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संत पापा फ्रांसिस आमदर्शन समारोह में संत पापा फ्रांसिस आमदर्शन समारोह में  (AFP or licensors)

बपतिस्मा का सारः येसु में हम ईश्वरीय संतान

संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह में कलीसिया में हमारे बपतिस्मा के सार को स्पष्ट किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 08 सितम्बर, 2021 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमर्दशन समारोह के अवसर पर संत पापा पौल षष्टम के सभागार में जमा हुए सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

हम गलातियों के नाम संत पौलुस के पत्र से आलोकित अपने विश्वास की यात्रा को और मजूबत बनायें। प्रेरित उन ख्रीस्तियों के लिए इस बात पर जोर देते हैं कि वे ईश्वर से मिली मुक्ति के रहस्य को जो उनके लिए घोषित किया गया है न भूलें। वे सुसमाचार लेखक संत योहन की बातों से शत प्रतिशत सहमत होते हुए (1 यो. 3.1-2) इस बात पर जोर देते हैं कि येसु ख्रीस्त में हमारे विश्वास ने हमें सही अर्थ में ईश्वरीय संतान और उत्तराधिकारी बनाया है। ख्रीस्तियों के रुप में हम बहुधा इस सच्चाई को सहज ही लेते हैं। बल्कि, हमें कृतज्ञतापूर्ण भाव से इस बात को याद करने की जरुरत है जब हम बपतिस्मा में इस कृपा के भादीगार बनें, जिससे हम अपनी इस कृपा को अधिक चेतना में जीने के योग्य बन सकें, जो हमें मिला है। संत पापा ने कहा कि मैं विश्वास करता हूँ हम सभी अपने बपतिस्मा की तिथि को जानते हैं हमें उस दिन मुक्ति मिली और हम ईश्वर की संतान बनें। उन्होंने कहा,“आप जो अपने बपतिस्मा की तारीख को नहीं जानते अपने दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची से इसके बारे में पूछ सकते हैं, मेरा बपतिस्मा कब हुआ है? और उस दिन की याद हर साल करें, क्योंकि यह वही दिन है जब हम ईश्वर की संतान बनें।”

विश्वास विभिन्नता का आधार

वास्तव में, येसु ख्रीस्त के द्वारा मिले विश्वास में हम ईश्वर की दिव्य संतान बन गये हैं। संत पौलुस जिसे संतति होने की बात कहते हैं जो सृष्टिकर्ता के साधारण पुत्र-पुत्रियाँ होने से भिन्न है। वे विश्वास पर जोर देते हैं जो हमें येसु ख्रीस्त में ईश्वर की संतान बनाता है(26)। “येसु ख्रीस्त” में विश्वास हमारी विभिन्नता का आधार है। हर नर और नारी ईश्वर की संतान है चाहे वह किसी भी धर्म का हो, लेकिन “येसु ख्रीस्त” में हमारा विश्वास ख्रीस्तियों के रुप में हमें एक विशेष पहचान प्रदान करता है और यह केवल ख्रीस्त के मुक्ति-विधान में सहभागी होने और हमारे बपतिस्मा संस्कार में शुरू होता है। येसु हमारे भाई बनते और उनकी मृत्यु और पुनरूत्थान में हमारा मेल-मिलाप पिता ईश्वर से होता है। जो कोई विश्वास में येसु को स्वीकार करता है वह “ख्रीस्त” को धारण करता और बपतिस्मा द्वारा ईश्वरीय संतति बनता है(27)।

बपतिस्मा बाह्य धर्मविधि मात्र नहीं

अपने पत्रों में संत पौलुस बपतिस्मा का जिक्र कई बार करते हैं। उनके लिए बपतिस्मा ग्रहण करना येसु के रहस्य में प्रभावकारी ढ़ग से सहभागी होना था। उदाहरण के लिए रोमियों के नाम अपने पत्र में उस बात की चर्चा करते हैं कि बपतिस्मा के द्वारा हम येसु के संग मरकर दफनाये गऐ और उनके संग जी उठे हैं (रोमि.6.3-14)। अतः बपतिस्मा केवल बाह्य धर्मविधि नहीं है। वे जो बपतिस्मा ग्रहण करते उनका आंतरिक रूपांतरण होता है, वे नया जीवन धारण करते हैं जो उन्हें ईश्वर की ओर अभिमुख करता और वे उन्हें “अब्बा, पिता” कहने के योग्य बनते हैं (गला4:6)।

बपतिस्मा द्वारा सभी बराबर हैं

प्रेरित बपतिस्मा में प्राप्त पहचान नई को दृढ़तापूर्वक सुस्पष्ट करते हैं जो जातीय-धार्मिक स्तर पर मौजूद मतभेदों पर हावी होता हैः “अब न तो कोई यहूदी है और न यूनानी, न तो कोई दास है और न स्वतंत्र, न तो कोई पुरूष है और न स्त्री”(गला.3.28)। हम इन अभिव्यक्तियों को, इसमें निहित गूढ़ मूल्यों को समझे बिना अति शीघ्रता से पढ़ते हैं। संत पौलुस के लिए गलातियों के पत्र में यह लिखना कि येसु ख्रीस्त में “कोई यहूदी और यूनानी नहीं” जातीय-धार्मिक क्षेत्र में एक प्रामाणिक स्थिति को खत्म करने के बराबर था। चुनी हुई प्रजा के रूप में अपने को देखना यहूदियों को गैर-यहूदियों से ऊपर रखता था (रोम.2.17-20)। प्रेरित स्वयं इसके बारे में दृढ़ता से कहते हैं (रोम.9.4-5)। अतः प्रेरित के द्वारा दी जाने वाली नई शिक्षा स्वयं विधर्मिक जान पड़ती है। हम सभी बराबर कैसे हो सकते हैं, हममें विभिन्नाताएं हैं। “दास” और “स्वतंत्रों” के बीच बराबरी का तर्क भी अपने में एक चौंकाने वाला दृष्टिकोण था। प्राचीन समाज में दासों और स्वतंत्र नागरिकों के बीच का अंतर अपने में विशिष्ट था। कानूनों के आधार पर स्वतंत्र नागिरक अपने सभी अधिकारों का लाभ उठाते थे जबकि गुलाम, दासों को मानवीय सम्मान का दर्जा भी नहीं मिलता था। आज भी ऐसा होता है: दुनिया में लाखों हैं जिन्हें खाने का अधिकार नहीं है, शिक्षा का अधिकार नहीं है, काम करने का अधिकार नहीं है: वे नए गुलाम हैं, वे हाशिए पर हैं, जिनका शोषण किया जाता है। आज भी गुलामी है, हम इस पर थोड़ा विचार करें। हम इन लोगों को मानवीय सम्मान से वंचित करते हैं। इस भांति येसु ख्रीस्त में हम सामाजिक, लिंग भेदभाव, नर और नारी में अंतर को स्थापित होता पाते हैं जिसे हमें आज भी दृढ़तापूर्वक घोषित करने की आवश्यकता है। आज भी हमें इस बात को पुष्ट करने की आवश्यकता है। संत पापा ने कहा कि कितनी परिस्थितियों में हम महिलाओं को तुच्छ समझते हैं। “कितनी बार हमने यह सुना है, कुछ मत करो, वे महिलाओं के कार्य करने की चीजें हैं”। नर और नारी एक समान हैं लेकिन इतिहास में आज भी नारियाँ गुलाम हैं, नारियों को पुरुषों के बराबर मौके नहीं मिलते हैं। संत पापा ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि हमें पौलुस की बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है, हम येसु मसीह में बराबर हैं।

संत पौलुस इस बात को दृढ़ता से प्रस्तुत करते हैं कि बपतिस्मा प्राप्त लोगों के रुप में, चाहे हम किसी भी परिस्थिति में हो, हम सभी एक समान हैं क्योंकि येसु ख्रीस्त में हम एक नये प्राणी बन गये हैं। ईश्वरीय संतान के रुप में हमारी सभी विभिन्नताएं गौण हो जाती हैं क्योंकि येसु ख्रीस्त में मिली मुक्ति और बपतिस्मा के फलस्वरूप हम उनकी एक संतान बन गये हैं।

ईश्वरीय संतान की सुंदरता खोजे

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि हम सकारात्मक रुप में एक नये जीवन जीने हेतु बुलाये जाते हैं जो हमें मूलरुप में येसु ख्रीस्त में ईश्वरीय संतान बनाता है। हम सभों को आज ईश्वरीय संतान होने की सुन्दरता को खोजने की आवश्यकता है क्योंकि हम सभी भाई-बहनों के रुप में ख्रीस्त से संयुक्त हैं। ख्रीस्त विश्वसियों के रुप में हमारे बीच भेदभाव नहीं होना चाहिए। प्रेरित संत याकूब अपने पत्र में कहते हैं कि हम धनी और गरीब के बीच भेदभाव न करें क्योंकि हम सभी बराबर हैं। हमारी बुलाहट संपूर्ण मानव जाति की एकता को ठोस रूप में व्यक्त करते हुए उसे स्पष्ट करना है (वाटिकन द्वितीय महासभा, लुमेन जेनसियुम,1)। सारी चीजें जो लोगों के बीच मतभेदों को बढ़ाते हैं, भेदभाव का कारण बनते – ईश्वर के समाने उनका कुछ भी अर्थ नहीं है, हम ईश्वर के प्रति कृतज्ञता के भाव प्रकट करते हैं जिन्हेंने येसु ख्रीस्त में हमारा उद्धार किया है। हमारे लिए महत्वपूर्ण विश्वास है जिसके अनुरूप पवित्र आत्मा हमारा मार्ग प्रशस्त करते हैं। हमारा उत्तदायित्व यह है कि हम इस पथ पर निर्णायक रूप से एकता में आगे बढ़ते जायें। 

08 September 2021, 15:07