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संत पापाः संत योसेफ मानवीय संबंध के आदर्श

संत पापा फ्रांसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह में संत योसेफ पर अपनी धर्मशिक्षा माला देते हुए उन्हें विश्वासियों और कलीसिया का संरक्षक निरूपित किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 24 नवम्बर 2021 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर पौल षष्टम के सभागार में जमा हुए सभी विश्वासियों औऱ तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

विगत बुधवार हमने संत योसेफ के जीवन पर अपनी धर्मशिक्षा माला की शुरूआत की। हम इसे जारी रखते हुए मुक्ति विधान के इतिहास में उनकी भूमिका पर ध्यान केन्द्रित करेंगे।

सुसमाचारों में हम येसु को योसेफ बढ़ाई के पुत्र के स्वरुप पाते हैं। सुसमाचार लेखकों में संत मत्ती और संत लूकस हमें येसु के बाल्यावस्था की चर्चा करते हुए योसेफ की भूमिका का जिक्र करते हैं। दोनों वंशावली का जिक्र करते हुए हम येसु के ऐतिहासिकता की ओर प्रकाश डालते हैं। संत मत्ती अब्राहम से शुरूआत करते हुए योसेफ तक आते और उन्हें मरियम के वर स्वरुप हमारे लिए प्रस्तुत करते हैं जिनके द्वारा येसु का जन्म हुआ जो ख्रीस्त कहलाते हैं। लूकस वहीं दूसरी ओर सीधे येसु से शुरू करते हुए उन्हें योसेफ का पुत्र इंगित करते और आदम की ओर लौटे हैं। इस भांति दोनों सुसमाचार रचियता योसेफ को जैविक पिता के रुप में नहीं यद्यपि सभी रुपों में येसु को पूर्ण पिता निरूपित करते हैं। उनके द्वारा येसु इतिहास में मानव और ईश्वर के बीच स्थापित मुक्ति विधान के इतिहास को पूरा करते हैं। मत्ती इस इतिहास की शुरूआत अब्राहम से करते वहीं लूकस इसकी शुरूआत मानवता की उत्पत्ति से करते हैं।

ख्रीस्त के सेवक

मत्ती हमें योसेफ के व्यक्तित्व को समझने में मदद करते हैं यद्यपि वे जाहिर तौर पर हाशिये में, पर्दे के पीछे और गुप्त रहते हैं यद्यपि वे अपने में मुक्ति इतिहास का एक केन्द्र-बिन्दु हैं। योसेफ अपने कार्यों का निर्वाहन बिना किसी दिखावे के करते जाते हैं। संत पापा ने कहा कि  यदि हम इसके बारे में सोचें तो “हमारा जीवन साधारण लोगों से घिरा है जिन्हें बहुधा अनदेखा किया जाता है। वे समाचारों और पत्रिकाओं के अंग नहीं होते.... कितने ही माता-पिता, दादा-दादी और शिक्षकगण हैं जो अपने जीवन के द्वारा बच्चों को, छोटे रुप में इस बात की शिक्षा देते हैं कि जीवन की कठिनाइयों को कैसे स्वीकारते हुए उनका सामना करना है, कैसे प्रार्थना में बने रहते हुए जीवन में आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि कितने हैं जो अपनी प्रार्थना और त्याग के द्वारा सभों की भलाई की कामना करते हैं। इस भांति, हम सभी संत योसेफ में उन सारी चीजों को देख सकते हैं कि उनकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता, वे अपने दैनिक जीवन में अप्रसिद्ध, गुप्त रूप में बने रहते हुए कार्य करते और कठिन परिस्थितियों में सहायता करते हैं। वे हम इस बात की याद दिलाते हैं कि वे जो अपने जीवन में गुप्त रूप में कार्यशील रहते या पिछली पंतियों में होते मुक्ति इतिहास में उनकी एक अहम भूमिका होती है। दुनिया को ऐसे नर और नारियों की आवश्यकता है। 

मुक्तिदाता के संरक्षक

संत लूकस के सुसमाचार में, योसेफ येसु और मरियम के रक्षक स्वरूप प्रस्तुत किये जाते हैं। इसी कारण उन्हें कलीसिया के संरक्षक माना जाता है क्योंकि कलीसिया इतिहास में सदैव येसु ख्रीस्त का शरीर है, यहाँ तक की मरिया का मातृत्व भी कलीसिया के मातृत्व में उभर कर आती है। संत योसेफ कलीसिया को अपना संरक्षण प्रदान करते हैं वे सदैव बच्चे और उसकी माता की रक्षा करते हैं। योसेफ में संरक्षण के इस मनोभाव को हम उत्पत्ति ग्रंथ के इतिहास का एक बड़े जबाव स्वरुप पाते हैं। जब ईश्वर काईन से उसके भाई के बारे में पूछते हैं तो वह उत्तर देता है, क्या मैं अपने भाई का रखवाला हूँॽ योसेफ अपने जीवन के द्वारा, मानो वे हमें यह बतलाने की कोशिश कर रहे हैं कि हम सदैव अपने भाई-बहनों के रखवाले हैं, हम उनके संरक्षक हैं जो हमारे निकट रहते हैं, उनके संरक्षक जिन्हें ईश्वर विभिन्न परिस्थितियों में हमें सौंपते हैं।

संत पापा ने कहा कि हमारा समाज जिसे हमारे लिए “तरल” रुप में परिभाषित किया जाता है, क्योंकि इसमें कोई निरंतरता नहीं है। संत योसेफ की कहानी में हम अपने लिए स्पष्ट रूप से मानवीय बंधन के महत्व को पाते हैं। वास्तव में, सुसमाचार हमारे लिए येसु की वंशावली को प्रस्तुत करता है, जो केवल ईशशास्त्रीय कारण को प्रस्तुत नहीं करता है बल्कि यह हमें इस बात को स्पष्ट रुप में व्यक्त करता है कि हमारा जीवन एक दूसरे से जुड़ा हुआ है जो हमें आगे ले चलता है। ईश्वर का पुत्र इस मेल के कारण दुनिया में आना स्वीकार करते हैं। ईशपुत्र जादूई रुप से दुनिया में नहीं आते बल्कि वे हमारे इतिहास का अंग बनाते हैं।

पीड़ितों के संरक्षक

भाइयो और बहनो, संत पापा ने कहा कि मैं उन सारे लोगों के बारे में सोचता हूँ जो अपने जीवन के अर्थ को दूसरों के संग संयुक्त रखने में कठिनाई का अनुभव करते हैं, इसके कारण वे अपने जीवन में संघर्ष करते हैं, अकेलेपन का अनुभव करते, और वे अपने में शक्ति और साहस की कमी का एहसास करते हैं। संत पापा ने कहा कि मैं एक प्रार्थना से अंत करना चाहूँगा जिससे हम संत योसेफ को अपने लिए एक सहयोगी, मित्र और सहायक के रुप में देख सकें।

संत योसेफ, तूने मरियम और येसु के संग अपने संबंध को बनाये रखा, हमारे जीवन में संबंधों को बनाये रखने में हमारी सहायता कर।

हममें से कोई छोड़ दिये जाने का अनुभव न करें जो अकेलेपन से हमारे लिए उत्पन्न होता है। हममें से हर कोई अपने जीवन इतिहास से मेल-मिलाप कर सकें, उनके संग जो हमसे पहले गुजर गये हैं,

और हम अपनी गलतियों में भी इस बात को पहचान सकें कि उनमें हमारे लिए ईश्वर का एक साथ रहा, और बुराई के द्वारा सारी चीजें नष्ट नहीं हुई।

अपने को उनके लिए प्रकट कर जो अपने जीवन में संघर्षरत हैं, और जैसे तूने मरियम और येसु को उनके मुश्किल की घड़ियों में सहायता की, हमारी यात्रा में हमें भी सहायता कर, आमेन।

24 November 2021, 13:26