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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

देवदूत प्रार्थना में पोप : भले समारी की तरह देखें और सहानुभूति रखें

रविवार को देवदूत प्रार्थना के दौरान संत पापा फ्राँसिस ने विश्वासियों का आह्वान किया कि वे भले समारी के उदाहरण का अनुकरण करें और येसु द्वारा बतलाये गये "मार्ग के शिष्य" बनें।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार, 10 जुलाई 2022 (रेई)- वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 10 जुलाई को संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एंव बहनो, सुप्रभात।

आज की धर्मविधि का सुसमाचार पाठ भले समारितानी का दृष्टांत सुनाता है। (लूक. 10,25-37) पृष्टभूमि पर एक मार्ग है जो येरूसालेम से जेरीखो जाता है जहाँ एक व्यक्ति पड़ा है जो डाकूओं के द्वारा बूरी तरह पीटा और लूटा गया है। एक पुरोहित वहाँ से गुजरता है, उसे देखता किन्तु नहीं रूकता और आगे बढ़ जाता है। एक लेवी जो मंदिर में सेवा देता, वह भी ऐसा ही करता है। किन्तु सुसमाचार बतलाता है कि समारितानी जो यात्रा कर रहा था, घायल व्यक्ति के पास जाता और उसे देखकर दया से भर जाता है। (33) सुसमाचार लेखक बतलाता है कि वह यात्रा पर था। फिर भी अपनी योजना और दूर यात्रा के बावजूद वह बहाना बनाकर आगे नहीं बढ़ जाता बल्कि सड़क में जो हुआ उसमें शामिल होता है। संत पापा ने कहा, "आइये हम इसके बारे सोचें : क्या प्रभु हमें ऐसा नहीं करने की शिक्षा देते हैं? दूर से देखने, अपने अंतिम लक्ष्य की ओर देखने, यहाँ और अभी पहुँचने के लिए उठाए जानेवाले कदमों पर पूरा ध्यान देते हुए।

मार्ग के शिष्य

उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण हैं कि प्रथम ख्रीस्तीय "मार्ग के शिष्य" कहलाते थे। (प्रे.च.9,2) वास्तव में, विश्वासी बिलकुल समारितानी के समान हैं – उनकी तरह, वे यात्रा पर हैं उनकी तरह वे राहगीर हैं। विश्वासी जानते हैं कि वे ऐसे व्यक्ति हैं जो नहीं पहुँचते बल्कि एक दूसरे को जानना चाहते हैं, प्रभु येसु का अनुसरण करते हुए। जिन्होंने कहा, "मैं मार्ग सत्य और जीवन हूँ।" (यो.14,6) जो व्यक्ति प्रभु के पीछे चलता है वह गतिहीन नहीं होता बल्कि हमेशा रास्ते पर है। रास्ते पर वह लोगों से मुलाकात करता, रोगियों को चंगा करता, गाँवों एवं शहरों का दौरा करता है।

"मार्ग का शिष्य" गौर करता हैं कि उनके सोचने और काम करने का तरीका धीर-धीरे बदलता है, वह उसके स्वामी के अधिक अनुरूप होता है। ख्रीस्त के पदचिन्हों पर चलते हुए शिष्य एक राहगीर बन जाता है और समारितानी की तरह देखना और सहानुभूति रखना सीखता है।

देखना और सहानुभूति रखना

संत पापा ने कहा कि एक शिष्य की आँखें सच्चाई के लिए खुली होती हैं, वह स्वार्थी रूप में अपने ही विचारों के घेरे में बंद नहीं होता। जबकि याजक और लेवी घायल व्यक्ति को देखते लेकिन वहाँ से गुजर जाते हैं मानो कि वे उसे देखे ही नहीं। सुसमाचार हमें देखना सिखाता है – यह वास्तविकता को सही रूप में समझना, हर दिन पूर्वधारणाओं और हठधर्मिता पर काबू पाना सिखाता है। येसु का अनुसरण करना हमें दयालु होना सिखाता – दूसरों के प्रति जागरूक रहना, खासकर, जो पीड़ित हैं, जो जरूरतमंद हैं और समारीतानी के समान सामने आना।

इस सुसमाचार के दृष्टांत के सामने, हो सकता है कि हम दूसरों को दोष दें या अपने आपको कारण मानें, दूसरों की ओर उंगली दिखायें, पुरोहितों एवं लेवियों की तुलना करें या खुद को दोष दें, पड़ोसियों पर ध्यान देने में अपनी कमजोरियों की तुलना करें। किन्तु मैं दूसरे तरह का सुझाव देना चाहता हूँ। हमें महसूस करना चाहिए कि हम कब उदासीन होते और अपने आपकी सफाई देने का प्रयास करते हैं। पर हम वहाँ न रूक जायें। आइये हम प्रभु से प्रार्थना करें कि हम अपने स्वार्थी उदासीनता से ऊपर उठ सकें और हम अपने आपको "रास्ते" पर रख सकें, खासकर उन लोगों के साथ जो पीड़ित हैं और हमें जिनके नजदीक होने की जरूरत है और जितनी संभव हो उतनी उनकी मदद करें। संत पापा ने कहा, "हम उनसे, देखने एवं सहानुभूति रखने के लिए प्रार्थना करें।" यह एक कृपा है जिसको हमें प्रभु से मांगना है : "प्रभु कि मैं देख सकूँ, कि मैं सहानुभूति रख सकूँ। जैसा कि तू मुझे देखता और मुझपर सहानुभूति रखता है।"

स्वार्थी उदासीनता से ऊपर उठना

संत पापा ने एक घटना की याद करते हुए कहा, "कई बार मैं किसी ख्रीस्तीय को पाता हूँ जो आध्यात्मिकता चीजों की बातें करने आते हैं, उनसे मैं पूछता हूँ "क्या तुम भिक्षा देते हो?" वे बोलते हैं, "जी हैँ।" तब मैं पूछता हूँ क्या तुम उसके हाथ को छूते हो जब तुम दान देते? वे कहते हैं, "नहीं, मैं फेंककर देता हूँ।" और क्या तुम उसकी नजर में नजर डालते हो? "नहीं, यह मेरे मन में नहीं आता।" तब मैं कहता हूँ कि यदि तुम सच्चाई को बिना स्पर्श किये और व्यक्ति को देखे बिना भिक्षा देते हो, वह भिक्षा तुम्हारे लिए है भिखारी के लिए नहीं। संत पापा ने कहा, "इस पर चिंतन करें", क्या मैं दयनीय स्थिति का स्पर्श करता हूँ? उस दायनीय स्थिति में जिसमें मैं मदद करता। क्या मैं उस व्यक्ति की नजर में नजर डालता जिसकी मैं मदद करता हूँ?  

तब संत पापा ने धन्य कुँवारी मरियम से प्रार्थना की कि वे हमें विकास के इस रास्ते पर साथ दें। वे जो हमें रास्ता दिखलातीं, जो स्वयं येसु हैं, हमें अधिक से अधिक मार्ग के शिष्य होने में मदद दें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना में संत पापा का संदेश

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10 July 2022, 16:23