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सन्त पापा फ्राँसिस बुधवारीय आम दर्शन के समय, 05. 01. 2021 सन्त पापा फ्राँसिस बुधवारीय आम दर्शन के समय, 05. 01. 2021   (ANSA)

फ्रांस के एक व्यावसायी समूह को संत पापा फ्राँसिस का संबोधन

जनकल्याण विषय पर चिन्तन हेतु रोम की तीर्थयात्रा पर फ्राँस से आये व्यावसायी समूह को शुक्रवार को सम्बोधित करते हुए सन्त पापा फ्राँसिस ने इस बात पर हर्ष व्यक्त किया कि आज के युग में भी ऐसे व्यावसायी हैं जो जनकल्याण की बात सोचते हैं।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 7 जनवरी 2022 (रेई, वाटिकन रेडियो): जनकल्याण विषय पर चिन्तन हेतु रोम की तीर्थयात्रा पर फ्राँस से आये व्यावसायी समूह को शुक्रवार को सम्बोधित करते हुए सन्त पापा फ्राँसिस ने इस बात पर हर्ष व्यक्त किया कि आज के युग में भी ऐसे व्यावसायी हैं जो जनकल्याण की बात सोचते हैं।

उन्होंने कहा, "यह अति सुन्दर और साहसिक है कि प्रायः व्यक्तिवाद, उदासीनता और यहां तक ​​कि सबसे कमजोर लोगों को हाशिए पर रखने की प्रवृत्ति वाले आज के विश्व में भी कुछ उद्यमियों और व्यापारिक नेताओं के दिल में, न कि केवल निजी हितों या करीबी लोगों की बल्कि सभी की सेवा निहित है।"  

सामान्य भलाई एक चुनौती

सन्त पापा ने स्वीकार किया कि आधुनिक विश्व में सबके कल्याण की बात सोचना चुनौतिपूर्ण है, तथापि, उन्होंने कहा कि प्रभु येसु ख्रीस्त का सुसमाचार हमें सिखाता है कि ईश्वर की कृपा हमें अपने ज़रूरतमन्द भाई की मदद हेतु प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि ख्रीस्त के हर अनुयायी को आदर्श और यथार्थ का अनुभव करना पड़ता है, जो सरल काम नहीं है, तथापि, यह सराहनीय है कि कुछेक व्यावसायी यथार्थ को ध्यान में रखते हुए आदर्शों को पूरा करने का प्रयास करते हैं।

सन्त पापा ने कहा, "जनकल्याण अथवा सामान्य भलाई की तलाश आपकी पेशेवर ज़िम्मेदारियों के संदर्भ में आपके लिए एक आदर्श है किन्तु चिंता का भी कारण है।" उन्होंने कहा, "जनकल्याण निश्चित रूप से आपके विवेक और प्रबंधकों के रूप में आपकी पसंद का एक निर्धारित तत्व है, तथापि इसे वर्तमानकालीन आर्थिक और वित्तीय प्रणालियों द्वारा लगाए गए दायित्वों से निपटना पड़ता है, जो प्रायः सामाजिक न्याय और उदारता सम्बन्धी सुसमाचार के सिद्धांतों से मेल नहीं खाती हैं।"

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि, कभी-कभी, आपका काम आप पर भारी पड़ता है, जब आप न्याय का आदर्श और सामान्य भलाई प्राप्त करने की कल्पना करते हैं, तब आपका विवेक संघर्ष में आ जाता है, एक कठोर वास्तविकता ख़ुद को आपके सामने प्रस्तुत करती है, जिससे आप कमी, विफलता, पछतावा और यहाँ तक कि झटका महसूस करते हैं, क्योंकि अपने सपनों एवं आदर्शों को आप साकार नहीं कर पाते। ऐसी स्थिति में, सन्त पापा ने कहा, "यह महत्वपूर्ण है कि आप इस पर विजय प्राप्त करें और इसे विश्वास में जी सकें, ताकि दृढ़ रहें और भलाई करने पर कभी निराश न होवें।"  

मरियम हमारा आदर्श

मरियम का उदाहरण देते हुए सन्त पापा ने कहा, "ग़रीब गऊशाले में इतने अधिक कष्ट भोगने पर भी मरियम ने साहस का परित्याग नहीं किया, उन्होंने अपनी स्थिति का विरोध नहीं किया, इसके विपरीत, ईश्वर में दृढ़ विश्वास की अभिव्यक्ति कर उन्होंने सबकुछ को अपने हृदय  में संजोये रखा।"

उन्होंने कहा, "मरियम की तरह हम भी सबकुछ को हृदय में संजोये रखें। अँधेरे के बावजूद उन चीज़ों का स्वागत करें जिन्हें स्वीकार करना मुश्किल है, जिन्हें हम नहीं चाहते हैं, जिन्हें हम रोक नहीं सकते हैं। किसी भी स्थिति में, अपनी जिम्मेदारियों से बचने अथवा अपने जीवन को छिपाने या "कृत्रिम बनाने" की कोशिश न करें। मरियम की तरह प्रार्थना करें और ईश्वर का ध्यान करें तथा जीवनदाता ईश्वर के दृष्टिकोण से उनके अंतर्संबंध और अर्थ को बेहतर ढंग से समझ का प्रयास करें।"    

उद्यमी या व्यावसायी नेता के दायित्वों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए सन्त पापा ने कहा, "किसी भी ख्रीस्तीय नेता का मिशन कई मायनों में उस चरवाहे के सदृश है, जिसका आदर्श येसु हैं, और जो जानता है कि कैसे रास्ता दिखाने के लिए झुंड के सामने जाना होता है, ऐसा चरवाहा जो यह देखने के लिए बीच में खड़ा होना जानता है कि क्या हो रहा है। वह यह भी जानता है कि कभी-कभी कैसे पीछे रहना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई पीछे तो नहीं छूट गया है।"

सन्त पापा ने व्यावसायियों को प्रोत्साहन दिया कि वे अपने सहकर्मियों के साथ सहयोग एवं समन्वय बनाये रखें तथा उनके जीवन में रुचि लें, उनकी कठिनाइयों, कष्टों, चिंताओं, और साथ ही उनकी खुशियों, परियोजनाओं, आशाओं और आकांक्षाओं के बारे में जागरूक रहें तथा सबके कल्याण से सम्बन्धित अपने मिशन को अन्जाम दें।

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07 January 2022, 11:23