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अन्तरराष्ट्रीय काथलिक एवं पूर्वी रीति की ऑरथोडोक्स कलीसियाओं  के संयुक्त आयोग के साथ, 23.06.2022 अन्तरराष्ट्रीय काथलिक एवं पूर्वी रीति की ऑरथोडोक्स कलीसियाओं के संयुक्त आयोग के साथ, 23.06.2022  (Vatican Media)

पूर्वी रीति की कलीसियाओं के संग जीवन के सम्वाद का आह्वान

सन्त पापा फ्राँसिस ने पूर्वी रीति की ऑरथोडोक्स कलीसियाओं के संग जीवन के सम्वाद का आह्वान किया है। काथलिक कलीसिया और पूर्वी रीति की ऑरथोडोक्स कलीसियाओं बीच धर्मतत्त्व विज्ञान सम्बन्धी संवाद हेतु गठित संयुक्त अंतर्राष्ट्रीय आयोग के सदस्यों ने गुरुवार को वाटिकन में सन्त पापा फ्राँसिस का साक्षात्कार कर उनका सन्देश सुना।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर- वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 24 जून 2022 (रेई, वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने पूर्वी रीति की ऑरथोडोक्स कलीसियाओं के संग जीवन के सम्वाद का आह्वान किया है। काथलिक कलीसिया और पूर्वी रीति की ऑरथोडोक्स कलीसियाओं बीच धर्मतत्त्व विज्ञान सम्बन्धी संवाद हेतु गठित संयुक्त अंतर्राष्ट्रीय आयोग के सदस्यों ने गुरुवार को वाटिकन में सन्त पापा फ्राँसिस का साक्षात्कार कर उनका सन्देश सुना।

अपने संबोधन में, सन्त पापा ने आयोग को उसके बहुमूल्य कार्य के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया जिससे पूर्ण सहभागिता हेतु वार्ता प्रक्रिया में पर्याप्त प्रगति हो सकी है। उन्होंने, विशेष रूप से, संस्कारों पर चर्चा में हुई नवीनतम उपलब्धियों के लिये बधाई दी, और कहा कि यह पूर्ण एकता के लक्ष्य को प्राप्त करने में "एक नया कदम आगे बढ़ा सकता है"।

एकतावर्द्धकता बपतिस्मा है

तीन प्रमुख बिन्दुओं पर अपना चिन्तन केन्द्रित रख सन्त पापा ने कहा कि ख्रीस्त के अनुयायियों के बीच पूर्ण एकता का आधार है बपतिस्मा और इसी आधार पर हम ख्रीस्तानुयायियों के बीच पूर्ण एकता को दर्शनीय होता देखना चाहते हैं। 

द्वितीय, सन्त पापा ने कहा कि आयोग द्वारा न केवल बपतिस्मा संस्कार पर, अपितु अन्य संस्कारों पर भी बनी व्यापक सहमति से काथलिक एवं पूर्वी रीति की ऑरथोडोक्स कलीसियाओं को एकता एवं सार्वभौमिकता के लिये प्रेरणा मिली है।

इस बात की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए कि विगत दशकों में ऐसे अनेक प्रेरितिक समझौतों पर सहमति बनी है जिनसे पूर्ण एकता की प्राप्ति से पहले ही श्रद्धालुओं का संस्कारीय धर्मविधियों में भाग लेना सम्भव बना है, सन्त पापा ने आशा व्यक्त की कि पवित्रआत्मा की प्रेरणा से, ईश प्रजा की भलाई के लिये, दोनों ओर से एकता के प्रयास मज़बूत होंगे।

जीवन की एकतावर्द्धकता

तृतीय सन्त पापा फ्राँसिस ने इस बिन्दु पर प्रकाश डाला कि प्राथमिक रूप से, स्थानीय वास्तविकता के रूप में, ख्रीस्त के अनुयायियों के बीच एकता पहले से मौजूद है, जिसे न केवल मध्य पूर्व के देशों में बल्कि पश्चिमी देशों में ख्रीस्तीय आप्रवासियों में देखा जा सकता है।

उन्होंने कहा, "मैं कई ख्रीस्तीय विश्वासी – विशेष रूप से मध्य पूर्व और पश्चिमी देशों में, आप्रवास कर चुके ख्रीस्तीयों पर विचार कर रहा हूँ जो पहले से ही अपने परिवारों, अपने कार्य स्थलों और अपनी दैनिक मुलाकातों में जीवन की एकतावर्द्धकता का अनुभव कर रहे हैं। प्रायः वे मसीह के नाम पर गवाही देने में अपने जीवन को जोखिम में डालकर एक साथ मिलकर दुख कष्टों का अनुभव करते हैं।"

सन्त पापा ने कहा की इसीलिये यह अति आवश्यक है कि धर्मतत्व विज्ञान सम्बन्धी एकतावर्द्धक वार्ताओं में केवल धर्मतत्व के सिद्धान्तों में व्याप्त अन्तर पर ही विचार न किया जाये बल्कि ख्रीस्तीय विश्वासियों के वर्तमानकालीन दैनिक अनुभवों पर भी विचार किया जाये ताकि जीवन पर सम्वाद सर्वोपरि रहे।  

 

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24 June 2022, 11:35