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संत पापाः आकर्षित और परिवर्तन की शक्ति है प्रेम

संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह गलातियों के नाम संत पौलुस के पत्र पर धर्मशिक्षा माला जारी रखते हुए ईश्वर की खोज करने का आह्वान किया, साथ ही उन्होंने पवित्र आत्मा के वरदानों की चर्चा की।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 27 अक्टूबर 2021 (रेई)  संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पापा पौल षष्टम के सभागार में एकत्रित हुए सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

संत पौलुस के प्रवचन का केन्द्र-बिन्दु पूर्णरूपेण येसु और उनके पास्का रहस्य में आधारित है। वास्तव में, प्रेरित येसु ख्रीस्त उनके क्रूसमरण और पुनरूत्थान का एक साक्ष्य घोषित करते हैं। वे गलातियों को इस बात की याद दिलाते हैं कि उनकी मुक्ति और विश्वास का आधार येसु ख्रीस्त की मृत्यु और पुनरूत्थान है क्योंकि वे इस परीक्षा में पड़ गये थे कि उनकी धार्मिकता का आधार संहिता के नियमों और परंपराओं का अनुपालन करना है। वे क्रूस की सच्चाई को उनके सामने रखते हुए इस तथ्य को व्यक्त करते हैं। वे लिखते हैं, “किसने आप लोगों पर जादू डाला हैॽ आप लोगों को तो सुस्पष्ट रूप से यह दिखलाया गया कि ईसा मसीह क्रूस पर आरोपित किये गये थे (गला.3.1)।

ईश्वर की खोज का आह्वान

संत पापा ने कहा कि आज भी बहुत से लोग हैं जो जीवित ईश्वर की खोज करने के बदले अपने लिए धार्मिक सुरक्षा की खोज करते हैं जिसके अनुरूप वे धार्मिक क्रिया-कलापों और संहिता में अधिक ध्यान देते हैं जबकि उन्हें पूरी तरह से ईश्वरीय प्रेम का आलिंगन करने की जरुरत है। यही कारण है कि संत पौलुस गलातियों को जीवन के आधार ईश्वर की ओर लौटने को कहते हैं जो क्रूसित येसु में हमें जीवन देते हैं। संत पापा ने जोर देते हुए कहा कि हम ईश्वर की ओर लौटें न कि ईश्वर की निश्चितता प्रदान करने वालीं चीजों की ओर। संत पौलुस व्यक्तिगत रुप में अपना साक्ष्य देते हुए कहते हैं, “मैं मसीह के साथ क्रूस पर मर गया हूँ। मैं अब जीवित नहीं रहा, बल्कि मसीह मुझ में जीवित हैं” (गला.2.20)। अपने इस पत्र के अंत में वे इस बात को सुस्पष्ट करते हुए कहते हैं, “मैं केवल हमारे प्रभु ईसा मसीह के क्रूस पर गर्व करता हूँ” (गला.6.14)।

संत पौलुस का सुझाव

संत पापा ने कहा कि यदि हम आध्यात्मिक जीवन के ताने-बाने को खो देते, यदि हमारे जीवन में हजारों तकलीफें और विचारों का सैलाब आता है तो हम संत पौलुस के सुझाव की ओर ध्यान दें, हम अपने को क्रूसित येसु के सामने रखें, हम पुनः उनमें अपने जीवन की शुरूआत करें। हम क्रूस को अपने हाथों में लेते हुए उसे अपने हृदय के निकट लायें। या हम कुछ समय के लिए पवित्र परमप्रसाद की आराधना कर सकते हैं जहाँ हम येसु को रोटी के रूप में पाते जो अपने को तोड़ते, क्रूसित और पुर्जीवित होते हैं, वे ईश्वर की शक्ति हैं जो प्रेम के रुप में हमारे हृदयों में उढ़ेले जाते हैं।

पवित्र आत्मा हमें बदलते हैं

संत पौलुस के द्वारा निर्देशित हम आगे और एक कदम चलें। हम अपने आप में पूछें, “क्या होता है जब हम क्रूसित येसु को अपनी प्रार्थना में मिलते हैंॽ वही चीज जो क्रूस के नीचे हुआ, येसु ने अपनी आत्मा को हमें प्रदान किया (यो.19.30) अर्थात वे हमें अपना जीवन देते हैं। और पवित्र आत्मा जो येसु ख्रीस्त के पास्का रहस्य से हमारे लिए प्रवाहित होता है हमारे आध्यात्मिक जीवन का स्रोत बनते हैं। वे हृदयों को परिवर्तित करते हैं, न कि हमारे कार्यों को। वे हमारे हृदय को बदलते हैं न कि हमारे कार्यों को जिन्हें हम करते हैं, पवित्र आत्मा का कार्य हमारे हृदय को बदलता है। वे कलीसिया को निर्देशित करते हैं और हम उनके प्रति आज्ञाकारी बने रहते हुए उनके कार्यों को करने हेतु बुलाये जाते हैं, वे जहां चाहते हमें ले चलते हैं। इससे भी बढ़कर, हम विशेष रुप में पवित्र आत्मा को सभों के ऊपर में उतरा हुआ पाते हैं जो बिना किसी पक्षपात के कृपा स्वरूप सभों में क्रियाशील होते हैं, यह कुछ प्रेरितों को जो अपने में सबसे अनिच्छुक थे उन्हें भी इस बात के लिए विश्वस्त करते हैं कि सुसमाचार सभों के लिए है न कि कुछेक चुने हुए लोगों के लिए ही। इस भांति, सामुदायिक जीवन का पुनर्जन्म होता है, यह सदैव होता है, हम ईश्वर के प्रति अपनी कृतज्ञता के भाव अर्पित करते हैं जो हमारे ख्रीस्तीय जीवन को पोषित करते जिनकी बदौलत हम अपनी आध्यात्मिक लड़ाई में बने रहते हैं।

आध्यात्मिक संघर्ष की शिक्षा

संत पापा ने कहा कि गलातियों के नाम पत्र आध्यात्मिक संघर्ष की एक महत्वपूर्ण शिक्षा को प्रस्तुत करता है। प्रेरित हमारे लिए दो विरोधाभाव, एक ओर “शरीर के कार्यों” तो दूसरी ओर “पवित्र आत्मा के फल” को प्रस्तुत करते हैं। शरीर के कार्य क्या हैंॽ वे ईश्वर की आत्मा के विरूद्ध व्यवहार करते हैं। प्रेरित उन्हें शरीर के कार्य इसलिए नहीं कहते क्योंकि वे मानव शरीर के बारे में गलत या बुरे हैं बल्कि इसलिए क्योंकि उन्होंने मानव शरीर की यर्थाता पर जोर दिया है जिसे येसु ने क्रूस पर अर्पित किया। शरीर एक शब्द है जो पृथ्वी पर मानव के भौतिक आयाम को व्यक्त करता है, जो एक क्षैतिज अस्तित्व में, व्यक्तिगत स्वार्थ से संचालित होता है, वह दुनियावी मनोभावनाओं का अनुसरण करता और पवित्र आत्मा के लिए अपने द्वार को बंद कर देता है जो हमें ऊपर की उठाते हुए ईश्वर और दूसरों के लिए हमें खोलते हैं। शरीर हमें इस बात की भी याद दिलाती है सभी चीजें पुरानी, सूखी और खत्म हो जाती हैं वहीं आत्मा हमें जीवन प्रदान करते हैं। अतः संत पौलुस शरीर के कार्यों की सूची प्रस्तुत करते हैं जो स्वार्थ में वासना, मूर्ति पूजा द्वारा जादुई अभ्यास जिनके कारण दूसरों के संग हमारे व्यक्तिगत संबंध में कमजोरी उत्पन्न होती है, जैसे कि शत्रुता, ईर्ष्या, क्रोध, विभाजन, मनमुटाव, द्वेष इत्यादि (गला.5.19-21)। ये सारी चीजें शरीर के फल हैं, केवल “मानवीय” शरीर के व्यवहार, जो मानवीय बीमारी को व्यक्त करता है क्योंकि एक मानव की अपनी इच्छाएं हैं।  

व्यक्ति की परख

वहीं पवित्र आत्मा के फल हमारे लिए प्रेम, खुशी, शांति धैर्य, मिलनसारी, दयालुता, ईमानदारी, सौम्यता और संयम है (गला.5.22-23)। ख्रीस्तीय जिन्होंने बपतिस्मा ग्रहण किया है अपने में येसु ख्रीस्त को धारण करते हैं (गला.3.27) जो इन गुणओं को जीने हेतु बुलाये जाते हैं। संत पौलुस के द्वारा वर्णित गुणों की सूची को पढ़ते हुए अपने व्यवहार की परख करना हमारे लिए एक अच्छा आध्यात्मिक कार्य होगा, क्या हम उन गुणों में खरा उतरते हैं, क्या हम पवित्र आत्मा के अनुरूप सच्चा जीवन व्यतीत करते हैं, क्या हम उन फलों को उत्पन्न कर रहे हैं। उदाहरण के लिए पहले तीन गुण प्रेम, शांति और खुशी को हम एक व्यक्ति में देख सकते हैं जिसमें पवित्र आत्मा निवास करते हैं।  

प्रेम, परिवर्तन की शक्ति

संत पापा ने कहा प्रेरित की शिक्षा हमारे समुदायों के लिए भी एक चुनौती प्रदान करती है। कभी-कभी, वे जो कलीसिया में आते यह अनुभव करते हैं कि कलीसिया बहुत से नियमों और कानूनों से बनी है, लेकिन ऐसा नहीं है। येसु ख्रीस्त में विश्वास की सुन्दरता बहुत सारे नियमों के आधार पर समझी नहीं जा सकती है जिसे हमने विभिन्न स्तरों पर विकसित किया है जिसके फलस्वरूप हम प्रेम के वास्ताविक फल को भूल जाते हैं जो प्रार्थना से उत्प्रेरित होता जहाँ से शांति और खुशी साक्ष्य के रुप में प्रवाहित होती है। उसी भांति, जीवन का आत्मा संस्कारों में व्यक्त होता है जिसका गलाघोंटा नहीं जा सकता है जो बहुधा अधिकारी-वर्ग के द्वारा होता है जो हृदय परिवर्तन करने वाले पवित्र आत्मा की कृपा हेतु रोक लगाते हैं। हमारी बड़ी जिम्मेदारी बनती है कि हम पवित्र आत्मा के प्रेमपूर्ण सांस से प्रेरित होकर क्रूसित और पुनर्जीवित येसु की घोषणा करें। यह केवल प्रेम है जो दूसरों को आकर्षित करने और मानव हृदय को परिवर्तित करने की शक्ति अपने में धारण करता है।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्रांसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभों के संग हेतु पिता हमारे प्रार्थना का पाठ करते हुए सभों को अपने प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया। 

संत पापा
27 October 2021, 15:53