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मोमबत्ती जलाकर प्रार्थनारत यूक्रेनी महिलाएं, प्रतीकात्मक तस्वीर मोमबत्ती जलाकर प्रार्थनारत यूक्रेनी महिलाएं, प्रतीकात्मक तस्वीर   (AFP or licensors)

कलीसियाई आचार्याएँ विश्व में आशा का संचार करती हैं, सन्त पापा

कलीसियाई आचार्या महिलाओं एवं यूरोप की संरक्षिकाओं पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने वालों को, मंगलवार को, एक विडियो सन्देश भेजकर सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि इन संतों महिलाओं की शिक्षाएं आज भी "प्रासंगिक और समसामयिक हैं।"

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 9 मार्च 2022 (रेई, वाटिकन रेडियो): कलीसियाई आचार्या महिलाओं एवं यूरोप की संरक्षिकाओं पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने वालों को, मंगलवार को, एक विडियो सन्देश भेजकर सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि इन संतों महिलाओं की शिक्षाएं आज भी "प्रासंगिक और समसामयिक हैं।"

सन्त पापा ने कहा कि अवीला की सन्त तेरेसा, सियेना की सन्त काथरीन, लिसिक्स की सन्त तेरेसा, बिनगन की सन्त हिलडेगार्ड, स्वीडन की सन्त ब्रिजिड तथा क्रूस की सन्त तेरेसा बेनेडिक्ट "कलीसिया और विश्व के लिए नारीत्व के आवश्यक तत्वों की प्रकाशना करती हैं।"

प्रकाश और आशा का प्रतीक

सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि उनकी "प्रमुख शिक्षाएं ... विशेष रूप से, उनकी स्थायी गहराई और प्रासंगिकता के कारण समसामयिक हैं, और वर्तमान परिस्थितियों में, हमारे खंडित और झगड़ालू विश्व को प्रकाश और आशा प्रदान कर सकती हैं।"

उन्होंने इस तथ्य के प्रति ध्यान आकर्षित कराया कि इन सभी सन्त महिलाओं ने "पवित्र जीवन की गवाही दी," बपतिस्मा के अनुग्रह के माध्यम से पवित्र आत्मा के प्रति वे विनम्र रहीं, और "ईश्वर के प्रेम से परिपूर्ण होकर शक्ति प्राप्त की।"

कलीसिया और विश्व के लिये आवश्यक

सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, "हमारे विश्व ने आज स्वीकार किया है कि जिस गरिमा और आंतरिक मूल्य से सृष्टिकर्त्ता ईश्वर ने इन महिलाओं को परिपूर्ण किया था, वह विश्व की प्रत्येक महिला को बहाल किया जाना चाहिये।"

उन्होंने कहा कि कलीसिया की इन आचार्याओं एवं यूरोप की संरक्षिकाओं में हम उन तत्वों का दर्शन कर सकते हैं जो आज कलीसिया और विश्व के लिये नितान्त आवश्यक हैं। इन तत्वों में शामिल हैं, "कठिनाईयों का सामना करने का साहस; व्यावहारिक होने की क्षमता; ईश्वर की योजनानुसार जो सर्वाधिक सुंदर और मानवीय है उसे बढ़ावा देने की एक स्वाभाविक इच्छा; तथा दुनिया और इतिहास की दूरदर्शी एवं भविष्यसूचक दृष्टि।"

संत पापा ने कलीसिया तथा उसके परमाध्यक्ष के प्रति इन सन्त महिलाओं के प्रेम पर भी प्रकाश डाला जिन्होंने अपने-अपने युग में पाप एवं पीड़ा का उपचार ढूँढ़ने में मदद प्रदान की थी।  

अपने संदेश को सन्त पापा फ्राँसिस ने इस आशा के साथ समाप्त किया कि उक्त सम्मेलन "महिलाओं की पवित्रता को बढ़ावा देने के लिए एक प्रोत्साहन साबित हो जिनकी भूमिका कलीसिया तथा विश्व को फलदायी बनाती है।"

 

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09 March 2022, 11:39