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देवदूत प्रार्थना में संत पापा फ्राँसिस देवदूत प्रार्थना में संत पापा फ्राँसिस   (AFP or licensors)

देवदूत प्रार्थना में पोप : प्रार्थना हमारे हृदय को प्रभु के लिए खोलती है

संत पापा फ्राँसिस ने प्रभु के बपतिस्मा रविवार के दिन संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में उपस्थित विश्वासियों के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ करने के पूर्व, प्रार्थना करने एवं बपतिस्मा की तिथि याद रखने के महत्व पर चिंतन किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार, 9 जनवरी 2022 (रेई)- प्रभु के बपतिस्मा पर्व के अवसर पर रविवार 9 जनवरी को, संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में उपस्थित विश्वासियों के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

आज की धर्मविधि का सुसमाचार पाठ एक ऐसा दृश्य प्रस्तुत करता है जिसके द्वारा येसु के सार्वजनिक जीवन की शुरूआत होती है : वे जो ईश्वर के पुत्र एवं मसीह हैं, यर्दन नदी के तट पर जाते और योहन बपतिस्ता से बपतिस्मा लेते हैं। करीब 30 वर्षों तक गुप्त रूप से जीवन जीने के बाद, येसु अपने आपको किसी चमत्कार के द्वारा अथवा उपदेश देनेवाले स्थान से प्रस्तुत नहीं करते, बल्कि वे अपने आपको लोगों की पंक्ति में रखते हैं जो यर्दन नदी में खुले मन और खाली पैर से बपतिस्मा लेने जा रही थी। येसु हम पापियों के दुःख को साझा करते हैं, हमारे पास आते हैं, वे नदी में उतरते हैं और साथ ही घायल मानवता के इतिहास में प्रवेश करते हैं। इस तरह वे हमारे जल में डुबकी लगाते हैं ताकि हमें सुस्वस्थ करें एवं हमारे साथ एक होकर हमारे बीच रह सकें।  

वे हमसे ऊपर नहीं उठते बल्कि लोगों के समान खुली आत्मा एवं खाली पाँव से हमारी ओर उतरते हैं। वे अकेले अथवा विशेषाधिकार प्राप्त व्यक्तियों के साथ नहीं चलते, किन्तु लोगों के साथ चलते हैं। वे उनके साथ हो लेते हैं और बपतिस्मा प्राप्त विनम्र लोगों के साथ रहते हैं।

येसु प्रार्थना करते हैं

संत पापा ने कहा, "हम इस महत्वपूर्ण क्षण पर ठहरें, जिसमें येसु ने बपतिस्मा लिया, पाठ बतलाता है कि वे प्रार्थना कर रहे थे।" (लूक.3,21) इसपर चिंतन करना हमारे लिए अच्छा होगा : येसु प्रार्थना करते हैं। लेकिन क्यों? क्या प्रभु, ईश्वर के पुत्र हमारे समान प्रार्थना करते हैं? निश्चय ही, जिसको सुसमाचार बार-बार दुहराता है। वे प्रार्थना में बहुत समय व्यतीत करते थे : हर दिन की शुरूआत में, बहुधा रात के समय, कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले...उनकी प्रार्थना एक सच्ची वार्तालाप थी, पिता के साथ एक गहरा संबंध। इस तरह आज के सुसमाचार पाठ में हम येसु के जीवन की दो घटनाओं को देख सकते हैं : एक ओर वे हमारी तरफ आते हैं यर्दन के जल में प्रवेश करते हुए, वहीं दूसरी ओर अपनी नजर एवं हृदय ऊपर उठाकर पिता से प्रार्थना करते हैं।

कठिनाइयों का सामना

संत पापा ने कहा कि यह हमारे लिए एक महान शिक्षा है : हम सभी जीवन की समस्याओं एवं कई जटिल परिस्थितियों में उलझे हुए हैं हम उन क्षणों एवं कठिन चुनाओं का सामना करने के लिए बुलाये जा रहे हैं जो हमें नीचे की ओर खींचते हैं। पर यदि हम रौंदा जाना नहीं चाहते हैं तो हमें सब कुछ को ऊपर उठाना होगा। खासकर, प्रार्थना यह काम करती है। प्रार्थना भागना नहीं है, यह जादू-मंतर भी नहीं है और न ही कंठस्थ की हुई भक्ति गीत है। इसके विपरीत, प्रार्थना, ईश्वर को अपने अंदर काम करने देना है, वे हमसे जो बोलते हैं उसे कठिन परिस्थिति में भी सुन सकना है। प्रार्थना आगे बढ़ने हेतु शक्ति प्राप्त करने के लिए की जाती है। कई लोगों को लगता है कि वे आगे नहीं बढ़ सकते और प्रार्थना करते हैं : "प्रभु मुझे आगे बढ़ने की शक्ति दीजिए।" हमने भी कई बार इसी तरह प्रार्थना की है। प्रार्थना हमारी मदद करती है क्योंकि यह हमें ईश्वर के साथ जोड़ती है, हमें उनके साथ मुलाकात करने के लिए खोलती है। जी हाँ, प्रार्थना एक कुँजी है जो हमारे हृदय को प्रभु के लिए खोल देती है। यह ईश्वर के साथ वार्तालाप है, उनके वचनों को सुनना है, उनकी आराधना करना है, हम जैसा जीते हैं उसे चुपचाप समर्पित करना है और कभी-कभी योब की तरह पुकारना भी है। योब की तरह पुकारना है; वे एक पिता हैं, वे अच्छी तरह समझते हैं। वे कभी हमसे गुस्सा नहीं करते। येसु प्रार्थना करते हैं।

प्रार्थना की शक्ति

संत पापा ने प्रार्थना की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा, "प्यारे भाइयो एवं बहनो, प्रार्थना के लिए आज के सुसमाचार पाठ में एक सुन्दर छवि प्रस्तुत की गई है कि "यह स्वर्ग खोलती है।"(21) प्रार्थना स्वर्ग खोल देती है, यह जीवन को ऑक्सीजन प्रदान करती है, यह कठिनाइयों के बीच सांस देती है और चीजों को अधिक विस्तृत रूप में देखने का अवसर देती है। इन सबसे बढ़कर यह येसु की तरह अनुभव प्रदान कराती है जैसा उन्होंने यर्दन नदी में किया था। यह हमें बच्चों को पिता के द्वारा प्रेम किया गया महसूस कराती है। हमारे लिए भी जब हम प्रार्थना करते हैं तब पिता कहते हैं, जैसा कि उन्होंने सुसमाचार में येसु से कहा है : तुम मेरे पुत्र हो, तुम मेरे लिए प्रिय हो।" (22)

अपने बपतिस्मा की तिथि याद रखें

हम बपतिस्मा के दिन से ही उनके बच्चे बन गये हैं जो हमें ख्रीस्त से संयुक्त कर देता और ईश्वर की प्रजा के रूप में, पिता के प्रिय संतान बना देता है। संत पापा ने विश्वासियों से कहा कि हम बपतिस्मा की तिथि को न भूलें। यदि मैं आप सभी से पुछूँ कि आपने कब बपतिस्मा लिया था? तो कुछ लोग होंगे जिन्हें तिथि याद नहीं होगी। उन्होंने कहा कि बपतिस्मा की तिथि याद रखना एक सुन्दर बात है। हम बपतिस्मा की तिथि याद रखें क्योंकि यह हमारा पुनर्जन्म है, जब हम येसु में ईश्वर के बेटे-बेटियाँ बन गये। जो अपने बपतिस्मा की तिथि याद नहीं करते उन्हें संत पापा ने सलाह दी कि वे घर जाकर अपने माता-पिता, चाची या दादा-दादी से पूछें कि मैंने कब बपतिस्मा ली थी। उस दिन को खुशी मनाने और ईश्वर को धन्यवाद देने के लिए याद रखें।

हमारी प्रार्थना कैसी है

तब संत पापा ने चिंतन करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा, "और आज इस समय में हम अपने आप से पूछें: मेरी प्रार्थना कैसी है? क्या मैं आदत से प्रार्थना करता हूँ, अनिच्छा से करता हूँ, नियम पूरा करता हूँ या क्या मेरी प्रार्थना ईश्वर से मुलाकात है? मैं एक पापी हूँ, हमेशा ईश प्रजा के बीच रहता हूँ और क्या कभी अलग नहीं होता? अथवा क्या मैं ईश्वर से संयुक्त रहता हूँ, उनसे बातें करता हूँ, उनके वचनों को सुनता हूँ? हम दिन के समय कई चीजों में व्यस्त रहते हैं इसके कारण प्रार्थना को दरकिनार न कर दें। इसके लिए समय दें, हम बार-बार तीर विन्ती कर सकते हैं, हम हर दिन सुसमाचार का पाठ करें। प्रार्थना स्वर्ग खोल देती है।"

तब संत पापा ने माता मरियम की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा, "और अब हम माता मरियम की ओर मुड़ें, प्रार्थनामय कुँवारी, जिन्होंने अपने जीवन को ईश्वर की स्तुति का गीत बनाया।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना में संत पापा का संदेश

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09 January 2022, 16:05