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युवाओं के लिए वार्षिक अंतरराष्ट्रीय प्रार्थना उत्सव युवाओं के लिए वार्षिक अंतरराष्ट्रीय प्रार्थना उत्सव  

मेजोगोरी में युवाओं से पोप ˸ साहस के साथ ख्रीस्त का अनुकरण करें

संत पापा फ्राँसिस ने युवाओं के लिए वार्षिक अंतरराष्ट्रीय प्रार्थना उत्सव के प्रतिभागियों को एक संदेश भेजा, जो मेजोगोरी में 1 से 6 अगस्त तक जारी है। माता मरियम को समर्पित करते हुए संत पापा ने युवाओं को पूर्णता और ईश्वर को अपने आपको समर्पित करने से मिलनेवाली सच्ची खुशी पर विश्वास करने का निमंत्रण दिया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

मेजोगोरी, मंगलवार, 3 अगस्त 2021 (रेई)- राष्ट्रीय प्रार्थना सभा की विषयवस्तु है, "अनन्त जीवन प्राप्त करने के लिए मुझे क्या करना चाहिए?" विषयवस्तु को सुसमाचार के धनी युवक के कथन से लिया गया है।"  (मती. 19,16-22; मार. 10,17-22; लूक. 18,18-23)

संत पापा फ्रांसिस ने उत्सव के युवा प्रतिभागियों को संदेश देते हुए कहा, "जब धनी युवक येसु से मिलने गया, तब उसने अनन्त जीवन की प्राप्ति का उपाय पूछा, अर्थात् खुशी की प्राप्ति।"

येसु से मुलाकात की अवसर

संत पापा ने स्मरण दिलाया कि "उत्सव, वास्तव में एक सप्ताह की प्रार्थना और येसु से मुलाकात का समय है, विशेषकर, उनके जीवित वचन, यूखरिस्त, आराधना और मेल-मिलाप के संस्कार में, जिसमें हमें प्रभु की ओर प्रेरित करने की शक्ति है अतः सुसमाचार का वह युवक, जिसका नाम हम नहीं जानते बल्कि भावना को जानते हैं, इस उत्सव में भाग लेनेवालों का प्रतीक है।"   

संत पापा ने याद दिलाया कि सुसमाचार में बताया गया युवक शिक्षित और ज्ञानी था और स्वस्थ बेचैनी से प्रेरित था जिसने उसे सच्ची खुशी, जीवन की परिपूर्णता खोजने के लिए प्रेरित किया। यही कारण था कि वह येसु से मिलने आया। संत पापा ने लिखा, "अनन्त जीवन, जिसकी कामना हम सभी करते हैं उसे निश्चय ही कोई भौतिक चीज से प्राप्त नहीं किया जा सकता, बल्कि वह परिपक्वता के विभिन्न चरणों से पार होने की मांग करता है।"

अनन्त जीवन की ओर कदम ˸ अपने पड़ोसी को प्यार करना

संत पापा ने कहा, "येसु द्वारा संकेत दिये गये रास्ते का पहला चरण है – अपने पड़ोसी के प्रति ठोस प्रेम। न केवल देखना बल्कि मुप्त और पूर्ण प्रेम देना। येसु ने युवक के हृदय में अनन्त जीवन पाने की चाह देखी किन्तु उसकी कमजोरियों पर भी गौर किया। उसकी कमजोरी थी, कई भौतिक चीजों के प्रति असक्ति। यही कारण है कि दूसरा चरण जिसकी सलाह येसु ने दी है वह है "योग्य" से "देने" के तर्क की ओर बढ़ना।  

"यदि तुम पूर्ण होना चाहते हो तो जाओ और अपने पास जो है उसे बेच कर गरीबों को दे दो और तुम्हारा धन स्वर्ग में रखा रहेगा। (मती.19,21) येसु अपना नजरिया बदलते हैं और जीवन की सुरक्षा के लिए चिंता नहीं करने बल्कि इस पृथ्वी के जीवन में अपना सब कुछ देने का निमंत्रण देते हैं अर्थात् प्रभु का अनुसरण करना है। यह अधिक परिपक्व होने का आह्वान है, देखने की नीति से बढ़कर पुरस्कार प्राप्त करने की, जो बिना किसी सीमा के मुफ्त में देना है। येसु ने उसे उन सभी चीजों का त्याग करने की सलाह दी जो उसके हृदय को भारी बनाता एवं प्रेम करने से रोकता था। इसके द्वारा येसु प्रेम करने के लिए स्वतंत्र होने एवं दूसरों के साथ संबंध में धनी बनने की सलाह देते हैं।  

हर प्रकार की आसक्ति से मुक्त

संत पापा ने संदेश में कहा कि यदि हृदय संपत्ति से भरा हो तब प्रभु और पड़ोसी गौण हो जाते हैं क्योंकि बहुत अधिक प्राप्त करने की लालसा हमारा दम घोंटती एवं हमें नाखुश और प्रेम करने के अयोग्य बना देती है।  

तीसरा चरण है कि येसु युवक को असली चुनाव करने की सलाह देते हैं। येसु कहते हैं, "मेरे पीछे चले आओ"। यह येसु का शिष्य बनना है अर्थात् बाहर से उनका अनुसरण करना नहीं बल्कि अपने हृदय की गहराई में उनके अनुरूप होना है ताकि बदले में, अनेक भाई-बहनों, पिता, माता और बच्चों के साथ समृद्ध और खुशहाल जीवन प्राप्त कर सकें।

संत पापा ने लिखा, "येसु का अनुसरण, खोना नहीं बल्कि एक प्रचुर उपलब्धि है जबकि त्यागने का अर्थ है इस रास्ते को अवरूद्ध करनेवाली बाधाओं को दूर करना। धनी युवक का हृदय दो स्वामियों के बीच विभाजित था ˸ ईश्वर और धन, एवं अपने धन को खोने की जोखिम ने उसे उदास घर लौटाया।"  

आनन्द की प्राप्ति के लिए ख्रीस्त के करीब आना

युवक के लिए यह उदासी का समय था क्योंकि उसने उत्तर देने का साहस नहीं किया जिसमें उन्हें अपने धन और खुद के बंधन से मुक्त होना था ताकि अपने आपको ख्रीस्त के साथ संयुक्त कर सके, उनके साथ चल सके एवं सच्ची खुशी प्राप्त कर सके।  

संत पापा ने युवाओं से कहा, "अपनी युवावस्था को प्रभु को समर्पित करने का साहस प्राप्त करें तथा उनके साथ आगे बढ़ें। उनके प्रेमी नजरों से आकर्षित हों जो हमें मूर्तिपूजा के लालच, झूठी समृद्धि से मुक्त करेगा क्योंकि यह जीवन की प्रतिज्ञा करता किन्तु मौत लाता है। ख्रीस्त के वचन का स्वागत करने एवं उनके बुलावे को स्वीकार करने से न डरें। सुसमाचार के धनी युवक के सामान निराश न हो जाएँ, माता मरियम पर अपनी नजर स्थिर रखें जो ख्रीस्त का अनुसरण करने हेतु महान उदाहरण हैं और उन्हें अपने आप को समर्पित करें जिन्होंने अपने दृढ़ उत्तर "मैं प्रस्तुत हूँ", द्वारा सरलता से प्रभु के बुलावे का प्रत्युत्तर दिया।"   

मरियम हम सभी के लिए महान उदाहरण

संत पापा ने उत्सव में उपस्थित सभी युवाओं को माता मरियम की ममतामय मध्यस्थता को समर्पित किया। "माता मरियम सभी के लिए शक्ति का स्रोत बने, जिनसे आप "मैं प्रस्तुत हूँ" कहने की शक्ति पा सकें, और उनमें ख्रीस्त को दुनिया में फैलाने का आदर्श प्राप्त कर सकें। इस प्रकार आप उनकी तरह अपने जीवन को दूसरों के लिए उपहार बना पायेंगे।    

अंत में, संत पापा ने लिखा, "सुसमाचार का आनन्द उन लोगों के हृदय एवं पूरे जीवन को भर दे जो येसु से मुलाकात करते हैं। जो उनके द्वारा बचाये जाना, पापों, उदासी, आंतरिक खालीपन और एकाकीपन से मुक्त होना चाहते हैं। येसु ख्रीस्त के साथ आनन्द हमेशा उत्पन्न होता और पुनः जन्म लेता है।

03 August 2021, 16:10