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माल्टा के सन्त पौल महागिरजाघर में सन्त पापा फ्राँसिस य -3.04.2022 माल्टा के सन्त पौल महागिरजाघर में सन्त पापा फ्राँसिस य -3.04.2022  (AFP or licensors)

लीबिया के साथ "घृणित समझौते" के लिए यूरोपीय संघ की निंदा

माल्टा में शनिवार को सन्त पापा फ्रांसिस ने आप्रवासियों को वापस लाने के लिए लीबिया के साथ यूरोपीय संघ द्वारा किए गए "घृणित समझौते" की निंदा की और कहा कि यूरोप को उनका स्वागत करने में मानवता दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भूमध्यसागर को "एकजुटता का रंगमंच" बनना चाहिये "सभ्यता के एक दुखद जहाज़ की तबाही का अग्रदूत नहीं"।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाल्लेत्ता, माल्टा, रविवार, 3 अप्रैल 2022 (रेई, एपी, वाटिकन रेडियो): माल्टा में शनिवार को सन्त पापा फ्रांसिस ने आप्रवासियों को वापस लाने के लिए लीबिया के साथ यूरोपीय संघ द्वारा किए गए "घृणित समझौते" की निंदा की और कहा कि यूरोप को उनका स्वागत करने में मानवता दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि  भूमध्यसागर को "एकजुटता का रंगमंच" बनना चाहिये "सभ्यता के एक दुखद जहाज़ की तबाही का अग्रदूत नहीं"।  

"घृणित समझौता"

सन्त पापा फ्राँसिस यूरोपीय संघ तथा लिबिया के बीच सम्पन्न लीबिया के तट रक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए यूरोपीय संघ के कार्यक्रम सम्बन्धी समझौते की बात कर रहे थे। लीबियाई तट रक्षक आप्रवासी तस्करी के लिए उत्तरी अफ्रीकी देश के तट पर गश्त करते हैं और संभावित शरणार्थियों को वापस किनारे पर लाने के लिये ज़िम्मेदार हैं।

यूरोपीय संघ तथा लीबिया के बीच सम्पन्न उक्त समझौते को, प्रतिवर्ष हज़ारों हताश आप्रवासियों के प्रवाह को रोकने की कोशिश में संलग्न, इटली तथा अन्य भूमध्यसागरीय देशों द्वारा ज़ोरदार समर्थन मिला था। तथापि, मानवाधिकार समूहों ने यूरोपीय संघ द्वारा वित्त पोषित उक्त कार्यक्रम की, प्रवासियों के अधिकारों के उल्लंघन के रूप में, निंदा की है तथा आप्रवासी शिविरों में घोर दुर्व्यवहार का दस्तावेज़ीकरण कर लीबियाई तटरक्षकों पर मानवाधिकारों के घोर अतिक्रमण का आरोप लगाया है। इस सन्दर्भ में, इसी सप्ताह जर्मनी ने प्रवासियों के विरुद्ध दुर्व्यवहार का हवाला देते हुए कहा है कि उसकी सेना अब लीबिया के तट रक्षकों को उनके "अस्वीकार्य", और कुछ मामलों में अवैध व्यवहार को देखते हुए उन्हें प्रशिक्षण नहीं देगी।  

यूरोपीय संघ "एकजुटता का रंगमंच"

सन्त पापा फ्राँसिस ने नाज़ी नज़रबन्दी शिविरों के रूप में लीबियाई हिरासत शिविरों  की कड़ी निन्दा की है किन्तु शनिवार को उन्होंने इस घिनौने खेल में यूरोपीय संघ की संलग्नता को भी फटकार बताई। उन्होंने कहा, "सभ्य देश अपने स्वार्थ के लिए अन्य मनुष्यों को गुलाम बनाने वाले अपराधियों के साथ घिनौने करारों को स्वीकार नहीं कर सकते हैं।"

पचास लाख की आबादीवाला देश माल्टा यूरोपीय संघ का सबसे छोटा देश है, जो दीर्घकाल से भूमध्यसागर में आप्रवासियों और शरणार्थियों के लिये प्रवाह की अग्रिम पंक्ति में रहा है तथा प्रायः बचाव जहाजों को गोदी में जाने से इनकार करने के लिए आलोचना का शिकार भी बना है। इसी हफ्ते एक जर्मन सहायता समूह ने समुद्र में बचाए गए 106 आप्रवासियों के लिए माल्टा के बंदरगाह की मांग की थी किन्तु माल्टा के इनकार के बाद शनिवार को जहाज़ इटली के  सिसिली द्वीप की ओर जा रहा था।

सन्त पापा फ्राँसिस ने बारम्बार आप्रवासियों एवं शरणार्थियों के बचाव एवं स्वागत का आह्वान किया है। शनिवार को अपने इसी आह्वान को प्रतिध्वनित करते हुए उन्होंने माल्टा के निवासियों को येसु मसीह के प्रेरित सन्त पौल का स्मरण दिलाया। बाईबिल धर्मग्रन्थ के अनुसार, ईसा के बाद सन् 60 ई. में रोम की ओर यात्रा करता सन्त पौल का जलपोत माल्टा के तट के निकट नष्ट हो गया था, उस अवसर पर माल्टा द्वीप के लोगों ने सन्त पौल के प्रति असाधारण उदारता दर्शाई थी।  

ता पीनू मरियम तीर्थ  

शनिवार सन्ध्या सन्त पापा फ्रांसिस ने एक काटामैरान नौका से माल्टा के गोज़ो द्वीप का ओर प्रस्थान किया जहाँ उन्होंने पवित्र कुँवारी मरियम को समर्पित ता पीनू नामक राष्ट्रीय मरियम तीर्थ पर प्रार्थना समारोह की अध्यक्षता की। लगभग एक घण्टे की नौका यात्रा के बाद, गोज़ो के बंदरगाह में जहाज के आते ही तोपों की गड़गड़ाहट से सन्त पापा का स्वागत किया गया।

किंवदन्ती है कि सन् 1883 ई. के जून माह में एक महिला ने एक पुराने से आराधनालय में कुँवारी मरियम की आवाज़ सुनी थी, जिसके बाद से गोज़ो में माँ मरियम की मध्यस्थता से कई चमत्कार हुए और कृतज्ञतावश गोज़ों के नागरिकों ने सन् 1920 में मरियम के आदर में एक गिरजाघर के निर्माण का निर्णय लिया था। इसका अनुष्ठान सन् 1935 ई. में सन्त पापा पियुस 11 वें ने एक माईनर महागिरजाघर के रूप में किया था। आज यह मरियम महागिरजाघर माल्टा का राष्ट्रीय तीर्थस्थल है जहाँ देश-विदेश से प्रतिवर्ष लाखों तीर्थयात्री श्रद्धार्पण हेतु आते हैं।  

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03 April 2022, 11:57