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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस   (AFP or licensors)

देवदूत प्रार्थना ˸ हृदय की चंगाई सुनने से शुरू होती है

संत पापा फ्राँसिस ने रविवार को देवदूत प्रार्थना के दौरान अपने चिंतन में सुसमाचार पाठ की उस घटना की याद की जिसमें येसु एक बहरे गूँगे को चंगा करते हैं। उन्होंने आंतरिक बहरेपन से चंगाई पाने हेतु प्रार्थना करने का प्रोत्साहन दिया क्योंकि हृदय की चंगाई सुनने की क्षमता से शुरू होती है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार, 5 सितम्बर 2021 (रेई)- वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 5 सितम्बर को संत पापा फ्रांसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

आज की धर्मविधि का सुसमाचार पाठ येसु को प्रस्तुत करता है जो एक बहरे-गूँगे को चंगा करते हैं। इस कहानी में प्रभावित करनेवाली बात है कि येसु किस तरह चमत्कार का कार्य करते हैं ˸ वे बहरे –गूँगे को भीड़ से अलग एकांत में लेकर उसके कान में अंगूली डालते और उसकी जीभ पर अपनी थूक लगाते हैं। उसके बाद वे आकाश की ओर आँख उठाते एवं आह भरकर कहते हैं, "एफेता" अर्थात् खुल जा। (मार. 7,33-34)

आंतरिक बहरेपन से चंगाई

दूसरी चंगाईयों में लकवा या कोढ़ जैसी गंभीर दुर्बलताओं के लिए, येसु अधिक चिन्हों का प्रयोग नहीं करते हैं। तो इस बार वे क्यों इन सभी चीजों को करते हैं जबकि उन्हें सिर्फ रोगी के सिर पर हाथ रखने को कहा था? (पद. 32)

शायद इसलिए कि उस व्यक्ति की स्थिति का एक विशेष प्रतीकात्मक मूल्य है। बहरा और गूंगा होना एक बीमारी है, लेकिन यह एक प्रतीक भी है। यह हम सभी से कुछ कह रहा है। यह क्या हो सकता है? यह बहरापन है। वह व्यक्ति बात नहीं कर पा रहा था क्योंकि वह सुन नहीं पाता था। येसु उसकी बीमारी को ठीक करने के लिए अपनी अंगुली उसके काम में, उसके बाद मुँह में रखते हैं। गौर करनेवाली बात है कि येसु पहले कान का स्पर्श करते हैं।  संत पापा ने कहा, "हम सभी के कान हैं किन्तु हम कई बार नहीं सुन पाते हैं। क्यों?

सुनने की क्षमता

उन्होंने कहा, "भाइयो एवं बहनो, एक आंतरिक बहरापन है जिसका स्पर्श करने एवं उसे चंगा करने के लिए आज हम येसु से प्रार्थना करें। यह बहरापन शारीरिक बहरेपन से अधिक खतरनाक है क्योंकि यह हृदय का बहरापन है। हमें जल्दी में, हजारों चीजें बोलना और करना है जिसके कारण हम रूकने और सुनने के लिए समय नहीं पाते हैं कि कौन हमसे बोल रहे हैं। इस तरह हम सब कुछ के लिए बहरे बन जाने की जोखिम उठाते हैं और उन लोगों को स्थान नहीं दे पाते हैं जिन्हें सुना जाना है।

मौन रहें और प्रभु को सुनें

संत पापा ने कहा, "मैं उन बच्चों, युवाओं, बुजूर्गों और बहुत सारे लोगों के बारे सोच रहा हूँ जिन्हें बात करने एवं उपदेश की अपेक्षा सुने जाने की जरूरत है। हम अपने आप से सवाल करें, मैं किस तरह सुनता हूँ? क्या मैं लोगों के जीवन से प्रभावित होता हूँ? क्या मैं दूसरों को सुनने के लिए समय देता हूँ? यह हम सभी के लिए है लेकिन खासकर, पुरोहितों के लिए है। पुरोहितों को चाहिए कि वे लोगों को सुनें, न हड़बड़ायें। सुनें और देखें कि किस तरह उनकी मदद करनी है। हम सभी को पहले सुनना और जवाब देना है। पारिवारिक जीवन पर गौर करें ˸ कई बार हम बिना सुने बात करते हैं। हम जो कह चुके होते हैं उसी को दुहराते रहते हैं, कई बार विवादों की शुरूआत बात करने से नहीं बल्कि चुप रहने से होती है, आग्रह नहीं करने, दूसरों को आधा सुनने, उनके संघर्षों को नहीं सुनने आदि से होती है जो व्यक्ति को अंदर बंद कर देता है। हृदय की चंगाई सुनने से होती है। यह हृदय को स्वस्थ करता है।

हम प्रभु के लिए खुले रहें

प्रभु के साथ भी यही बात है। उन्हें हम कई प्रकार के निवेदन से भर देते हैं किन्तु हमारे लिए बेहतर यही है कि हम पहले उन्हें सुनें। येसु हमसे इसकी मांग करते हैं।  सुसमाचार में जब लोग उनसे पूछते हैं कि पहली आज्ञा क्या है तब प्रभु कहते हैं ˸ इस्राएल सुनो...अपने प्रभु ईश्वर को अपने सारे हृदय, अपनी सारी आत्मा, अपनी सारी बुद्धि और अपनी सारी शक्ति से प्यार करो। (मार. 12,28-31) सबसे बढ़कर वे कहते हैं, सुनो। संत पापा ने कहा, "क्या हम प्रभु को सुनने की कोशिश करते हैं? हम ख्रीस्तीय हैं किन्तु शायद हर दिन हजारों शब्दों के बीच सुसमाचार के शब्दों को सुनने के लिए जरा भी समय नहीं पाते हैं। येसु शब्द हैं, यदि हम उन्हें सुनने के लिए नहीं रूकेंगे तो वे आगे बढ़ जायेंगे।" संत अगुस्टीन करते थे, "मुझे डर है कि प्रभु कहीं पार न हो जाएँ।" यह उन्हें बिना सुने पार होने देने का डर है। किन्तु यदि हम सुसमाचार के लिए समय देंगे, तब हम अपने आध्यात्मिक स्वास्थ्य का राज पायेंगे। यही दवाई है कि हम हर दिन कुछ समय मौन रहें और सुनें। व्यर्थ की बातों को कम करें और ईश्वर की बातों पर अधिक समय दें। संत पापा ने पुनः याद दिलाया, "अपने पास हमेशा सुसमाचार की प्रति रखें जो आपको काफी मदद देगा। हम अपने आपको पुकारे जाते हुए सुनें जैसा कि हमने बपतिस्मा के दिन येसु के शब्दों को सुना था ˸ एफेता, खुल जा। अपना कान खोलें, येसु मैं तेरे वचन के लिए अपने आपको खोलना चाहता हूँ। आपको सुनना चाहता हूँ, मुझे बंद होने से चंगा कीजये, मुझे घृणा से चंगा कीजये और मुझे अधीरता से चंगा कीजिए।

धन्य कुँवारी मरियम जो शब्द के लिए खुली थी जिसने उनमें शरीरधारण किया, हमें हर दिन सुसमाचार में और हमारे भाई-बहनों के प्रति खुले होकर, धर्यशील एवं सक्रिय हृदय से उनके पुत्र को सुनने में सहायता दे।  

इतना कहने के बाद, संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थन का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के दौरान संत पापा फ्रांसिस का संदेश

 

05 September 2021, 15:12