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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस   (AFP or licensors)

देवदूत प्रार्थना में पोप ˸ धन की पूजा छोड़ दें, जीवन की सच्ची वस्तुओं की खोज करें

रविवार को देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा फ्राँसिस ने रविवार के सुसमाचार पाठ पर चिंतन करते हुए संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में विश्वासियों को लोभ से बचने की चेतावनी दी जो हरेक व्यक्ति के हृदय में होता है, जो हमें ईश्वर के प्रेम एवं उनके अनन्त वरदान की खोज करने की अपेक्षा लालच और धन की सेवा की ओर अग्रसर करता है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार, 31 जुलाई 2022 (रेई) ˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर में रविवार 31 जुलाई को संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

आज की धर्मविधि के सुसमचार पाठ में, एक व्यक्ति येसु से यह आग्रह करता है ˸ "गुरूवर मेरे भाई से कहिए कि वह मेरे लिए पैत्रृक सम्पति का बँटवारा कर दे।" (लूक. 12˸ 13) संत पापा ने कहा कि यह एक सामान्य परिस्थिति है। इसी तरह की समस्याएँ आज भी आम हैं। दुर्भाग्य से, कितने भाई और बहनें, एक ही परिवार के कितने सदस्य अपनी सम्पति के लिए आपस में झगड़ते हैं, शायद एक-दूसरे से बात भी नहीं करते।

लोभ का खतरा

उस व्यक्ति को जवाब देते हुए येसु मामले में प्रवेश नहीं करते बल्कि विभाजन के मूल कारण सम्पति के अधिकार पर जाते हैं। वे कहते हैं, "सावधान रहो और हर प्रकार के लोभ से बचते रहो।"(15) लोभ क्या है? यह संपत्ति पर बेलगाम लालच है, हमेशा अधिक धनी होने की चाह। यह एक बीमारी है जो लोगों को नष्ट करती है क्योंकि सम्पति की भूख एक आसक्ति उत्पन्न करती है। खासकर, जिनके पास बहुत अधिक होती, वे उसे कभी संतुष्ट नहीं होते, वे हमेशा अधिक और सिर्फ अपने लिए पाना चाहते है। किन्तु इस तरह व्यक्ति स्वतंत्र नहीं होता ˸ वह आसक्त होता है, उन चीजों का गुलाम बनता जो विरोधाभासी रूप में उसे मुक्त और शांत होने में मदद करने के लिए होते हैं। धन के द्वारा सेवा किये जाने के बदले वह धन का सेवक बनता है। लोभ समाज के लिए भी एक गंभीर बीमारी है। लोभ के कारण आज हम दूसरे विरोधाभास में पहुँच गये हैं ˸ ऐसा अन्याय इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया, जहाँ थोड़े लोगों के पास बहुत अधिक धन है और बहुत लोगों के पास बहुत कम। हम युद्धों एवं संघर्षों पर गौर करें। संसाधनों एवं सम्पति की तीव्र लालसा हमेशा उनके पीछे रहती है। युद्ध के पीछे कितना बड़ा स्वार्थ है और निश्चय ही उनमें से एक है हथियारों का व्यापार।

अपनी ही लोलुपता का सामना करना

आज येसु हमें सिखलाते हैं कि इन चीजों के केंद्र में हमेशा शक्तिशाली या कुछ निश्चित आर्थिक प्रणाली नहीं होती किन्तु लोभ है जो हरेक व्यक्ति के हृदय में होता है।

अतः आइये हम अपने आप से पूछें ˸ मैं सम्पति से अनासक्त होने में किस स्थान पर हूँ? क्या मैं उन चीजों के लिए शिकायत करती हूँ जो मेरे पास नहीं हैं अथवा क्या मैं उन चीजों से संतुष्ट होना जानता हूँ जो मेरे पास हैं! धन और अवसर के नाम पर, क्या मैं संबंधों और दूसरों के लिए समय का बलिदान करने के प्रलोभन में पड़ता हूँ? और क्या ऐसा भी होता है कि मैं लोभ की वेदी पर वैधता और ईमानदारी की बलि चढ़ा देता हूँ। संत पापा ने कहा, "मैंने वेदी कहा क्योंकि चीज-वस्तुएँ, धन-सम्पति, समृद्धि एक उपासना, एक सच्ची और योग्य मूर्तिपूजा बन सकते हैं। यही कारण है कि येसु कड़े शब्दों में चेतावनी देते हैं। वे कहते हैं कि हम दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकते। हम ध्यान दें कि वे ईश्वर और शैतान नहीं कहते अथवा भला और बुरा भी नहीं कहते बल्कि ईश्वर एवं धन कहते हैं।" (लूक.16,13) वह धन जिसको हमारी सेवा करना चाहिए, उसकी सेवा करना एक मूर्तिपूजा है, वह ईश्वर के विरूद्ध अपराध है।

ईश्वर के समान धनी बनना

इस तरह, हम सोच सकते हैं कि धनी होने की चाह किसी को नहीं रखनी चाहिए? संत पापा ने कहा, "निश्चय ही आप धनी होने की चाह रख सकते हैं, इसकी चाह रखना बुरा नहीं है। धनी होना खुबसूरत है लेकिन ईश्वर के अनुसार धनी होना है। ईश्वर सभी लोगों से अधिक धनी हैं। वे सहानुभूति एवं दयालुता के धनी हैं। उनकी समृद्धि किसी को शक्तिहीन नहीं बनाती, झगड़ा और विभाजन उत्पन्न नहीं करती। यह एक ऐसी समृद्धि है जो देना, बांटना और साझा करना जानती है।"

अच्छे संबंधों में धनी

संत पापा ने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, "प्यारे भाइयो एवं बहनो, अच्छी तरह जीने के लिए भौतिक सम्पति जमा करना काफी नहीं है क्योंकि येसु कहते हैं, किसी के पास कितनी सम्पति क्यों न हो, उस सम्पति से उसके जीवन की रक्षा नहीं होती।"   (लूक. 12:15) इसके विपरीत यह अच्छे संबंध – ईश्वर के साथ और पड़ोसी के साथ एवं उन लोगों के साथ भी जिनके पास कम (सम्पति) है। अतः आइये हम अपने आपसे पूछें : मैं किस तरह धनी बनना चाहता हूँ? ईश्वर के अनुसार अथवा मेरे लोभ के अनुसार। मैं किस तरह की विरासत छोड़ना चाहता हूँ? बैंक में रखे रूपये, भौतिक सम्पति या मेरे आसपास खुशहाल लोगों, भले कार्य जिनको नहीं भूलाया जा सकता, ऐसे लोग जिनकी मदद मैंने उनके बढ़ने और परिपक्व होने के लिए की है? 

तब संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना की कि माता मरियम हमें यह समझने में मदद दें कि जीवन की सच्ची अच्छाई क्या है जो हमेशा टिकी रहती है।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

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31 July 2022, 15:20