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कोम्बोनी मिशनरियों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस कोम्बोनी मिशनरियों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

कोम्बोनी मिशनरियों से पोप ˸ येसु के बिना, हम कुछ नहीं कर सकते

संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 18 जून को येसु के पवित्र हृदय की कोम्बोनी मिशनरियों की 19वीं महासभा में भाग लेनेवाले प्रतिभागियों से मुलाकात की तथा उनके से कहा कि येसु से संयुक्त मिशनरी ईश्वर के प्रेम के माध्यम होते हैं और उन्होंने जोर दिया कि हम तभी फल ला सकते हैं जब हम येसु और पवित्र आत्मा से संचालित हों।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 18 जून 2022 (रेई) ˸  शनिवार को संत पापा ने येसु के पवित्र हृदय की कोम्बोनी मिशनरियों की 19वीं महासभा में भाग लेनेवाले 70 प्रतिभागियों से मुलाकात की। महासभा की विषयवस्तु है, "मैं दाखलता हूँ, तुम डालियाँ हो। कोम्बोनी के साथ ख्रीस्त में निहित।"

मेरे बिना तुम कुछ नहीं कर सकते

संत पापा ने कहा, "वास्तव में मिशन – इसका स्रोत, इसकी गतिशीलता और इसका फल – पूरी तरह ख्रीस्त के साथ संयुक्ति एवं पवित्र आत्मा की शक्ति पर निर्भर करता है।" येसु ने अपने शिष्यों से स्पष्ट रूप से कहा था, "मेरे बिना तुम कुछ भी नहीं कर सकते।" (यो.15,5) उन्होंने नहीं कहा कि तुम थोड़ा कुछ कर सकते हो बल्कि सीधे कहा कि तुम कुछ नहीं कर सकते। इसका अर्थ क्या है? संत पपा ने कहा कि हम अपने से बहुत कुछ कर सकते हैं जैसे – नया कदम उठाना, कार्यक्रमों का आयोजन करना, आंदोलन चलाना...आदि किन्तु यदि हम उनके साथ नहीं हैं और यदि उनकी आत्मा हमारे साथ नहीं है तब हम जो कुछ भी करते हैं वह उनकी नजरों में कुछ नहीं के बराबर है। अर्थात् ईश्वर के राज्य के लिए इसका कोई मूल्य नहीं है।

इसके विपरीत यदि हम उन डालियों के समान हैं जो दाखलता से जुड़ी रहती हैं तब ख्रीस्त का आत्मा हममें निवास करता है और हम जो कुछ भी करते हैं वह फल लाता है क्योंकि यह हमारा कार्य नहीं होता बल्कि यह ख्रीस्त का प्रेम है जो हमारे द्वारा कार्य करते हैं। यही ख्रीस्तीय जीवन का रहस्य है, और खासकर, मिशनरियों का।

मिशनरी एक शिष्य है जो अपने प्रभु और स्वामी से इस तरह जुड़ा रहता है कि उसके हाथ, मन और दिल से ख्रीस्त का प्रेम प्रवाहित हो। वे जो फल चाहते हैं वह प्रेम का फल है। उनके लिए अपना प्रेम जो पिता से आता है और पवित्र आत्मा के साथ प्राप्त होता है।

पवित्र हृदय से प्रेरित महान मिशनरी

संत पापा ने येसु के पवित्र हृदय की कोम्बोनी मिशनरियों के संस्थापक संत डानिएल कोम्बोनी एवं मदर कब्रिनी जैसे महान मिशनरियों का आदर्श प्रस्तुत करते हुए कहा कि उन्होंने अपने मिशन को ख्रीस्त के हृदय से प्रेरित होकर जीया। इस प्रेरणा ने उन्हें आगे बढ़ते हुए भौगोलिक सीमा से परे जाने की शक्ति प्रदान की।

संत पापा ने कहा कि पवित्र आत्मा की प्यास हमें अपने आप से बाहर निकलने एवं दूसरों की ओर बढ़ने में मदद देती है।   

येसु के पवित्र हृदय पर प्रकाश डालते हुए संत पापा ने कहा कि उनके हृदय की विशेषता है कि यह करूणावान है, सहानुभूतिपूर्ण एवं कोमल है। उन्होंने कहा कि धर्मसमाज के सदस्य अपने मिशन में ईश्वर के इन्हीं गुणों का साक्ष्य देने के लिए बुलाये गये हैं।

"करुणा, कोमलता विश्वव्यापी भाषा है जिसके लिए कोई सीमा नहीं होती।" संत पापा ने उन्हें सलाह दी कि वे इस संदेश को व्यक्तिगत मिशनरी के रूप में नहीं बल्कि एक समुदाय के रूप में लें। येसु ने अपने शिष्यों से कहा कि तुम किस तरह एक-दूसरे से प्रेम करते हो, उससे पहचाने जाओगे कि तुम मेरे शिष्य हो।(यो.13,35) प्रेरित-चरित इस समुदाय का साक्ष्य देता है।  

हर चीज पवित्र आत्मा से प्रेरित हो

संत पापा ने गौर किया कि महासभा में चार आयामों पर कार्य करने का निर्णय लिया गया है ˸ जीवन के नियम, प्रशिक्षण की यात्रा, प्रेरिताई और वस्तुओं की साझेदारी। संत पापा ने कहा कि ये चारों आयाम एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इन सभी को पवित्र आत्मा के प्रति विनम्रता में किया जाना चाहिए ताकि आवश्यक योजनाएँ, परियोजनाएँ, पहल, सुसमचार प्रचार की आवश्यकता का प्रत्युत्तर और सुसमचार प्रचार; प्रसन्नचित, विनम्र, साहस, धैर्यपूर्ण, करुणामय, न्याय के लिए भूख और प्यास द्वारा, शांतिमय तरीका से किया जा सके अर्थात् धन्यताओं के रास्ते पर चलकर।  

संत पापा ने कहा कि जीवन के नियम, प्रशिक्षण, प्रेरिताई और वस्तुओं का प्रबंधन, "सुसमाचारी समुदाय के अनुभव" पर आधारित होना चाहिए जिसकी स्थापना प्रभु ने प्रेम से की थी। सुसमाचारी समुदाय साथ देने की तैयारी करता है। वह मानवता को उसकी हर प्रक्रिया में साथ देता है चाहे वह कितनी ही कठिन और लम्बी क्यों न हो। वह प्रेरितिक धीरज एवं प्रतीक्षा करना जानता है। सुसमाचार प्रचार में बहुत अधिक धैर्य रखना पड़ता है। वह जंगली घास के कारण गेहूँ को परेशान नहीं करता। शिष्य जानते है कि अपना जीवन किस तरह पूर्ण रूप से समर्पित करना और शहीद होकर येसु ख्रीस्त का साक्ष्य देना है। एक प्रसन्नचित सुसमचारी समुदाय हर छोटी जीत, सुसमचार प्रचार में हर कदम आगे बढ़ाने के लिए खुशी मनाना जानता है।    

अंत में संत पापा ने उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया एवं महासभा की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।  

 

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18 June 2022, 14:21