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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  

पोप फ्राँसिस ने अफ्रीका की बाहर जानेवाली कलीसिया की सराहना की

संत पापा फ्रांसिस ने प्रार्थना की है कि पवित्र आत्मा समस्त अफ्रीकी काथलिक ईशशास्त्रीय एवं प्रेरितिक नेटवर्क को प्रेरित करे, तथा नाईरोबी में इस सप्ताह हो रही ईशशास्त्रियों, धर्मसमाजी पुरोहितों, धर्मबहनों, लोकधर्मियों और धर्माध्यक्षों की सभा के प्रतिभागियों से आह्वान किया है कि वे "आत्मपरख करें कि ईश्वर आज हमसे क्या चाहते हैं," एक "आशा का चिन्ह।"

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

संत पापा ने कहा कि आत्मपरख के लिए एक साथ आना कि ईश्वर आज हमसे क्या कह रहे हैं, यह पहले ही बाहर निकलनेवाली अफ्रीकी कलीसिया का एक चिन्ह है।

समस्त अफ्रीकी ईशशास्त्रीय और प्रेरितिक नेटवर्क को प्रेषित संत पापा के वीडियो को मंगलवार को प्रकाशित किया गया जिसमें संत पापा ने सभा की सराहना की है और कहा है कि "यह एक आशा का चिन्ह है कि ईशशास्त्री, लोकधर्मी, पुरोहित, धर्मसमाजी धर्मबंधु एवं धर्मबहनें और धर्माध्यक्षों ने एक साथ चलने की पहल की है।"

संत पापा ने मंगलवार को दवितीय अखिल अफ्रीकी काथलिक सम्मेलन के बारे जानकर खुशी जाहिर की। सम्मेलन अफ्रीकी देश केनिया की राजधानी नैरोबी में 19 से 22 जुलाई को आयोजित की गई थी।   

संत पापा ने कहा, "आज ईश्वर हमें जो कह रहे हैं उसे पहचानने के लिए एक साथ आना, न केवल चुनौतीपूर्ण जरूरतों को निश्चित रूप से पूरा करने के लिए, लेकिन अफ्रीका के सपनों – सामाजिक, सांस्कृतिक, पारिस्थितिक और कलीसियाई सपनों को साकार करने – पहले से ही बाहर जानेवाली अफ्रीकी कलीसिया का चिन्ह है।" संत पापा ने उन्हें अपना प्रयास जारी रखने का प्रोत्साहन दिया।

अफ्रीकी लोगों के विश्वास और लचीलापन से प्रभावित

संत पापा फ्राँसिस ने अफ्रीका में अपनी यात्रा की याद की और कहा कि वे उन लोगों के विश्वास एवं लचीलापन से लगातार प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने कहा, "जैसा कि मैंने 2015 में मध्य अफ्रीकी गणराज्य की यात्रा में कहा था, अफ्रीका हमें हमेशा विस्मित करता है।"

अफ्रीकी लोगों के पूर्वजों की प्रज्ञा हमें इस बुलावे का स्मरण दिलाती है कि पर्वत कभी नहीं मिलते किन्तु लोग मिलते हैं।"

संत पापा ने सम्मेलन के सभी प्रतिभागियों को निमंत्रण दिया है कि वे एक साथ आगे बढ़ें, एक-दूसरे का साथ दें, आगे बढ़ें और मदद करें।

उन्होंने आग्रह किया कि प्रज्ञा ईशशास्त्र जैसा कि वे प्रस्ताव रखते हैं, गरीबों के लिए करुणा का सुसमाचार हो तथा लोगों एवं समुदायों को उनके जीवन के संघर्षों, शांति एवं आशा में उन्हें बल प्रदान करे।  

अपनी आशीष प्रदान करने से पूर्व संत पापा ने पवित्र आत्मा से प्रार्थना की कि वह उन्हें प्रेरित करे, और इस सम्मेलन से एक रास्ता बने जिसकी कलीसिया को जरूरत है ˸ मिशनरी, पारिस्थितिक मन-परिवर्तन, शांति, मेल-मिलाप और पूरे विश्व के बदलाव का रास्ता।

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19 July 2022, 15:03