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केबेक के परिसर में सेन्ट एन दी ब्यूप्रे तीर्थ पर सन्त पापा फ्राँसिस का स्वागत, 28.-7.2022 केबेक के परिसर में सेन्ट एन दी ब्यूप्रे तीर्थ पर सन्त पापा फ्राँसिस का स्वागत, 28.-7.2022  (AFP or licensors)

कलीसिया "असफलता का बोझ" महसूस कर रही है, सन्त पापा फ्राँसिस

सन्त पापा फ्राँसिस ने गुरुवार को यह स्वीकार किया कि कलीसिया सरकार समर्थित आवासीय विद्यालयों के संचालन में अपनी भूमिका के लिए "असफलता का बोझ" महसूस करती है, जहाँ देशज संस्कृतियों को मिटाने की कोशिश की गई और जो दुर्व्यवहार के स्थान बन गए।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

केबेक, शुक्रवार, 29 जुलाई 2022 (रेई, रॉयटर): सन्त पापा फ्राँसिस ने गुरुवार को यह स्वीकार किया कि कलीसिया सरकार समर्थित आवासीय विद्यालयों के संचालन में अपनी भूमिका के लिए "असफलता का बोझ" महसूस करती है, जहाँ देशज संस्कृतियों को मिटाने की कोशिश की गई और जो दुर्व्यवहार के स्थान बन गए।

कनाडा में अपनी सप्ताह भर की प्रेरितिक यात्रा के पाँचवे दिन सन्त पापा फ्रांसिस ने केबेक सिटी से लगभग 30 किलो मीटर की दूरी पर स्थित सेन्ट-एन-दी-ब्यूप्रे के महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग अर्पित किया तथा उन ज्वलंत मुद्दों पर विचार प्रकट किये  जिनके बारे में "कनाडा की तीर्थयात्री कलीसिया" प्रश्न उठाती रही है।

मसीह में मेल-मिलाप और चंगाई

सन्त पापा ने कहा, "हमारे देशज मूलनिवासी भाइयों और बहनों पर ढाये गये अत्याचारों में हम जख्मी हुए मसीह के शरीर को देखते हैं, हमने भी गहरी निराशा का अनुभव किया है, हम भी असफलता का बोझ महसूस कर रहे हैं।" "यह सब क्यों हुआ? येसु का अनुसरण करने वालों के समुदाय में यह कैसे हो सकता है?" ये प्रश्न सदैव हमारे अन्तःकरण को टटोलते रहेंगे।

सन्त पापा ने कहा, "संदेह और असफलता के ऐसे क्षणों में भागने और पछतावे में शरण लेने के प्रलोभन में हम पड़ सकते हैं, तथापि, सुसमाचार हमें सिखाता है कि येसु असफलता के क्षणों में हमारे साथ चलने के लिए तत्पर हैं तथा हमें, घटनाओं को एक नई रोशनी में, देखना सिखाते हैं।" उन्होंने कहा कि विनाशकारी आग के बाद सेन्ट-एन-दी-ब्यूप्रे के महागिरजाघर का निर्माण भी तीन बार किया गया। फिर भी, क्षेत्र के वफादार लोग सपने देखते रहे और फिर से "साहस और रचनात्मकता के साथ" निकल पड़े।"

सन्त पापा ने कहा कि यदि हम येसु को अपने जीवन और विश्वास का केन्द्र  मानेंगे तब हम "ईश्वर  के साथ, दूसरों के साथ, और स्वयं अपने साथ" मेल-मिलाप कर सकते हैं और "हमारे समाजों के भीतर पुनर्मिलन एवं शांति के साधन" बन सकते हैं।

पर्यवेक्षकों का मानना है कि देशज मूलनिवासियों के लिये निर्मित आवासीय स्कूलों में दुर्व्यवहार पर काथलिक कलीसिया की सामूहिक विफलता पर सन्त पापा द्वारा की गई ये अभी तक की सबसे मजबूत टिप्पणियां थीं। सन्त पापा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि काथलिक कलीसिया सरकार समर्थित शिक्षण संस्थाओं में उसके मिशनरियों के सहयोग के लिये क्षमा याचना करती है. साथ ही आवासीय स्कूलों में जो हुआ उसके लिये उन्होंने  "सच्चाई की तलाश करने के बजाय संस्था के बचाव" के खिलाफ़ भी चेतावनी दी है।  

सेन्ट-एन-दी-ब्यूप्रे महागिरजाघर

 

सेन्ट-एन-दी-ब्यूप्रे के महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग समारोह से पूर्व दो देशज महिलाओं ने झण्डे फहरा कर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने काथलिक कलीसिया के परमाध्यक्ष से मांग की कि वे औपचारिक रूप से 15वीं शताब्दी के उन शिलालेखों को रद्द करें, जिन्हें खोज के सिद्धांत के रूप में जाना जाता है और जिनमें पूर्व सन्त पापाओं ने नई दुनिया में देशज भूमि के अधिकरण को उचित ठहराया था।

गुरुवार को ख्रीस्तयाग समारोह के बाद सन्त पापा ने सेन्ट-एन-दी-ब्यूप्रे महागिरजाघर को एक कलश एवं सोने की एक रोज़री माला भेंट स्वरूप अर्पित की। यह महागिरजाघर उत्तरी अमेरिका का सर्वाधिक प्राचीन काथलिक तीर्थ स्थल है और उस स्थान पर स्थित है जहां 1658 ई. में सन्त अन्ना की एक प्रतिमा के प्रतिस्थापन हेतु एक छोटा सा आराधनालय बनवाया गया था, जिसे फ्रांस के उपनिवेशवादी चमत्कारी मानते थे।

सेन्ट-एन-दी-ब्यूप्रे महागिरजाघर की क्षमता लगभग डेढ़ हज़ार श्रद्धालुओं की है जिनमें से तीन-चौथाई जगहों को आवासीय स्कूलों के उत्तरजीवियों के लिये सुरक्षित रखा गया था। शेष लोगों के लिये महागिरजाघर के बाहर विशाल टेलेविज़न पर्दों का इन्तज़ाम कर दिया गया था।  

वाटिकन ने सूचित किया कि गुरुवार को सेन्ट-एन-दी-ब्यूप्रे महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग समारोह के बाद सन्त पापा फ्राँसिस ने काथलिक मिशनरियों द्वारा संचालित वयोवद्धों तथा एचआईवी एवं एड्स से ग्रस्त रोगियों के आश्रम की भेंट की तथा यहाँ निवास करनेवाले आश्रमवासियों को अपना आशीर्वाद दिया।

 

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29 July 2022, 11:17