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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (VATICAN MEDIA)

देवदूत प्रार्थना : यूखरिस्त में येसु हमें अपना जीवन प्रदान करते

संत पापा फ्राँसिस ने ख्रीस्त के पावन शरीर के महापर्व के अवसर पर चिंतन किया कि यूखरिस्त में हम प्रत्येक जन किस तरह प्रभु के प्रेम एवं ठोस ध्यान को महसूस करते हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार, 19 जून 2022 (रेई): वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 19 जून को, प्रभु येसु ख्रीस्त के पावन शरीर एवं रक्त के महापर्व के अवसर पर संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

आज इटली एवं दूसरे देशों में ख्रीस्त के पावन शरीर एवं रक्त का महापर्व मनाया जाता है। अंतिम व्यारी में स्थापित यूखरिस्त येसु के साथ की गई एक यात्रा के अंतिम लक्ष्य के समान था जिसका झलक पहले ही उन्होंने कई चिन्हों के द्वारा दिखलाया था, सबसे बढ़कर, रोटी का चमत्कार जिसका वर्णन आज की धर्मविधि के सुसमाचार पाठ में किया गया है। (लूक. 9:11b-17) येसु एक बड़ी भीड़ की चिंता करते हैं जिसने उनके वचनों को सुनने और विभिन्न प्रकार की बुराई से मुक्त होने के लिए उनके पीछे हो लिया था। उन्होंने पाँच रोटी और दो मछलियों को आशीष दी, उसे तोड़ा, शिष्यों ने उन्हें बांटा और सभी ने खाया एवं तृप्त हो गये। (लूक 9,17)

प्रभु की प्रेमी चिंता को सभी महसूस कर सकते हैं

संत पापा ने कहा कि यूखरिस्त में सभी लोग प्रभु की प्रेमी एवं स्पष्ट चिंता को महसूस करते हैं। जो लोग विश्वास के साथ ख्रीस्त के शरीर एवं रक्त को ग्रहण करते हैं, वे न केवल खाते बल्कि तृप्त भी होते हैं। खाना और तृप्त होना : ये दो मौलिक आवश्यकताएँ हैं जो यूखरिस्त में पूरी होती हैं।   

 संत लूकस लिखते हैं, "सभी ने खाया।" अब दिन ढलने लगा था। बारहों ने उनके पास आकर कहा, लोगों को विदा कर दीजिए, जिससे वे आसपास के गाँवों और बस्तियों में जाकर रहने और खाने का प्रबंध कर सकें। किन्तु गुरूवर उन्हें प्रदान करना चाहते हैं। जिन्होंने उन्हें सुना वे उन्हें खिलाना चाहते हैं। रोटियों और मछलियों का चमत्कार शानदार रूप में नहीं हुआ बल्कि करीब चुपचाप हुआ जैसा कि काना के विवाह -भोज में हुआ था। जब रोटी को एक हाथ से दूसरे हाथ में बांटा गया, तो यह बढ़ता गया। और जब भीड़ इसे खायी तब उसने महसूस की कि येसु हरेक चीज की चिंता कर रहे हैं। यही यूखरिस्त में प्रभु की उपस्थिति है। वे हमें स्वर्ग के नागरिक होने के लिए बुलाते हैं किन्तु साथ ही वे यह नहीं भूलते कि हमें इस धरती पर यात्रा करना है। यदि मेरे पास एक भी रोटी नहीं है तो वे उसे जानते और मेरी देखभाल करते हैं।

येसु सबका ख्याल रखते हैं

संत पापा ने कहा, "कभी-कभी यूखरिस्त को एक अस्पष्ट आयाम के रूप में लेने का खतरा होता है शायद उज्वल एवं खुशबूदार सुगंध के रूप में किन्तु अपने दैनिक जीवन से दूर।" वास्तव में, प्रभु हमारी सभी आवश्यकताओं को अपने हृदय में लेते हैं। और वे अपने शिष्यों को एक उदाहरण देना चाहते हैं, "तुम ही उन्हें खाने के लिए कुछ दो।" (13) जब हम यूखरिस्तीय आराधना पर आवलोकन करते हैं, जब हम येसु के समाने अपने पड़ोसियों की चिंता करते हैं। हमारे आसपास लोग भोजन के लिए भूखे हैं किन्तु कई लोग साथ, सांत्वना, मित्रता, अच्छे मजाक और ध्यान दिए जाने की आवश्यकता को भी महसूस करते हैं। हम इसे यूखरिस्तीय रोटी में पाते हैं – हमारी आवश्यकताओं के लिए ख्रीस्त की चिंता और वे हमें निमंत्रण देते हैं कि हम अपने अगल-बगल के लोगों के लिए भी वैसा ही चिंता करें।  

यूखरिस्त दैनिक जीवन से दूर नहीं

खाने के साथ-साथ हम तृप्त होने को नहीं भूल सकते। खाना की प्रचुरता तथा येसु द्वारा स्वीकार किये जाने के कारण भीड़ तृप्त हो चुकी थी और विस्मित थी। हमें पोषित होना है किन्तु तृप्त भी किया जाना है और जानना है कि यह पोषण प्रेम के कारण दिया गया है। ख्रीस्त के शरीर और रक्त में हम उनकी उपस्थिति पाते हैं। उनका जीवन हम प्रत्येक के लिए दिया गया है। वे न केवल हमें आगे बढ़ने में मदद देते बल्कि अपने आपको प्रदान करते हैं। वे अपने आपको हमारे लिए सहयात्री बनाते हैं। हमारे जीवन में प्रवेश करते, जब हम अकेले हैं तो हमसे मुलाकात करते हैं और एक उत्साह की भावना प्रदान करते हैं। यह हमें संतुष्ट करता, हमें उस "अधिक" को प्रदान करता है जिसकी खोज सभी कर रहे हैं – प्रभु की उपस्थिति! क्योंकि उनकी उपस्थिति की ऊष्मा में हमारा जीवन बदलता है। उनके बिना सब कुछ धुमैला होता।

यूखरिस्त में हम प्रत्येक के लिए उनका जीवन प्रदान किया जाता है

ख्रीस्त के पावन शरीर और रक्त की आराधना करते हुए हम दिल से उनसे याचना करें, "प्रभु मुझे प्रतिदिन का आहार-प्रदान कर ताकि मैं आगे बढ़ सकूँ और मुझे अपनी उपस्थति से तृप्त कर दे।"

तब संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना की कि "कुँवारी मरियम हमें, यूखरिस्त में जीवित येसु की आराधना करना और उन्हें अपने भाई बहनों के साथ बांटना सिखा।"  

देवदूत प्रार्थना में संत पापा का संदेश

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19 June 2022, 15:12