेतना पर आधारित करने का आहवान है कि हम बाकी जीव-जन्तुओं से अलग नहीं हैं बल्कि उनके साथ शानदार सार्वभौमिक मिलन में भाग लेते हैं।

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्त के अनुयायियों के लिए यह उज्ज्वल अनुभव हमारी उस जागरूकता को पुष्ट करता है कि "सब कुछ उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और उसके बिना एक भी चीज अस्तित्व में नहीं आई है।" (यो.1,30)

उन्होंने कहा कि सृष्टि के इस काल में हम, सृष्टि के महान गिरजाघर में फिर प्रार्थना करते और असंख्य जीव-जन्तुओं द्वारा गाये "भव्य ब्रह्मांडीय संगीत" का आनन्द लेते हैं जो ईश्वर की स्तुति करते हैं। आइये, हम संत फ्राँसिस असीसी के साथ गायें, "मेरे प्रभु, तेरी स्तुति हो, समस्त सृष्टि के लिए।" हम स्तोत्रकारों के साथ गायें, "सब प्राणी प्रभु की स्तुति करें।"(स्तोत्र 150:6)

संत पापा ने गौर किया कि दुर्भाग्य से इस मधुर संगीत के साथ वेदना का रूदन जुड़ा है। पहले स्थान पर हमारी बहन, माता पृथ्वी की है जो रो रही है। जो हमारे उपभोगतावाद की शिकार है वह हमारे शोषण एवं विनाश को बंद करने का आग्रह कर रही है। उसके बाद दूसरे जीव-जन्तु भी रो रहे हैं। सृष्टि के कार्य में ख्रीस्त की केंद्रीयता के बिल्कुल विपरीत, एक "अत्याचारी मानव केंद्रीयता" पर, अनगिनत प्रजातियाँ मर रही हैं और उनकी स्तुति के भजन खामोश हो गए हैं। हमारे बीच सबसे गरीब लोग भी रो रहे हैं। उन्हें जलवायु संकट का सामना करना पड़ रहा है और उनपर आकाल, बाढ़, तूफान और गर्म हवाओं का अधिक प्रभाव पड़ रहा है।

संत पापा ने आदिवासियों की पीड़ा की भी याद की। "हिंसक आर्थिक रूचियोँ के परिणाम स्वरूप उनके पूर्वजों की भूमि पर आक्रमण हो रहे हैं और उन्हें नष्ट किया एवं चारों ओर से उजाड़ा जा रहा है जिसके कारण उनका रूदन आकाश की ओर उठ रहा है।" अंततः उन्होंने हमारे बच्चों के आग्रह की याद की।

"अदूरदर्शी और स्वार्थी कार्यों से खतरा महसूस करते हुए, आज के युवा रो रहे हैं, बेचैनी से वे हम वयस्कों से हमारे ग्रह के पारिस्थितिक तंत्र के पतन को रोकने, या कम करने हेतु हर संभव प्रयास करने के लिए कह रहे हैं।"

पश्चाताप करने और बदलाव लाने का समय

इन पीड़ाओं को सुनकर उन्होंने कहा, "हमें पश्चाताप करना चाहिए और अपनी जीवन शैली एवं विनाशकारी प्रणालियों को संशोधित करना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "हम ईश्वर, पड़ोसी एवं सृष्टि के साथ एक नया संबंध स्थापित करने के लिए बुलाये जाते हैं।" पोप ने सुझाव दिया कि "हमारे आमघर के क्षय की वर्तमान स्थिति, अन्य वैश्विक चुनौतियों और त्रासदियों के सामने गौण नहीं है जिसे समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।"

 संत पापा ने राष्ट्रों से कार्य करने का आह्वान किया, विशेष रूप से, इस वर्ष पर्यावरण को समर्पित संयुक्त राष्ट्र के आगामी सम्मेलनों में।

कोप 27 और कोप 15 में आवश्यक महत्वाकांक्षी कदम

नवंबर में मिस्र में जलवायु परिवर्तन पर कोप 27, पेरिस समझौते के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देने में शामिल होने हेतु सभी के लिए अगले अवसर का प्रतिनिधित्व करता है।

संत पापा ने कहा, "इस कारण से भी, मैंने हाल ही में वाटिकन सिटी के नाम पर और उसकी ओर से परमधर्मपीठ को जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन और पेरिस समझौते में शामिल होने के लिए अधिकृत किया है, इस उम्मीद से कि मानवता 21वीं सदी को अपनी गंभीर जिम्मेदारियों को उदारतापूर्वक निभाने के लिए याद किया जाएगा।"

व्यक्ति और पर्यावरण के बीच समझौता की आवश्यकता

इसका मतलब है, "उपभोग और उत्पादन के मॉडल को 'रूपांतरित' करने के लिए, साथ ही जीवनशैली को सृष्टि के प्रति अधिक सम्मान एवं सभी के समग्र मानव विकास तथा वर्तमान और भविष्य को जिम्मेदारी, विवेक पर आधारित विकास / एहतियात, एकजुटता, गरीबों और आनेवाली पीढ़ियों के लिए चिंता के अनुकूल बनाना।"

"इन सब के मूल में, मनुष्य और पर्यावरण के बीच एक समझौता की आवश्यकता है, जो हम विश्वासियों के लिए, ईश्वर के रचनात्मक प्रेम को प्रतिबिंबित करनेवाला दर्पण है, जिससे हम आते हैं और जिसकी ओर हम यात्रा कर रहे हैं।" संत पापा ने कहा कि इस परिवर्तन द्वारा लाया गया संक्रमण "न्याय की मांगों की उपेक्षा नहीं कर सकता," विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से प्रभावित श्रमिकों के लिए।

राष्ट्रों को चार प्रमुख सिद्धांतों पर सहमत होना चाहिए

पोप ने कहा, "दिसंबर में कनाडा में होनेवाली जैव विविधता पर कोप15 शिखर सम्मेलन, सरकारों की सद्भावना को पारिस्थितिक तंत्र के विनाश और प्रजातियों के लुप्त होने को रोकने के लिए एक नए बहुपक्षीय समझौते को अपनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।"

संत पापा ने जैव विविधता के पतन को रोकने के लिए सभी प्रयासों का आह्वान किया, तथा राष्ट्र से निम्नलिखित चार "कुंजी" सिद्धांतों पर सहमत होने का आह्वान किया:

1. जैव विविधता को बचाने के लिए आवश्यक परिवर्तनों हेतु एक स्पष्ट नैतिक आधार का निर्माण करना;

2. जैव विविधता के नुकसान का मुकाबला करना, संरक्षण और सहयोग का समर्थन करना और स्थायी तरीके से लोगों की जरूरतों को पूरा करना;

3. इस तथ्य के आलोक में वैश्विक एकजुटता को बढ़ावा देना कि जैव विविधता एक वैश्विक आम चीज है जो साझा प्रतिबद्धता की मांग करता है;

4. भेद्यता की स्थितियों में लोगों को प्राथमिकता देना, जिसमें जैव विविधता के नुकसान से सबसे अधिक प्रभावित लोग शामिल हैं, जैसे कि आदिवासी, बुजुर्ग और युवा।

"आइये हम कहें ˸ ईश्वर के नाम पर, मैं महान निष्कर्षण उद्योगों - खनन, तेल, वानिकी, अचल संपत्ति, कृषि व्यवसाय से आग्रह करता हूँ – कि जंगलों, झीलों और पहाड़ों को नष्ट करना छोड़ दें, नदियों एवं समुद्रों को प्रदूषित करना बंद करें, भोजन और लोगों को विषक्त करना रोक दें।

संत पापा ने जोर देकर कहा, "हम आर्थिक रूप से समृद्ध देशों द्वारा किए गए" पारिस्थितिक ऋण "के अस्तित्व को स्वीकार करने में कैसे विफल हो सकते हैं, जिन्होंने पिछली दो शताब्दियों में सबसे अधिक प्रदूषित किया है," यह मांग करता है कि वे कोप 27 पर अधिक महत्वाकांक्षी कदम उठाएँ। संत पापा ने कहा कि दूसरों की ओर से देरी, कार्य करने में हमारी अपनी विफलता को कभी भी उचित नहीं ठहरा सकती।

निर्णायक कार्रवाई आवश्यक है क्योंकि हम अत्यंत तनावग्रस्त स्थिति के करीब पहुंच रहे हैं।

संत पापा ने प्रार्थना की कि ये दोनों बैठकें "जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता में कमी के दोहरे संकट का प्रभावी ढंग से सामना करने में" मानव परिवार को एकजुट करने का काम करें।"

"आनन्द मनानेवालों के साथ आनन्दित होने और रोनेवालों के साथ रोने के, संत पौलुस के उपदेश को ध्यान में रखते हुए, आइए हम सृष्टि की पीड़ादायक याचना के साथ रोएँ।"

संत पापा फ्राँसिस ने विश्वासियों एवं भली इच्छा रखनेवालों को निमंत्रण दिया है कि वे उस याचना को सुनें और इसका जवाब अपने कार्यों से दें ताकि हम और भावी पीढ़ी सृष्टि के मधुर संगीत के साथ जीवन और आशा के गीत गाते रह सकें।

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21 July 2022, 17:16