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"अगाथा स्मेराल्दा परियोजना" संघ के सदस्यों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस "अगाथा स्मेराल्दा परियोजना" संघ के सदस्यों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

दुनिया में सच्ची क्रांति है दुर्बलों को उठाना

संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार, 5 मार्च को "अगाथा स्मेराल्दा परियोजना" संघ के सदस्यों से मुलाकात की तथा उन्हें बतलाया कि "दुनिया में सच्ची क्रांति है उन लोगों का कार्य जो प्रतिदिन चुपचाप कार्य करते हैं ताकि छोटे और कमजोर लोग तिरस्कृत, परित्यक्त, वंचित न रहें, बल्कि उठ सकें और ईश्वर के बच्चों के रूप में अपनी गरिमा के अनुसार जी सकें।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 5 मार्च 2022 (रेई) ˸ अगाथा स्मेराल्दा संघ एक परियोजना है जो ब्राजील एवं दुनिया के अन्य हिस्सों की झुग्गियों में काम करते हैं। संघ का उद्देश्य है गली के बच्चों की मदद करना। ब्राजील में करीब 10,000 बच्चे हैं जिन्हें बहिया के सल्वाडोर में मिशनरियों एवं लोकधर्मियों द्वारा 160 आश्रय केंद्रों में शरण दी गई है।

पितृत्व की आवश्यकता

संघ के सदस्यों को सम्बोधित करते हुए संत पापा ने कहा, "आपकी संवेदनशीलता, उदारता, मातृत्व एवं पितृत्व आपके समर्पण का आधार है।"

उन्होंने आमदर्शन समारोह के दौरान संत जोसेफ विषयवस्तु पर धर्मशिक्षा की याद की जिसमें बच्चों को गोद लेने जिक्र किया था और कहा था कि "मैं उन दम्पतियों की सराहना करता एवं उन्हें प्रोत्साहन देता हूँ जो अपना हृदय एवं घर उन बच्चों के स्वागत के लिए खोलते हैं जिनका कोई परिवार नहीं है।"  

उन्होंने कहा कि जो लोग दूर से किसी बच्चे को अपनाना चाहते हैं वे उस भावना से प्रेरित है कि बच्चा प्यार किया गया महसूस करे, उसे किसी आवश्यक चीज की कमी न हो और वह अच्छी तरह बढ़ सके।  

ईश्वर की कोमलता का प्रचार

संत पापा ने संघ के सदस्यों को उनके कार्यों के लिए धन्यवाद देते हुए कहा, "आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद क्योंकि आप दुनिया में ईश्वर की कोमलता, उनके पितृत्व का प्रचार करना चाहते हैं, जो एक महान वरदान है जिसको येसु ने हमारे लिए प्रदान किया है। येसु केवल पिता के बारे नहीं बतलाते, बल्कि पिता के साथ अपने संबंध में हमें भी स्वीकार करते हैं। यही कारण है कि उन्होंने शरीरधारण किया और कुंवारी मरियम से जन्में, हमारे समान एक मानव के रूप में जिये, दुःख उठाये, मरे और फिर जी उठे। उन्होंने ये सब कुछ किया ताकि हम स्वर्गिक पिता की संतान बन सकें। संत पौलु कहते हैं ताकि हम उनके दत्तक पुत्र बन सकें। (गला.4,5)

चुपचाप क्रांति

संत पापा ने कहा कि सच्ची क्रांति वह है जो उन लोगों के द्वारा लायी जाती है जो हर दिन चुपचाप काम करते हैं ताकि छोटे और गरीब लोग तिरस्कृत,परित्यक्त और वंचित न रहें, बल्कि उठ सकें और अपनी ईश्वर की संतान की अपनी प्रतिष्ठा के अनुसार जी सकें।"

उन्होंने कहा, "यह ईश्वर के राज्य का एक छोटा सा बीज है, जो उस हद तक बढ़ता और फलता है जितना अधिक उसे प्यार से देखभाल किया जाता है।"

संत पापा ने उन पुरोहितों, धर्मबहनों एवं लोकधर्मियों को धन्यवाद दिया जो दुनिया के सुदूर क्षेत्रों में कार्य करते हैं, "मैं आपके साथ प्रभु को धन्यवाद देता हूँ और आपकी सराहना करता हूँ कि आप उनकी प्रेमी देखभाल में सहयोग दे रहे हैं। सचमुच हम ईश्वर की देखभाल के सहयोगी हैं, जो मुझे आनन्द और कृतज्ञता से भर देता है।"

संत पापा ने उन्हें प्रोत्साहन देते हुए, उन्हें तथा उनके कार्यों में सहयोग करनेवाले सभी लोगों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया। 

 

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05 March 2022, 15:12