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सन्त पापा फ्राँसिस वाटिकन  में सन्त पापा फ्राँसिस वाटिकन में  (Vatican Media)

नवीन ख्रीस्तीय मानवता का सन्त पापा ने किया आह्वान

सन्त पापा फ्राँसिस ने मंगलवार को संस्कृति सम्बन्धी परमधर्मपीठीय समिति की पूर्ण कालिक सभा को एक विडियो सन्देश भेजकर पश्चिमी समाज की तरलता को रोकने में मदद करने के लिए एक नवीन ख्रीस्तीय मानवतावाद का आह्वान किया।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 24 नवम्बर 2021 (रेई, वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने मंगलवार को संस्कृति सम्बन्धी परमधर्मपीठीय समिति की पूर्ण कालिक सभा को एक विडियो सन्देश भेजकर पश्चिमी समाज की तरलता को रोकने में मदद करने के लिए एक नवीन ख्रीस्तीय मानवतावाद का आह्वान किया।

"आवश्यक मानवतावाद", शीर्षक के अन्तर्गत संस्कृति सम्बन्धी परमधर्मपीठीय समिति की पूर्ण कालिक सभा मंगलवार को वाटिकन में आरम्भ हुई, जिसमें ऑनलाईन के द्वारा सदस्य भाग ले रहे हैं। वरचुएल फॉरमैट में जारी पूर्णकालिक सभा को दृष्टिगत रख सन्त पापा ने कहा कि डिजिटल जगत ने सब कुछ को "अविश्वसनीय रूप से करीब लेकिन उपस्थिति की गर्मी के बिना" बना दिया है। उन्होंने कहा कि महामारी ने हमारे सामाजिक और आर्थिक मॉडल की कमजोरियों को उजागर किया है, जिसमें काम करने के तरीके, सामाजिक जीवन और धार्मिक आराधना अर्चना की गतिविधियाँ भी शामिल हैं। तथापि, उन्होंने कहा कि साथ ही महामारी ने मानव अस्तित्व के बुनियादी सवालों, जैसे कि ईश्वर और इंसान के बारे में सवालों का सामना करने हेतु लोगों में इच्छा को फिर से जगा दिया है।

नया मानवतावादी दृष्टिकोण

सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि इसीलिये परिषद द्वारा चुना गया मानवतावाद विषय एक निर्णायक क्षण में आया है। उन्होंने कहा,  "इतिहास के इस मोड़ पर हमें न केवल नए आर्थिक कार्यक्रमों या वायरस के खिलाफ नए फॉर्मूले की जरूरत है, बल्कि सबसे पहले एक नए मानवतावादी दृष्टिकोण की जरूरत है, जो बाइबिल के रहस्योद्घाटन पर आधारित हो, जो शास्त्रीय परंपरा की विरासत और साथ ही विभिन्न संस्कृतियों में मौजूद मानव व्यक्ति पर चिन्तन से समृद्ध हो।"

जीवन में अर्थ ढूँढ़े

सन्त पापा पौल षष्टम के शब्दों को याद कर सन्त पापा ने कहा कि कलीसिया को धर्म के प्रति उदासीन मानवतावाद के ख़तरों का प्रत्युत्तर  भले गड़ेरिये के आदर्श को प्रस्तुत कर करना चाहिये, "जो मनुष्य के प्रति अत्यधिक सहानुभूति से पूर्ण है।" सन्त पापा ने कहा,  "हमारा अपना युग "विचारधाराओं के अंत" और "समकालीन सांस्कृतिक दृष्टि की तरलता" द्वारा चिह्नित है। तथापि, कलीसिया समाज और विश्व को बहुत कुछ दे सकती है।

उन्होंने कहा कि कलीसिया हमें द्वितीय वाटिकन महासभा के बाद उभरे मानव ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों को विश्वास और साहस के साथ, बौद्धिक, आध्यात्मिक और भौतिक उपलब्धियों को स्वीकार करने और मूल्यांकन करने के लिए बाध्य करती है।"

सन्त पापा ने स्मरण दिलाया कि मनुष्य जीवन का सेवक है उसका मालिक नहीं, इसलिये यह उचित ही है कि संस्कृति सम्बन्धी परमधर्मपीठीय परिषद की सभा मानव अस्तित्व एवं मानव की अस्मिता पर विचार विमर्श करे। उन्होंने कहा कि कलीसिया बाईबिल धर्मग्रन्थ की परम्परा में निहित समृद्धि को प्रकाशित कर अर्थ की खोज में लगी मानवता की मदद कर सकती है।

पूर्णकालिक सभा के सदस्यों से उन्होंने कहा कि बाईबिल से प्रेरणा पाकर स्त्री पुरुष के बीच तथा मनुष्य एवं ईश्वर के बीच सम्बन्धों की जटिलता को समझने का वे प्रयास करें तथा एशियाई, अफ्रीकी एवं लातीनी संस्कृतियों की "समग्र दृष्टि"  से उदाहरण लेकर पश्चिमी संस्कृति में व्याप्त अति व्यक्तिवाद की संस्कृति का सामना करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान काल द्वारा प्रस्तुत चुनौतियों का समाना करने के लिये यह अनिवार्य है कि मानव व्यक्ति में निहित मूल्यों की पुनर्खोज की जाये।   

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24 November 2021, 10:18