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संत पापा फ्राँसिस जर्मनी से ख्रीस्तीय एकता यात्रा पर रोम आये युवा लूथरन के एक समूह के साथ संत पापा फ्राँसिस जर्मनी से ख्रीस्तीय एकता यात्रा पर रोम आये युवा लूथरन के एक समूह के साथ  (ANSA)

संत पापा फ्राँसिस: अपने जीवन में ईश्वर के धुन को सुनें

संत पापा फ्राँसिस ने जर्मनी से ख्रीस्तीय एकता यात्रा पर रोम आये युवा लूथरन के एक समूह का स्वागत किया। संत पापा ने उन्हें अपने जीवन में हमेशा ई्श्वर के धुन को सुनने के लिए प्रेरित किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 25 अक्टूबर 2021 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के संत पापा पॉल षष्टम सभागार में जर्मनी से एकता वर्धक तीर्थयात्रा के लिए रोम आये प्रतिभागियों का सस्नेह स्वागत किया। संत पापा ने श्री लैंडेस्बिशोफ़ क्रेमर को उनके परिचय भाषण के लिए हृदय से धन्यवाद दिया।

संत पापा ने कहा, “मैं आप सभी का स्नेह के साथ अभिवादन करता हूँ जो "एक साथ बेहतर" आदर्श वाक्य के तहत तीर्थयात्रियों के रूप में रोम आए हैं। आप में से कुछ लोगों ने पांच साल पहले "लूथर के साथ संत पापा के पास"  नामक तीर्थयात्रा में भाग लिया था, हालाँकि, आज बड़ी संख्या में नए चेहरों को जोड़ा गया है।”

गायन एकजुट करता है

संत पापा ने कहा कि उन्होंने एक सामुदायिक गीत द्वारा उनका अभिनन्दन किया। “गायन एकजुट करता है। गाना बजानेवालों में कोई अकेला नहीं खड़ा होता है: दूसरों को सुनना महत्वपूर्ण है। मुझे आशा है कि यही तत्परता कलीसिया को सुनने के लिए भी है। हम इसे फिर से धर्मसभा प्रक्रिया में सीख रहे हैं।”

संत पापा ने कहा कि वे भी अपने जीवन में ईश्वर की ध्वनि की मधुरता सुनें; जिसे यहोवा ने उनके जीवन में रचा है। इसे सुनने के लिए कान ही नहीं बल्कि दिल भी खोलें। जो खुले दिल से गाता है, वह शायद यह महसूस नहीं कर पाता कि वह पहले से ही ईश्वर के रहस्य को छू लिया है। यह रहस्य प्रेम है, वह प्रेम जो येसु मसीह में अपनी शानदार, पूर्ण और अनोखा ध्वनि पाता है।

आगे संत पापा ने कहा कि वे अपने जीवन में हमेशा ई्श्वर के राग को सुनें। अनेक स्वरों से एक गीत का निर्माण होता है। जर्मनी में और दुनिया के कई अन्य हिस्सों में भी ख्रीस्तीय एकता ऐसा ही है।

ख्रीस्तीय एकता तीर्थयात्रा के क्वायर के साथ संत पापा
ख्रीस्तीय एकता तीर्थयात्रा के क्वायर के साथ संत पापा

"लूथर के साथ संत पापा के पास"

2021 की ख्रीस्तीय एकता तीर्थयात्रा का आदर्श वाक्य "लूथर से रोम तक" है और इसका उद्देश्य तीर्थयात्रियों को रोम और उनके विश्वास को एक नए दृष्टिकोण से जानने में मदद करना है। यह उन तत्वों पर केंद्रित है जो ख्रीस्तियों को एकजुट करते हैं, वे बाधाएं जो एकता की यात्रा में पहले से ही दूर हो चुकी हैं और उन चुनौतियों का जिन्हें अभी भी सामना करना होगा।

यह समूह दूसरी बार रोम आया है, 2016 में संत पापा फ्राँसिस के साथ समूह की बैठक हुई थी। उस अवसर पर, संत पापा फ्राँसिस ने तीर्थयात्रियों को "दया के साक्षी" होने और एक दूसरे को अच्छी तरह से जानने, प्रार्थना करने और एक दूसरे की एवं जरूरतमंदों की मदद करने हेतु आमंत्रित किया था।

2021 की तीर्थयात्रा, जो 23 से 30 अक्टूबर तक है, सैक्सोनी एनहाल्ट के क्षेत्र के ख्रीस्तीय समुदायों द्वारा समर्थित है, जिसमें मैगडेबर्ग धर्मप्रांत, एन्हाल्ट के इवांजेलिकल कलीसिया और मध्य जर्मनी की इवांजेलिकल कलीसिया शामिल हैं।

25 October 2021, 15:27