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संत पेत्रुस महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग अर्पित करते धर्माध्यक्ष संत पेत्रुस महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग अर्पित करते धर्माध्यक्ष  (Vatican Media)

संत पापा फ्राँसिस ने धर्माध्यक्षों को जिम्मेदारी सौंपी

संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार को मोतू प्रोप्रियो के रूप में एक नया प्रेरितिक पत्र जारी किया, जिसमें उन्होंने कलीसियाई कानून (कॉड ऑफ कैनन लो, सीआईसी) तथा पूर्वी रीति की कलीसियाओं के कॉड ऑफ कैनन (सीसीईओ) में बदलाव लाया है ताकि विकेन्द्रीकरण में अधिक सुविधा दी जा सके।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 15 फरवरी 2022 (रेई)˸ मंगलवार को प्रकाशित मोतू प्रोप्रियो के साथ, संत पापा ने लातीनी कलीसिया तथा पूर्वी कलीसिया के कॉड ऑफ कैनन में संशोधन किया है जिसमें उन्होंने विश्वव्यापी कलीसिया के विभिन्न निकयों के लिए सामर्थ्य के क्षेत्रों में परिवर्तन लाया है, खासकर, प्रेरितिक पत्र "अस्सेनियारे अलकूने कोमपेतेंसे" (कुछ सामर्थ्यों को सौंपना, जिसको दस्तावेज की पहली पंक्ति से लिया गया है) के द्वारा पोप फ्राँसिस ने कुछ जिम्मेदारियों को वाटिकन से स्थानीय धर्माध्यक्षों को सौंप दिया है।  

सामूहिकता को बढ़ावा देना

नई नीतियाँ कलीसिया के विभिन्न क्षेत्रों के लिए लागू की गई हैं, जिनमें प्रत्येक मामले में उन मुद्दों के संबंध में निर्णय लेने के लिए सक्षम अधिकारियों को निर्दिष्ट किया गया है। संत पापा ने लिखा है, "बदलाव का मकसद सबसे बढ़कर सामूहिकता एवं धर्माध्यक्षों साथ ही साथ, परमाधिकारियों की ओर से प्रेरितिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना है तथा तर्कसंगतता, प्रभावशीलता और दक्षता के सिद्धांत का समर्थन करना।"

संत पापा ने स्पष्ट किया है कि "कुछ सामर्थ्यों को सौंपना" – सीधे निर्णय करने का अधिकार प्रदान करना है जिन्हें स्थानीय कलीसिया एवं कलीसियाई संस्थाओं में प्रशासनात्मक शक्ति प्राप्त है, बशर्ते कि यह एकता की कलीसियाई गतिशीलता से मेल खाती हो और सामीप्य को बढ़ाती हो। उन्होंने गौर किया है कि एक स्वस्थ विकेंद्रीकरण कलीसिया के पदानुक्रमित आयाम को खतरे में डाले बिना इस गतिशीलता का समर्थन नहीं कर सकता है"।

प्रेरितिक प्रभावकारिता के साथ जवाब

संत पापा ने व्याख्या की है कि बदलाव जो कलीसिया के साझा एवं बहुलवादी सार्वभौमिकता को प्रतिबिम्बित करता है, एकरूपता में लाये बिना, विविधताओं को स्वीकार करते हुए, रोम के धर्माध्यक्ष के साथ जोड़ता है। साथ ही साथ, स्थानीय कलीसिया के अधिकारियों के प्रेरितिक कार्यों को अधिक प्रभावशाली तथा लोगों एवं परिस्थितियों के सामीप्य को अधिक सुगम बनाता है।  

बदलाव से निम्नलिखित क्षेत्र प्रभावित होंगे, अंतर-धर्मप्रांतीय सेमिनरी का निर्माण, पुरोहितीय प्रशिक्षण की योजना धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा उत्पन्न, समर्पित कुँवारियों के धर्मसंघ, मन्नतधारी धर्मबहन की उनके समुदाय से बरख़ास्तगी, क्षेत्रीय धर्मशिक्षा का प्रकाशन और ख्रीस्तयाग के साथ जुड़े विरासत या दान के दायित्व को कम करना आदि।

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15 February 2022, 16:49