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वाटिकन  में सन्त पापा  फ्राँसिस के साथ मैरिस्ट धर्मसमाजी धर्मबन्धु, 24.03.2022 वाटिकन में सन्त पापा फ्राँसिस के साथ मैरिस्ट धर्मसमाजी धर्मबन्धु, 24.03.2022  (ANSA)

मैरिस्ट धर्मबन्धुओं को सन्त पापा फ्राँसिस का सम्बोधन

रोम में अपनी आम सभा के लिये एकत्र मैरिस्ट धर्मसमाजी धर्मबन्धुओं को गुरुवार को सम्बोधित करते हुए सन्त पापा ने कहा कि चालीसाकाल के दौरान माता कलीसिया हमसे आग्रह करती है कि हम अपने जीवन का सुधार करें तथा ईश्वर एवं ईश वचन को अपने जीवन में सर्वप्रथम स्थान प्रदान करें।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 25 मार्च 2022 (रेई, वाटिकन रेडियो): रोम में अपनी आम सभा के लिये एकत्र मैरिस्ट धर्मसमाजी धर्मबन्धुओं को गुरुवार को सम्बोधित करते हुए सन्त पापा ने कहा कि चालीसाकाल के दौरान माता कलीसिया हमसे आग्रह करती है कि हम अपने जीवन का सुधार करें तथा ईश्वर एवं ईश वचन को अपने जीवन में सर्वप्रथम स्थान प्रदान करें।

सीमाओं से परे जायें  

सन्त पापा ने कहा कि मैरिस्ट धर्मसमाजी धर्मबन्धुओं का समुदाय एक बहुसांस्कृतिक एवं बहुजातीय समुदाय है इसलिये उनसे मांग की जाती है कि वे ईश वचन से प्रेरित होकर सभी सीमाओं के परे जायें। केवल भौगोलिक सीमाओं को ही पार न करें बल्कि मानसिकता में बदलाव लायें।

उन्होंने कहा कि इसका अर्थ अपनी जड़ों से ख़ुद को अलग करना नहीं है, क्योंकि अपनी मूल जड़ों के प्रति निष्ठा तथा सार्वभौमिक खुलेपन के बीच कोई विरोधाभास नहीं है, अपितु यह निरंतरता है, सामान्य विकास है। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, प्रभु येसु ख्रीस्त के आदर्श के अनुसार, हमारे सिपुर्द किये गए लोगों के साथ प्रेम के बन्धन में बंध कर और अंत तक वफादार रहकर ही हमारी सेवा ईशकृपा की शक्ति के माध्यम से सभी के लिए फलदायी होती है। उन्होंने कहा कि यही है वह फलदायीता है जो हमें साहसपूर्वक आगे बढ़ने हेतु प्रेरित करती है।

सन्त पापा ने स्मरण दिलाया कि मैरिस्ट धर्मबन्धुओं के लिये उनके संस्थापक सन्त मारसेलिनो शामपान्यात के अनुसार, जीवन यापन का अर्थ है युवाओं के बीच सुसमाचार प्रचार तथा युवाओं की शिक्षा के प्रति स्वतः का समर्पण। उन्होंने कहा कि सन्त शामपान्यात ने  "परे देखना" जाना, और वे जानते थे कि सुसमाचार के अनुसार "परे देखने",  ईश्वर को देखने के लिये, प्रेम के क्षितिज को खोलने के लिए युवाओं को कैसे सिखाया जाए।

सन्त पापा ने कहा, "वे "अच्छी माँ" पवित्र कुँवारी मरियम के उदाहरण द्वारा निर्देशित किये गये थे, जैसा कि उन्होंने ख़ुद कहा था: मरियम  एक साधारण गांव की एक छोटी सी महिला थीं, लेकिन उनका दिल परे देखता था, वे ईश राज्य राज्य के क्षितिज के प्रति सदैव उदार रहीं।"

मरियम का धन्यवाद गीत

 

सन्त पापा ने कहा सन्त शामपान्यात के उक्त भाव मरियम के धन्यवाद गीत "मागनिफिकात" में व्यक्त हुए हैं, जिसमें ईश्वर की मुक्ति योजना, एक विनम्र और विनीत सेविका की आवाज़ में, अभिव्यक्त हुई है। सन्त पापा ने कहा कि मरियम के धन्यवाद गीत के सिवाय और कोई उपयुक्त साधन नहीं है जो आज के किशोर एवं किशोरियो को ईश्वर के प्रति और ईश प्रेम के प्रति उदार बनना सिखा सके।

मरियम के धन्यवाद गीत पर अपने चिन्तन को जारी रखते हुए सन्त पापा ने कहा, "मागनिफिकात" गीत में जीवन और इतिहास की एक दृष्टि निहित है; यह विश्वास और प्रार्थना की एक पाठशाला है, जो किसी को अपने आप में और किसी भी प्रकार की आध्यात्मिकता में बंद होने से मुक्त करता तथा, मसीह के सुसमाचार के अनुसार, विश्वास करने, आशा करने और प्यार करने के आनंद से परिचित कराता है।

शिक्षा का मर्म

सन्त पापा ने अन्त में कहा, मैं आपके लिए और दुनिया भर में व्याप्त आपके सभी भाइयों के लिए यही कामना करता हूँ कि आप, प्रभु येसु के पदचिन्हों पर चल, मरियम के साथ आगे देखने और परे देखने के लिये युवाओं को शिक्षित करें।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के ज्ञानोदय की अवधारणा के खिलाफ यही शिकायत है क्योंकि वह केवल विचारों, विचारों, विचारों की नकल है ... जो अनुचित है, यह शिक्षा की ज्ञानोदय एवं वैचारिक अवधारणा को ही नष्ट कर देता है। उन्होंने कहा कि हमारी शिक्षा का उद्देश्य परे देखने की शिक्षा देना होना चाहिये। शिक्षा पूरे व्यक्ति के लिए एक चुनौती है: इससे लोगों के विचारों, उनकी भावनाओं और उनके काम का तथा अखण्ड मानव का रचनात्मक विकास होना चाहिये।

 

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25 March 2022, 11:51