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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (AFP or licensors)

पोप की हंगरी व स्लोवाकिया यात्रा "आध्यात्मिक यात्रा" होगी

वाटिकन प्रेस कार्यालय के निदेशक, मत्तेओ ब्रूनी,संत पापा फ्राँसिस की 34वीं प्रेरितिक यात्रा प्रस्तुत करते हैं, जो 12-15 सितम्बर से हो रही है। उन्होंने गौर किया कि बुडापेस्ट की उनकी यात्रा "पावन संस्कार के सम्मान में एक तीर्थयात्रा" होगी। संत पापा स्लोवाकिया के लोगों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अधिनायकवाद से घायल लोगों को गले लगाएंगे।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार 10 सितम्बर 2021 (वाटिकन न्यूज) : संत पाप फ्रांसिस की 34वीं विदेश यात्रा, जो दुनिया भर के 54 देशों की यात्रा को भी चिह्नित करती है, का उद्देश्य "यूरोप के केंद्र की तीर्थयात्रा है, जिसके दौरान संत पापा उन मुद्दों को संबोधित करेंगे जो पूरे महाद्वीप को प्रभावित करते हैं।" लेकिन इन सबसे ऊपर, यह उनकी "एक आध्यात्मिक यात्रा" है, जो यूखारिस्त की आराधना के साथ शुरू होता है और दुखों की माता मरियम के पास प्रार्थनापूर्ण आह्वान के साथ समाप्त होता है, जिसने इस शताब्दी में स्लाव भूमि को अधिनायकवाद से घायल होते देखा है। इन्ही कुछ विचारों के साथ, वाटिकन प्रवक्ता मत्तेओ ब्रूनी ने संत पापा फ्राँसिस के 12 से 15 सितम्बर तक उन चार दिनों का सार प्रस्तुत करते हैं।  बुडापेस्ट में संत पापा फ्राँसिस अंतर्राष्ट्रीय यूखरीस्तीय सम्मेलन के समापन का समारोही मिस्सा बलिदान का अनष्ठान करेंगे और फिर स्लोवाकिया की राजधानी, ब्रातिस्लावा और तीन अन्य शहर प्रेसोव, कोसिचे और सॉस्टिन का दौरा करेंगे।

हंगेरियन अधिकारियों के साथ बैठक

वाटिकन प्रेस कार्यालय में एकत्रित पत्रकारों दवारा अधिकारियों के साथ संत पापा की बैठक पर विशेष रूप से केंद्रित प्रश्न के जवाब में, ब्रूनी ने कहा, "यात्रा का उद्देश्य आध्यात्मिक है। परंतु रविवार की सुबह, हीरोज स्क्वायर में पवित्र मिस्सा से पहले संत पापा फ्राँसिस विशेष रूप से हंगरी के प्रधान मंत्री विक्टर ओर्बन और देश के सर्वोच्च अधिकारियों के साथ एक बैठक करेंगे। संत पापा के मिस्सा समारोह में अपने परिवार के साथ प्रधान मंत्री की उपस्थित रहेंगे, परंतु हंगेरियन अधिकारियों द्वारा इसकी पुष्टि की जाएगी।"

पावन संस्कार के आदर में तीर्थयात्रा

"यह पावन संस्कार के सम्मान में एक तीर्थयात्रा है", वाटिकन के प्रवक्ता ने टिप्पणी की, यह याद करते हुए कि इस यात्रा की उत्पत्ति का पता उन सैकड़ों पुरुषों और महिलाओं के करीब रहने की संत पापा की दिली तमन्ना से लगाया जा सकता है, जो पिछले रविवार से, यूखरस्तीय सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। संत पापा फ्राँसिस यखरीस्तीय सम्मेलन के समापन मिस्सा समारोह का अनुष्ठान करना चाहते थे। जिसे ‘स्तातियो ऑर्बिस’ कहा जाता है क्योंकि यह पूरी दुनिया के ख्रीस्तियों को "काल्पनिक रूप से और आत्मा में" एक साथ लाता है।

संत पापा जॉन पॉल द्वितीय की यात्राएं

ब्रूनी ने कहा,"हंगरी ने फिर से स्लोवाकिया के लिए अपना दरवाजा खोल दिया है।" संत पापा ने खुद मार्च में इराक की प्रेरितिक यात्रा से अपनी वापसी की उड़ान पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि उन्हें उनके एक सहयोगी ने बुडापेस्ट से ब्रातिस्लावा जाने की सलाह दी थी, जो "कार से दो घंटे की दूरी पर" है। एक छोटा काल्पनिक चरण जो अब मध्य और पूर्वी यूरोप के इस क्षेत्र के मुख्य शहरों का दौरा बहत्तर घंटे की यात्रा में बदल गया। इन स्थानों का दौरा संत पापा जॉन पॉल द्वितीय 1990,1995, और,अपनी मृत्यु से ठीक दो साल पहले 2003 में तीन यात्राओं के दौरान कर चुके थे।

शहादत की कहानियां

शहादत की कहानियों की पृष्ठभूमि में तथाकथित स्लोवाकिया की कलीसिया के स्तंभों के रुप में हंगेरियन कार्डिनल जोज़सेफ माइंड्सजेंटी और स्लोवाकिया के कार्डिनल जान क्राइज़ोस्टोम कोरेक के चेहरे सामने आते हैं। संत पापा सुसमाचार प्रचार और कलीसिया के भविष्य मिशन को ध्यान में रखते हुए युवा लोगों  के साथ और फिर अन्य ख्रीस्तीय संप्रदायों और अन्य धर्मों के प्रतिनिधियों के साथ मिलना चाहते हैं। इन चार दिनों में वे सात भाषण, तीन उपदेश, एक अभिवादन और एक देवदूत प्रार्थना के दौरान विशवासियों को इतालवी भाषा में संबोधित करेंगे।

ख्रीस्तीय एकता वर्धक और अंतर्धार्मिक संवाद

ब्रूनी ने कहा, "पीड़ा और शहादत ने लोगों को एकजुट किया है, लेकिन अलग-अलग ख्रीस्तीय संप्रदायों में भी विभाजित किया है, यही वजह है कि ख्रीस्तीय एकता वर्धक बैठकें महत्वपूर्ण हैं।" दो ख्रीस्तीय एकता वर्धक सभा पहले दिन, रविवार, 12 सितंबर को आयोजित की जाएगी: पहला-रविवार सुबह को बुडापेस्ट के ललित कला संग्रहालय में ख्रीस्तीय एकता वर्धक परिषद के प्रतिनिधियों के साथ और दूसरा, दोपहर को ब्रातिस्लावा में।

वाटिकन प्रवक्ता ने कहा कि संत पापा का यहूदी समुदायों से मिलना भी बहुत महत्वपूर्ण है वे नाजी शासन के निर्वासन से पीड़ित पीड़ा के एक लंबे इतिहास के उत्तराधिकारी भी हैं, जिसने एक ऐसे समुदाय को कम कर दिया जो प्रथम युद्ध से पहले 136, 000 से 200,000 सदस्यों की संख्या में थे। इनमें से 15,000 यहूदी 1940 तक ब्रातिस्लावा में रहते थे जिनमें मात्र 3,500 बच गए थे, जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपनी स्थापत्य विरासत को नष्ट होते देखा और उदासीनता और शत्रुता का सामना किया। 1989 में साम्यवाद के पतन के बाद केवल राजनीतिक परिवर्तनों के कारण यहूदी जीवन का पुनर्जन्म हुआ। जिस समुदाय से संत पापा 13 सितंबर को राइबने नेमेस्टी स्क्वायर में मिलेंगे, जहां एक होलोकॉस्ट स्मारक है, वास्तव में, धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाला एक बहुत ही सक्रिय समुदाय है।

एंटी-कोविड प्रतिबंध

ब्रूनी ने स्पष्ट किया कि अनौपचारिक आंकड़ों के अनुसार, स्लोवाकिया में प्रति दिन कोविद-19 संक्रमण के 200 मामले आ रहे हैं। अतः संत पापा के समारोहों में भाग लेने के लिए ग्रीन पास की जरुरत होगी। "ये स्थानीय अधिकारियों द्वारा लिए गए निर्णय हैं, मैं कल्पना कर सकता हूँ कि उन्होंने सभी आवश्यक उपाय किया है।"

10 September 2021, 16:45