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2022.06.18 सीरो-मालाबार युवा नेता सम्मेलन के सदस्यों के साथ संत पापा फ्राँसिस 2022.06.18 सीरो-मालाबार युवा नेता सम्मेलन के सदस्यों के साथ संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

सिरो-मालाबार के युवाओं से संत पापा : येसु के प्रेम के मार्ग पर चलें

रोम की तीर्थयात्रा के दौरान "सिरो-मालाबार युवा नेता सम्मेलन" के सदस्यों से संत पापा फ्राँसिस मुलाकात की और उन्हें येसु का अनुसरण करने और माता मरियम के उदाहरण से प्रेरित होने के लिए प्रोत्साहित किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 18 जून 2022 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार, 18 जून 2022 वाटिकन के संत क्लेमेंटीन सभागार में सिरो-मालाबार युवा नेता सम्मेलन के करीब 75 प्रतिभागियों का अभिवादन किया। संत पापा ने कार्डिनल अलेंचेर्री को उनके परिचय भाषण के लिए धन्यवाद दिया। जो यूरोप में प्रवासी भारतीयों के विभिन्न सिरो-मालाबार धर्मप्रांतों में प्रेरितिक यात्रा के दैरान युवा नेताओं और पुरोहितों के साथ रोम आए हैं।

सिरो-मालाबार काथलिक कलीसिया

संत पापा के साथ पूर्ण सहभागिता में, सिरो-मालाबार काथलिक कलीसिया भारत में दो पूर्वी काथलिक स्वायत्त कलीसियाओं में से एक है, दूसरा सिरो-मलंकरा काथलिक कलीसिया है।

संत पापा ने कहा कि वे सिरो-मालाबार के प्रवासी के युवा हैं। प्रेरित संत थॉमस सुसमाचार का बीज बोने के लिए भारत के पश्चिमी तट पर आए और वहां पहला ख्रीस्तीय समुदाय शुरु किया। परंपरा के अनुसार, इस वर्ष थॉमस की शहादत की 1,950 वीं वर्षगांठ है। संत थोमस ने येसु मसीह के साथ अपनी दोस्ती को यह कहते हुए सील कर दिया, "मेरे ईश्वर और मेरे प्रभु!" (योहन 20:29)। कलीसिया प्रेरितों की गवाही पर स्थापित है और यह धर्मांतरण से नहीं, बल्कि साक्षी से बढ़ती जा रही है। प्रत्येक बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति अपनी गवाही द्वारा कलीसिया के निर्माण में हिस्सा लेता है। संत पापा ने कहा, “आपको भी गवाही देने के लिए बुलाया गया है, मुख्य रूप से सिरो-मालाबार प्रवास में आपके साथियों के बीच, बल्कि उन लोगों में भी जो आपके समुदायों से नहीं हैं और यहां तक कि जो प्रभु येसु को नहीं जानते हैं।”

सेवा और जिम्मेदारी के जीवन के लिए 'हां' कहें

संत पापा ने कहा, “प्रत्येक तीर्थयात्रा का पहला लक्ष्य प्रभु येसु हैं, जो स्वयं मार्ग, सत्य और जीवन हैं। हमारी इच्छा है कि हम उसका अनुसरण करें और उसके प्रेम के पथ पर चलें, एकमात्र मार्ग जो अनन्त जीवन की ओर ले जाता है। यह मार्ग आसान नहीं है लेकिन यह रोमांचक है क्योंकि प्रभु हमें कभी नहीं छोड़ते, वह हमेशा हमारे साथ रहते है। यदि हम अपने जीवन में उसके लिए जगह बनाते हैं और उसके साथ अपने सुख-दुख बांटते हैं, तो हम उस शांति का अनुभव करेंगे जो केवल ईश्वर ही दे सकते हैं।”  जब भी हम यीशु को 'हाँ' कहते हैं, तो हमारे जीवन को सार और अर्थ मिलता है।"

संत पापा ने कहा कि एक सामान्य आधार पर सभी युवा मिल सकते हैं और वह है एक प्रामाणिक, सुंदर और गहन प्रेम की इच्छा। यह वह प्रेम है जिसे येसु ने हमें प्रकट किया है और जिसे संत पौलुस ने "सहनशील और दयालु" के रूप में वर्णित किया है, जो अपना स्वार्थ नहीं खोजता, बल्कि सच्चाई में आनन्दित होता है (सीएफ 1 कुरि 13:4-6)। संत पापा ने उन्हें हर युग के संतों द्वारा दिये गये, प्रेम के साक्षी को खोजने के लिए प्रोत्साहित किया। संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तीय धर्म निषेधों की एक श्रृंखला में नहीं है जो खुशी की इच्छा को रोकता है, बल्कि एक जीवन परियोजना में है जो प्रत्येक मानव हृदय में पूर्णता लाने में सक्षम है। सुंदरता या वास्तविक साझाकरण के बिना, निष्ठा और जिम्मेदारी के बिना प्यार की बढ़ती प्रवृत्ति के खिलाफ विद्रोह करने से न डरें। जब भी हम अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को वस्तुओं के रूप में उपयोग करते हैं, तो दिल टूट जाते हैं और केवल उदासी और खालीपन रह जाता है।

सीरो-मालाबार युवा नेता सम्मेलन के सदस्यों के साथ संत पापा फ्राँसिस
सीरो-मालाबार युवा नेता सम्मेलन के सदस्यों के साथ संत पापा फ्राँसिस

आरामदार "सोफे" से दूर रहें

लिस्बन में अगले विश्व युवा दिवस का विषय होगा: "मरिया उठी और शीघ्रता से चल पड़ी।" (लूका 1:39)। संत पापा ने कहा कि स्वर्गदूत द्वारा उद्धारकर्ता की माँ बनने का संदेश पाकर मरिया "हाँ" कहने के बाद, तुरंत अपनी चचेरी बहन एलिजाबेथ से मिलने गई, जो गर्भावस्था के छठे महीने में थी। (सीएफ. लूक 1:36-39) मरियम ने अपने बारे में, इस ‘हाँ’ से होने वाली कई समस्याओं के बारे में नहीं सोचा। मरियम ने अपने आप को अभिमान या भय से पंगु नहीं होने दिया। वह उन लोगों में से नहीं थी जिनके लिए आरामदायक और सुरक्षित रहने के लिए केवल एक अच्छा सोफा होना चाहिए। संत पापा ने कहा कि जिसतरह मरियम ने अपनी बुजुर्ग रिश्तेदार की मदद हेतु तुरंत जाने के लिए तैयार हो जाती है, आप भी मरियम के समान अपने बुजुर्ग दादा-दादियों अपनी जड़ों का पता लगायें उनसे मिलने जायें और उन लोगों के अनुभवों को सुनें। युवा लोगों में ताकत होती है, जबकि बुजुर्गों के पास स्मृति और ज्ञान होता है।

यूखरीस्तीय जीवन जीएं

अंत में, संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि माता मरियम "हमें यूखरीस्तीय जीवन जीना भी सिखाती है," दूसरे शब्दों में धन्यवाद देना, प्रशंसा करना। केवल समस्याओं और कठिनाइयों पर ध्यान केंद्रित नहीं करना।

उन्होंने कहा, "जीवन के क्रम में, आज की उत्कट याचनायें कल के लिए धन्यवाद की प्रार्थना बन जायेगी।"

 

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18 June 2022, 15:23