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इताली ऑटिज़म न्यास के सदस्यों से सन्त पापा फ्राँसिस की मुलाकात, 01.04.2022 इताली ऑटिज़म न्यास के सदस्यों से सन्त पापा फ्राँसिस की मुलाकात, 01.04.2022  (Vatican Media)

इताली ऑटिज़म न्यास के सदस्यों की सन्त पापा से मुलाकात

वाटिकन में शुक्रवार को, ऑटिज़म अथवा आत्मविमोही व्यक्तियों की सहायता करनेवाले इताली संगठन के सदस्यों ने सन्त पापा फ्राँसिस का साक्षात्कार कर उनका सन्देश सुना।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन में शुक्रवार को, ऑटिज़म अथवा आत्मविमोही व्यक्तियों की सहायता करनेवाले इताली संगठन के सदस्यों ने सन्त पापा फ्राँसिस का साक्षात्कार कर उनका सन्देश सुना। 

विश्व ऑटिज़म दिवस

शनिवार दो अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित विश्व ऑटिज़म दिवस मनाया जा रहा है ताकि दुनिया भर में ऑटिज्म से पीड़ित लोगों और उनकी स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान आकर्षित किया जा सके।

सन्त पापा फ्राँसिस ने इस अवसर पर इटालियन ऑटिज्म फाउंडेशन द्वारा किए गए कार्यों का प्रशंसा की, जिनमें  शोधकर्ता, चिकित्सक, मनोवैज्ञानिक संगठन एवं पारिवारिक संघ शामिल हैं, तथा जिन्होंने 2015 से ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम पर अर्थात् आत्मकेंद्रित स्पेक्ट्रम और बौद्धिक अक्षमता वाले लोगों के पक्ष में सहायता की संस्कृति को बढ़ावा देने का सामान्य लक्ष्य निर्धारित किया है।

सन्त पापा ने कहा, "आज, पहले से कहीं अधिक, आपके न्यास के कार्य अहं महत्व रखते हैं। वास्तव में, अपने कार्यों द्वारा आप सबसे कमज़ोर और वंचित किये गये लोगों के पक्ष में अनुसंधान परियोजनाओं और पहलों को अंजाम देकर, फेंकी हुई संस्कृति (दे. एवान्जेली गऊदियुम 53) के खिलाफ लड़ाई में एक वैध योगदान दे रहे हैं।"

समावेश और अपनेपन की संस्कृति

सन्त पापा ने कहा, "अपने सभी रूपों में, विकलांगता, एक अधिक समावेशी और नागर समाज को एक साथ जोड़ने के लिए एक चुनौती और अवसर का प्रतिनिधित्व करती है, जहां परिवार के सदस्यों, शिक्षकों और आपके जैसे संघों को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिये बल्कि उनका समर्थन किया जाना चाहिये। इसके लिए यह आवश्यक है कि निःशक्तता के विभिन्न पहलुओं के प्रति लोगों को सचेत किया जाता रहे और साथ ही पूर्वाग्रहों को तोड़ने और व्यक्ति की गरिमा के आधार पर समावेश और अपनेपन की संस्कृति को बढ़ावा देने के बारे में जागरूकता बढ़ाना जारी रखा जाए।"

सन्त पापा ने कहा कि हालांकि, सबसे नाज़ुक और कमज़ोर पुरुषों और महिलाओं को प्रायः हाशिए पर रख दिया जाता है या उन्हें अलग एवं बेकार का लेबल दे दिया जाता है तथापि, उनकी गरिमा ही वास्तव में मानव समाज के लिये महान कोष है।

भले समारी का दृष्टांत

सन्त लूकस रचित सुसमाचार में निहित भले समारी के दृष्टांत को उद्धृत कर सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, "यह दृष्टान्त हमें एक अधिक भाईचारे वाले समाज का मार्ग दिखाता है। यह दर्शाता है कि व्यक्ति चाहे किसी भी विकलांगता से पीड़ित हो उसका मूल्य समाज में अनमोल है, क्योंकि वह अपनी प्रतिभा के अनुसार समुदाय की सेवा करता है।"

आत्मविमोही एवं एवं विकलांग लोगों के महत्व को समझाते हुए सन्त पापा ने कहा, "समावेश की संस्कृति का एक अनिवार्य पहलू विकलांग लोगों के लिए सक्रिय रूप से भाग लेने की संभावनाओं को उत्पन्न करना है। उन्हें केंद्र में रखने का मतलब केवल भौतिक बाधाओं को तोड़ना ही नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि वे अपना योगदान देकर नागरिक और कलीसियाई समुदाय की पहलों में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।"

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01 April 2022, 11:33