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बुधवारीय आमदर्शन समारोह में संत पापा बुधवारीय आमदर्शन समारोह में संत पापा 

संत पापाः येसु पाखंडता की निंदा करते हैं

संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह में गलातियों के नाम संत पौलुस के पत्र पर धर्मशिक्षा देते हुए मानवीय पाखंडता पर प्रकाश डाला।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 25 अगस्त 2021 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पापा पौल षष्ठम के सभागार में एकत्रित सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

गलातियों के नाम पत्र हमारे लिए एक आश्चर्यजनक तथ्य को प्रस्तुत करता है। हमने सुना कि पौलुस केफस या पेत्रुस को अंताखिया समुदाय में फटकारते हैं क्योंकि उनके आचरण उतने उचित नहीं थे। ऐसा क्या गंभीर हुआ था जिसके कारण पौलुस को उसके लिए कठोर शब्द कहने पड़े? शायद पौलुस अपने आप से बाहर हो जाते और अपने को नियंत्रण में नहीं रख पाते हैं। हम यह देखेंगे की ऐसी कोई बात नहीं लेकिन, पुनः एक बार यहाँ संहिता और स्वतंत्रता के संबंध में खतरे की एक बात आती है।

पवित्र आत्मा से प्रेरित कार्य

पौलुस गलातियों के समुदाय को लिखते हुए जानबूझ कर उस घटना की चर्चा करते हैं जो एक साल पहले अंताखिया में घटित हुई। वे वहाँ के ख्रीस्तीय समुदाय को इस बात की याद दिलाना चाहते हैं कि वे उन उपदेशकों की बातों को किसी भी रुप में न सुनें जो उन्हें खतना की आवश्यकता पर प्रवचन देते हैं। पेत्रुस के संदर्भ में, यहाँ हम भोजन ग्रहण करने के संबंध में उनके आचरण को देखते हैं। एक यहूदी के लिए, गैर-यहूदियों के साथ बैठ कर भोजन ग्रहण करना मना था। लेकिन पेत्रुस यह जानते हुए भी कि वह संहिता के नियमों का उल्लंघन कर रहा है शतपति करनेलियुस के घर गया। “ईश्वर ने मुझ पर यह प्रकट किया है कि किसी भी व्यक्ति को अशुद्ध या अपवित्र नहीं कहना चाहिए” (प्रेरि.10.28)। येरूसालेम लौटने पर, वे ख्रीस्तीय जो खतना किये गये थे जो मूसा की संहिता का अनुपालन विश्वासी ढ़ग से करते थे, पेत्रुस को उनके व्यवहार के कारण भला-बुरा कहते हैं। उन्होंने यद्यपि, इसकी सफाई देते हुए कहा, “उस समय मुझे प्रभु का यह कथन याद आया- योहन जल का बपतिस्मा देता था, परन्तु तुम लोगों को पवित्र आत्मा का बपतिस्मा दिया जायेगा। जब ईश्वर ने उन्हें वही वरदान दिया, जो हमें, प्रभु ईसा मसीह में विश्वास करने वालों को मिला है, तो मैं कौन था जो ईश्वर के विधान में बाधा डालता?” (प्रेरि.11.16-17)।

अच्छा कहलाने हेतु सच्चाई का परित्याग न करें

कुछ ऐसी ही घटनाएं पौलुस की उपस्थिति में अंताखिया में घटित हुई थीं। पहले पेत्रुस को गैर-ख्रीस्तीय से ख्रीस्तीय बने लोगों के संग बैठकर खाने में कोई कठिनाई नहीं होती थी यद्यपि जब कुछ खतना कराये ख्रीस्तीय येरूसालेम से उस शहर में आये तो पेत्रुस ने ऐसा करना बंद कर दिया क्योंकि वह उनकी आलोचना का शिकार होना नहीं चाहता था। संत पापा ने कहा कि हमें यहाँ सावधानी बरतने की जरुरत है कि दूसरों की नजरों में अच्छा बने रहने हेतु हम सच्चाई का परित्याग करते हैं। संत पौलुस की नजरों में यह गंभीर बात थी क्योंकि दूसरे शिष्यगण भी पेत्रुस का अनुसारण कर रहे थे विशेष रुप से बरनाबस जो गलातियों के समुदाय में सुसमाचार प्रचार कर चुका था (गला.2.13)। अनजाने में, थोड़ा इधर और थोड़ा उधर होते हुए, पेत्रुस समुदाय में एक तरह से विभाजन की स्थिति उत्पन्न करते हैं।

पाखंडता पर चिंतन

संत पापा ने कहा कि पौलुस अपनी फटकार में एक शब्द का उपयोग करते हैं जो हमें पाखंड़ता पर विचार करने को मदद करता है (गला.2.13)। यह वह शब्द है जो कई बार हमारे लिए आयेगा। हम सभी इसे समझते और इसका अर्थ जानते हैं। संहिता का अनुपालन ख्रीस्तीय को पाखंड़तापूर्ण व्यवहार हेतु अग्रसर करता है जिसके विरूद्ध प्रेरित अपनी सारी शक्ति और दृढ़ता से संघर्ष करते हैं। पौलुस अपने में धर्मी व्यक्ति था, वहीं उनमें बहुत सारी खामियाँ थीं... उनका व्यवहार विचित्र था लेकिन वह धार्मिक व्यक्ति था। संत पापा ने कहा कि पाखंडता क्या है? जब हम यह कहते कि सावधान वह व्यक्ति पाखंडी है तो इसका अर्थ क्या है? हम कह सकते हैं यह सच्चाई से भयभीय होना है। पाखंडी सच्चाई से डरता है। आप अपने उस रुप को दिखलाते हैं जो आप नहीं हैं। यह अपने हृदय को झूठी चीजों से भरना है। यह अपने हृदय के मनोभावों की लीपा-पोती करना है। “मैं जैसा हूँ वैसे ही अपने को प्रस्तुत करना मुझे भयभीत करता है...” अपने मनोभावों के संबंध में हम बनावटी बातें धारण करते हैं। संबंध का टूटना हमें सच्चाई को खुल कर बोलने हेतु साहसिक होने नहीं देता है और इस भांति हम सदैव सच्चाई से भागते हैं, सभी जगह और सभी चीजें के बावजूद। संत पापा ने कहा कि संबंध का टूटना हमें अधूरी सच्चाई की ओर ले चलती है। और अधूरी सच्चाई अपने में एक विखंडन है क्योंकि सत्य अपने में सत्य है अथवा वह सत्य है ही नहीं। अधूरी सच्चाईयाँ अपने में झूठे कार्य हैं। ऐसा करते हुए कोई व्यक्ति अपने में दिखावा करता है, संबंध टूटने का भय उसे साहसिक होने से रोकता है फलस्वरूप वह खुले रुप में सच्चाई को नहीं कह पाता है। इस भांति हम अपने उत्तरदायित्व से बचते हैं और यही कारण है यह हमारे लिए एक आज्ञा बनती है, जहाँ हमें सदैव सत्य बोलने को कहा जाता है, सभी जगह और सारी चीजों के बावजूद। अपने दैनिक जीवन के व्यक्तिगत संबंधों में औपचारिकता के आधार पर पाखंडता रूपी कीटाणु सहज ही हममें फैल जाती है। यह एक हंसी के रुप में हमारे मुख से निकलती है जो हृदय से नहीं होती...जो सभों से सहज होने का प्रयास करती लेकिन किसी से सहज नहीं हो पाती है।

पाखंडता से दूरी, एलियाजार का उदाहरण

संत पापा ने कहा कि धर्मग्रंथ में पाखंडता के कई उदाहरण हैं। एक सुन्दर साक्ष्य हम बुजुर्ग एलियाजार के रूप में पाते हैं जिसे देव-मूर्तियों को चढ़या गया सूअर का मांस खाने को कहा जाता है जिससे उसकी जान बच सके। वह मांस खाने का दिखावा करता है लेकिन उसे सूअर का मांस नहीं खाया बल्कि उसके मित्रों ने उसके लिए किसी दूसरे जानवर का मांस तैयार किया था। ईश्वर भक्त पुरूष उत्तर देता है,“मेरी अवस्था में इस प्रकार का स्वांग अनुचित है। कहीं ऐसा न हो कि बहुत-से युवक यह समझें कि एलियाजार ने नब्बे वर्ष की आयु में विदेशियों के रीति-रिवाज अपनाये हैं। मेरे जीवन का बहुत कम समय रह गया है। यदि मैं उसे बचाने के लिए इस प्रकार स्वांग करता, तो वे शायद मेरे कारण भटक जाते और मेरी वृद्धावस्था पर दोष और कलंक लग जाता” (2 मक्का.6. 24-25)। वह ईमानदार रहता और पाखंडता के मार्ग में प्रवेश नहीं करता है। यह पाखंडता पर चिंतन करते हुए उससे दूर रहने हेतु हमारे लिए कितना सुन्दर उदाहरण है। सुसमाचार में येसु बहुत सारी परिस्थितियों में बाहरी दिखावे पाखंडता की निंदा करते हैं जो आंतरिक रुप में झूठ और बुराईयों से भरा है (मत्ती. 23.13-29)।

पाखंडता में पारदर्शिता नहीं

पाखंडी लोग दिखावा करते हैं, चापलूसी करते और धोखा देते हैं क्योंकि वे अपने चेहरे पर मुखौटा पहने हुए रहते और सच्चाई का सामना साहस से नहीं कर पाते हैं। यही कारण है वे सच्चे रुप में प्रेम करने के योग्य नहीं होते, वे अपने अहम में ही सीमित होकर रह जाते और उनमें अपने हृदय को पारदर्शी बनाने की शक्ति नहीं होती है। बहुत सारी परिस्थितियाँ हैं जहाँ हम पाखंडता को कार्यशील पाते हैं। यह हमारे कार्यक्षेत्र में है जहाँ कोई अपने सहकर्मियों से मित्रता के भाव दिखलाता वहीं प्रतियोगिता की भावना में उनपर पीछे से वार करता है। राजनीति में हम पाखंड को पाते हैं जहाँ लोग दोहरी जिन्दगी जीते हैं, लोगों के बीच अलग जीवन और व्यक्तिगत जीवन में एक अगल जीवन। कलीसिया में पाखंड विशेष रूप से घृणित है, और दुर्भाग्यवश कलीसिया में हम पाखंड को पाते हैं, बहुत से ख्रीस्तीय और प्रेरित पाखंडी हैं। हम प्रभु के वचनों को कभी न भूलें,“तुम्हारी बात इतनी हो-हाँ की हाँ, नहीं की नहीं। जो इस से अधिक है, वह बुराई से उत्पन्न होता है।”  (मत्ती 5:37)।

भाइयो और बहनों, आइए आज हम इस बात पर चिंतन करें कि पौलुस किस बात की निंदा करते हैं, यह पाखंडता है जिसकी निंदा येसु करते हैं। हम सत्य से, सच बोलने से, सच सुनने से, सच्चाई में चलने से न डरें जिससे हम प्रेम कर सकें। एक पाखंडी प्रेम करना नहीं जानता है। सत्य के साथ तोलमोल करने का अर्थ है कलीसिया की एकता को खतरे में डालना, जिसके लिए स्वयं प्रभु ने प्रार्थना की। 

25 August 2021, 15:57