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लेसबोस द्वीप में शरणार्थियों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस लेसबोस द्वीप में शरणार्थियों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

आप्रवासन आयोग से पोप ˸ कलीसिया के उदार कार्यों का चेहरा दिखलायें

संत पापा फ्राँसिस ने अंतर्राष्ट्रीय काथलिक आप्रवासन आयोग को प्रेषित अपने संदेश में, कलीसिया के सामाजिक धर्मसिद्धांत के अनुरूप मानवाधिकारों और मानव गरिमा के सम्मान को बढ़ावा देने के साधन के रूप में आप्रवासियों और शरणार्थियों की देखभाल करने की प्रेरितिक गतिविधि को बरकरार रखने का प्रोत्साहन दिया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 31 मई 2022 (रेई) ˸ संत पापा ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय काथलिक आप्रवासन आयोग के सदस्यों को संदेश भेजा, जिसकी समिति की आमसभा सोमवार को शुरू हुई।

इस अवसर पर संत पापा ने कुछ मूल बातों पर जोर दिया जब आयोग तीन विशेष बिन्दुओं पर विचार कर रहा है˸ आयोग की समिति का गठन, नई विधियों को मंजूरी देना, और आनेवाले वर्षों के लिए इसके संचालन संबंधी दिशानिर्देशों का निर्धारण करना।

 आप्रवासियों एवं शरणार्थियों की देखभाल के लिए गठित

आयोग के गठन पर प्रकाश डालते हुए संत पापा ने गौर किया कि इसकी स्थापना 1951 में संत पापा पीयुस 12वें के द्वारा हुई थी ताकि आप्रवासियों एवं शरणार्थियों की प्रेरितिक देखभाल हेतु विश्वभर के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के साथ सम्पर्क किया जा सके।  

संत पापा ने संदेश में कहा है कि आयोग दूसरे सामाजिक एवं कलीसियाई संगठनों से भिन्न है, यही कारण है कि इसे प्रेरितिक संविधान प्रेदिकाते एवंजेलियुम में, समग्र मानव विकास को बढ़ावा देने हेतु एक परिषद के रूप में शामिल किया गया है।

अतः परिषद उन धर्माध्यक्षों का प्रतिनिधित्व करता है जो आयोग से मिलकर काम करना चाहते हैं एवं आप्रवासियों एवं शरणार्थियों का स्वागत, सुरक्षा, प्रोत्साहन और एकीकरण करने के लिए तैयार हैं।  

कलीसियाई मिशन अद इनत्रा और अद एस्त्रा

संत पापा फ्राँसिस ने आयोग के कलीसियाई मिशन को दो भागों में प्रस्तुत किया है ˸

उन्होंने कहा कि जब आयोग धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों की मदद एवं धर्मप्रांतों में आप्रवासन की चुनौती का जवाब देने के लिए बुलाया गया है, यह विशेष रूप से स्थानीय कलीसियाओं में "आप्रवासियों की प्रेरितिक देखभाल की परियोजनाओं के विकास और कार्यान्वयन को बढ़ावा देने और आप्रवासियों के क्षेत्र में प्रेरितिक कार्यों में संलग्न लोगों के लिए विशेष प्रशिक्षण" के लिए भी बुलाया गया है।"    

संत पापा ने कहा, अद एस्त्रा स्तर पर आयोग वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए स्थानीय कलीसियाओं के साथ सहयोग करने हेतु बुलाया गया है। इसके अलावा, यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नागरिक समाज के संगठन में सहयोग कर रहा है, और आप्रवासन मुद्दों पर व्यापक अंतरराष्ट्रीय जागरूकता के लिए कलीसिया की प्रतिबद्धता व्यक्त करता है।  

उन्होंने कहा कि इस तरह यह मानव अधिकार का सम्मान करता एवं कलीसिया के सामाजिक धर्मसिद्धांत के अनुरूप मानव प्रतिष्ठा को बढ़ावा देता है।

70 सालों की सेवा

संत पापा ने आयोग को 70 सालों से अधिक सेवा देने के लिए धन्यवाद दिया है जिसने कलीसिया को विशेषकर यूक्रेन में युद्ध के कारण भाग रहे विस्थापित लोगों की चुनौतियों का सामना करने में मदद दिया है।  

उन्होंने गौर किया कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी आश्रय की खोज करनेवाले शरणार्थी एवं आप्रवासी के रूप में लाखों लोग हैं, जिन्हें स्वागत, सुरक्षा एवं प्रेम की अति आवश्यकता है।  

उन्होंने कहा, "कलीसिया के रूप में, हम सभी लोगों की सेवा करना तथा शांति के भविष्य का निर्माण करना चाहते हैं। आपके पास अवसर है कि आप कलीसिया के परोपकारी चेहरे को दिखला सकते हैं।"

संत पापा ने अपने संदेश के अंत में अपने लिए प्रार्थना का आग्रह किया एवं आयोग के सदस्यों को उनके कार्यों के अच्छे फल की शुभकामनाएँ दीं तथा उन्हें अपनी प्रार्थना का आश्वासन दिया।

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31 May 2022, 16:37