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यूक्रेन में अपना घर छोड़ते हुए लोग जिनका घर युद्ध में ध्वस्त हो चुका है यूक्रेन में अपना घर छोड़ते हुए लोग जिनका घर युद्ध में ध्वस्त हो चुका है  (ANSA)

सरकारी नेताओं से पोप : मानवता को विनाश की ओर न ले जाएँ

संत पापा ने राष्ट्रों के नेताओं से अपील की है कि वे यूक्रेन में युद्ध का कूटनीतिक समाधान ढूँढ़ें, जहाँ 100 से अधिक दिनों तक रूसी सैनिकों द्वारा हिंसक आक्रमण हो रहे हैं। उन्होंने भली इच्छा रखनेवालों से शांति के लिए अथक रूप से प्रार्थना एवं कार्य करने का आह्वान किया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

स्वर्ग की रानी प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने कहा, "प्यारे भाइयो एवं बहनो, पेंतेकोस्त में मानवता के लिए ईश्वर का सपना साकार होता है।" पास्का के 50 दिनों बाद, भिन्न भिन्न भाषा बोलनेवाले एक साथ आते एवं एक-दूसरे को समझते हैं। लेकिन यूक्रेन पर हिंसक आक्रमण शुरू होने के एक सौ दिन बाद भी युद्ध का दुःस्वप्न मनुष्यों पर बना हुआ है जो ईश्वर के सपने का तिरस्कार है। लोगों के बीच टकराव हो रहे हैं, लोग एक दूसरे को मार रहे हैं, एक-दूसरे के निकट आने के बदले लोग अपने ही घर से बाहर निकाले जा रहे हैं। जब विनाश और मौत का क्रोध बढ़ रहा है यह युद्ध को भड़का रहा है जो सभी लोगों के लिए खतरनाक है। मैं देश के नेताओं से अपनी अपील दुहराता हूँ : कृपया मानवता को नष्ट न करें! मानवता को विनाश की ओर न ले जाएँ, सही समझौते किये जाएँ, युद्धविराम एवं स्थायी समाधान के लिए ठोस समझौते किये जाएँ। पीड़ित लोगों के रूदन को सुनें, हम इसे संचार माध्यमों द्वारा हर दिन देख रहे हैं। कृपया मानव जीवन का सम्मान करें और पूर्वी यूक्रेन में शहरों एवं गाँवों के भयांकर विनाश को रोकें। कृपया बिना थके शांति के लिए प्रार्थना और कार्य करें।"

लेओनार्दो मेलकी और थोमासो जोर्जो सालेह की धन्य घोषणा

तत्पश्चात् संत पापा ने धन्य घोषणा की याद की। उन्होंने कहा, "कल बेरूत में, दो कपुचिन पुरोहितों लेओनार्दो मेलकी और थोमासो जोर्जो सालेह की धन्य घोषणा हुई जो पुरोहित थे और शहीद हुए, 1915 और 1917 के बीच विश्वास के प्रति घृणा के कारण तुर्की में मार डाले गये। लेबनान के इन दो मिशनरियों ने उपद्रव की पृष्टभूमि पर ईश्वर के प्रति दृढ़ विश्वास का साक्ष्य दिया। उनका उदाहरण हमारे ख्रीस्तीय साक्ष्य को बल प्रदान करे। वे जवान थे, और उनका 35 साल भी नहीं हुआ था। तब संत पापा ने ताली बजाकर उन्हें सम्मानित किया।   

उसके बाद संत पापा ने रोम तथा विश्व के विभिन्न हिस्सों से आये तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया। उन्होंने मछुआरों के प्रति अपना सामीप्य व्यक्त किया जो ईंधन की कीमत बढ़ जाने पर अपनी गतिविधियों को रोक दिया है। यूक्रेन में युद्ध का बुरा असर   सभी श्रेणियों के श्रमिकों पर प्रभाव पड़ रहा है।

अंत में संत पापा ने अपने लिए प्रार्थना का आग्रह करते हुए सभी को शुभ रविवार की मंगलकामनाएँ अर्पित की।

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05 June 2022, 16:36