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एंग्लिकन  कलीसिया के धर्ममाधिपति जस्टिन वेल्बी के साथ,  फाईल तस्वीर एंग्लिकन कलीसिया के धर्ममाधिपति जस्टिन वेल्बी के साथ, फाईल तस्वीर   (ANSA)

एंग्लिकन-काथलिक सम्वाद आयोग से सन्त पापा फ्राँसिस

एंग्लिकन-काथलिक अन्तरराष्ट्रीय सम्वाद आयोग के सदस्यों को सम्बोधित कर शुक्रवार को सन्त पापा फ्राँसिस ने अतीत की बातों को छोड़ने तथा भविष्य पर दृष्टि लगाकर एकसाथ चलने का सन्देश दिया।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 13 मई 2022 (रेई, वाटिकन रेडियो): एंग्लिकन-काथलिक अन्तरराष्ट्रीय  सम्वाद आयोग के सदस्यों को सम्बोधित कर शुक्रवार को सन्त पापा फ्राँसिस ने अतीत की बातों को छोड़ने तथा भविष्य पर दृष्टि लगाकर एकसाथ चलने का सन्देश दिया।

सन्त पापा ने कहा कि उक्त आयोग के संस्थापकों द्वारा 60 वर्षों पूर्व की गई घोषणा ने आयोग की वार्ताओं को मार्गदर्शन दिया है। उन्होंने कहा कि हालांकि यह यात्रा कठिन एवं मन्द रही है तथापि इसने एकता के बीज आरोपित करने का सराहनीय काम किया है। फिलिप्पियों को प्रेषित सन्त पौल के पत्र से लिये शब्दों को उद्धृत कर सन्त पापा ने कहा इन्हीं शब्दों ने इतने अधिक समय से एंग्लिकन-काथलिक वार्ताओं को पोषित किया तथा आगे बढ़ाया है।

"एक साथ मिलकर चलना"

सन्त पौल लिखते हैं- "पीछे की बातों को भुलाकर और आगे की बातों पर दृष्टि लगाकर मैं बड़ी उत्सुकता के साथ अपने लक्ष्य की ओर दौड़ रहा हूँ, ताकि मैं स्वर्ग में वह पुरस्कार प्राप्त कर सकूँ, जिसके लिये येसु मसीह ने हमें बुलाया है।"

सन्त पापा ने कहा सन्त पौल के इन शब्दों ने एंग्लिकन काथलिक अन्तरराष्ट्रीय आयोग के कार्यों को आगे बढ़ाया है और इसी यात्रा पर एक साथ आगे बढ़कर दोनों कलीसियाओं के बीच पूर्ण सहभागिता एवं एकता हालिस की जा सकती है।

सन्त पापा ने कहा कि यात्रा में एक साथ बढ़ने का अर्थ है अतीत और वर्तमान को विभाजित करने वाली चीजों को पीछे छोड़ते हुए, आगे बढ़ना और अपनी दृष्टि येसु पर लगाना जो हमारा लक्ष्य हैं तथा जो चाहते हैं कि हमारे बीच पूर्ण एकता दृश्यमान हो।

सम्वाद और यात्रा का मर्म

सन्त पापा ने कहा, "हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त द्वारा वाँछित एकता को विनम्रता के साथ, यात्रा में एक दूसरे का समर्थन करते हुए, एक दूसरे को सहन करते हुए तथा पवित्र आत्मा की कृपा से प्राप्त किया जाना चाहिए, इसलिये कि एकतावर्द्धक सम्वाद एक यात्रा है। यह केवल एक दूसरे से बातचीत करना नहीं है। इसमें एक दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानना शामिल है, इसमें हमारी आकांक्षाओं और थकान के क्षणों को साझा करना शामिल है, इसमें विश्व के रास्तों में फेंके गये हमारे घायल भाइयों और बहनों की साझा सेवा में अपने हाथों को भिगोना शामिल है। इसमें, हमारे चारों ओर आच्छादित ईश्वर की रचना के लिए एक समान प्रतिबद्धता, और एक दूसरे को यात्रा पर बने रहने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।"

 

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13 May 2022, 12:01