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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस   (AFP or licensors)

मरियम याद दिलाती हैं कि ईश्वर हमें दीनता द्वारा महिमा के लिए बुलाते हैं

रविवार को कुँवारी मरियम के स्वर्गोदग्रहण महापर्व के अवसर पर देवदूत प्रार्थना के दौरान संत पापा ने याद दिलाया कि धरती से स्वर्ग की यात्रा का रहस्य है "दीनता"। उन्होंने कहा कि स्वर्ग में उदगृहित मरियम दिखलाती हैं कि ईश्वर हमें भी इस महिमामय लक्ष्य के लिए आमंत्रित करते हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 16 अगस्त 2021 (रेई)- वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 15 अगस्त को कुँवारी मरियम के स्वर्गोदग्रहण महापर्व के अवसर पर संत पापा फ्रांसिस ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया, जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, "अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।"

आज, धन्य कुँवारी मरियम के स्वर्गोदग्रहण का महापर्व है धर्मविधि मरिया के भजन को स्पष्टता प्रस्तुत करता है। प्रशंसा का यह गीत ईश्वर की माता की तस्वीर है। मरियम ईश्वर में आनन्द मनाती है क्योंकि उसने अपनी दीन दासी पर कृपा दृष्टि की है। (लूक. 1:47-48)

संत पापा ने कहा, "दीनता मरियम का रहस्य है। उनकी दीनता ने ही ईश्वर की नजर उनकी ओर खींचा। मानवीय नजर हमेशा महानता की खोज करती है और जो चकित करनेवाली चीजों की ओर आकर्षित होती है। दूसरी ओर, ईश्वर की नजर दिखावटी को नहीं देखती। ईश्वर हृदय को देखते हैं (1साम.16,7) और दीनता से मुग्ध होते हैं। हृदय की विनम्रता ईश्वर को आकर्षित करती है। आज स्वर्ग में उद्गृहित माता मरियम को देखते हुए हम कह सकते हैं कि विनम्रता वह रास्ता है जो स्वर्ग की ओर ले चलती है।

विनम्रता या दीनता के उदगम पर प्रकाश डालते हुए संत पापा ने कहा कि यह लैटिन के "उमुस" शब्द से आता है जिसका अर्थ है "पृथ्वी"। यह विरोधाभास के समान लगता है कि स्वर्ग में ऊँचा होने के लिए नीचा होना है, "जो अपने को छोटा मानता है, वह बड़ा बनाया जाएगा।" (लूक. 14:11) ईश्वर हमारे दान, हमारी सम्पन्नता और हमारी क्षमता के लिए हमें ऊँचा नहीं उठाते बल्कि विनम्रता के लिए उठाते हैं। ईश्वर उन लोगों को उठाते हैं जो सेवा करते। वास्तव में, मरियम अपने आपको दासी की "उपाधि" देती है। (लूक.1˸38) वह अपने लिए कुछ नहीं ढूँढ़ती।

आज, हम अपने आप से, प्रत्येक अपने हृदय से पूछ सकते हैं ˸ मैं विनम्रता में कैसा हूँ? क्या मैं दूसरों के द्वारा पहचान पाना चाहता हूँ, उनके द्वारा प्रशंसा किया जाना अथवा सेवा करना चाहता हूँ? क्या मैं मरियम के समान सुनना जानता हूँ अथवा सिर्फ बात करना और उनका ध्यान अपनी ओर खींचना चाहता हूँ? क्या मैं मरियम के समान मौन रह सकता हूँ अथवा क्या मैं हमेशा बातचीत करता हूँ? क्या मैं एक कदम पीछे हट सकता हूँ, झगड़ा शांत कर सकता हूँ अथवा क्या मैं हमेशा उत्कृष्टता प्राप्त करने की कोशिश करता हूँ? आइये हम इन सवालों पर विचार करें ˸ मैं विनम्रता में कैसा हूँ?

मरियम ने अपनी दीनता में सबसे पहले स्वर्ग को जीता। उनकी सफलता का राज खासकर, अपने आपको छोटा समझने, अपने आपको जरूरतमंद समझने में है। ईश्वर से केवल वे ही सम्पूर्ण को ग्रहण कर सकते हैं जो अपने आपको कुछ नहीं समझते हैं। जो अपने को पूरी तरह खाली कर सकते हैं वे ही उन से भर सकते हैं। "मरियम कृपा से पूर्ण है" (पद.28) विशेषकर, अपनी दीनता के लिए। हमारे लिए भी, दीनता एक शुरूआती विन्दु है, हमारे विश्वास की शुरूआत है। मनोभाव से दीन होना मूल है, अर्थात् ईश्वर की आवश्यकता महसूस करना। जो अपने आप में भरा हुआ है वह ईश्वर को स्थान नहीं दे सकता और कई बार हम अपने आपमें भरे होते हैं। जो खुद से भरा हुआ है वह ईश्वर को स्थान नहीं दे सकता। कई बार हम भी अपने आपसे भरे होते हैं किन्तु जो अपने आपको विनम्र बनाये रखता है वह ईश्वर को महान कार्य करने देता है। (पद. 49)

कवि दांते कुँवारी मरियम को "विनीत और सृष्टि में ऊंचे" रूप में प्रस्तुत करते हैं। इतिहास में सबसे विनीत एवं ऊंची सृष्टि को याद करना अच्छा है। जिसने अपने सम्पूर्ण शरीर और आत्मा से स्वर्ग पर विजय पायी, अधिकांश समय घर में बिताया, एक साधारण, दीन रूप में। उनके कृपा से पूर्ण दिन ज्यादा अद्भुत नहीं हैं। उन्होंने मौन रहकर, कुछ असाधारण कार्य नहीं किया किन्तु ईश्वर की दृष्टि हमेशा उनपर बनी रही, वे उनकी दीनता, तत्परता और हृदय की सुन्दरता पर मोहित हुए, जो पाप से अछूते थे।

यह हम प्रत्येक के लिए एक महान संदेश है, खासकर, उन लोगों के लिए जो थकान और कठिनाई भरे दिनों से गुजर रहे हैं। मरियम याद दिलाती हैं कि ईश्वर हमें इस महिमामय लक्ष्य के लिए बुलाते हैं। ये अधिक अच्छे शब्द नहीं हैं किन्तु सच्चाई हैं।  यह एक कलात्मक रूप से निर्मित सुखद अंत, भ्रम या झूठी सांत्वना नहीं है। यह एक शुद्ध सच्चाई है, मरियम के स्वर्ग में उदगृहित कर लिये जाने के समान जीवित और शुद्ध है। आइये, आज हम उनके पुत्र-पुत्रियों के स्नेह के साथ उन्हें मनायें। आइए आज हम उसे एक दिन स्वर्ग में उसके साथ रहने की आशा से उत्साहित, किन्तु विनम्र, उत्साह के साथ मनायें!

संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए कहा, "आइये हम इस समय उनसे प्रार्थना करें कि वे हमें पृथ्वी से स्वर्ग जाने के रास्ते में मदद करें।" संत पापा ने जोर देते हुए कहा, "हम इस शब्द को न भूलें कि दीनता और सेवा ही लक्ष्य तक, स्वर्ग तक पहुँचने के राज हैं।"

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।  

देवदूत प्रार्थना में संत पापा का संदेश

 

16 August 2021, 14:37