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संत पेत्रुस महागिरजाघर संत पेत्रुस महागिरजाघर  

संत पेत्रुस के चैपटर के केंद्र में प्रार्थना एवं प्रेरितिक प्रेरणा

संत पापा फ्राँसिस ने 28 अगस्त को वाटिकन चैपटर (सभा) के लिए परिवर्तनकालिन मानदंडों को अनुमोदन दिया। इसका उद्देश्य है महागिरजाघर में पुरोहितों की धार्मिक और प्रेरितिक सेवा पर जोर देना।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 28 अगस्त 2021 (रेई)- संत पापा फ्रांसिस ने संत अगुस्टीन के पर्व दिवस पर, वाटिकन में संत पेत्रुस के चैपटर के परिवर्तनकालिन मानदंडों को मंजूरी दी। इसे 1 अक्टूबर से लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य है उस प्राचीन प्रथा में सुधार लाने का प्रोत्साहन देना जो व्यवस्था के संशोधन के लिए समीक्षाधीन है। खासकर, वे रविवार और छुट्टियों के दिनों में वाटिकन महागिरजाघर में पुरोहितों द्वारा अब तक किये जा रहे धर्मविधिक एवं प्रेरितिक सजीवता की सेवा को पुनः जारी करना चाहते हैं।

नये नियम

नये नियम के अनुसार, 30 साल से कम उम्र के पुरोहितों को "एक निर्धारित राशि प्राप्त होगी, जिसको परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय और परमधर्मपीठ से जुड़ी अन्य संस्थाओं में प्रदान की गई सेवाओं के लिए अन्य कमीशन या अन्य वेतन के साथ नहीं जोड़ा जाएगा।"

वाटिकन चैपटर के धर्मविधि समारोहों में सहायता करनेवाले संचालकों के लिए भी प्रेरितिक कार्य एवं अन्य कार्यों में यही नियम लागू होगा। आर्थिक गतिविधियोँ के प्रशासन एवं व्यवस्था जो संग्रहालय कोष और धार्मिक वस्तुओं की बिक्री से संबंधित हैं उसे फाब्रिका दी संन पियेत्रो (संत पेत्रुस कम्पनी) को सौंप दिया जाएगा। जो वाटिकन चैपटर के कर्मचारियों को वेतन प्रदान करेगा। चैपटर "वर्तमान में मौजूद अचल संपत्ति और वित्तीय संपत्ति एवं संबंधित आय" को बनाए रखना और प्रशासित करना जारी रखेगा। यह भी निर्धारित किया गया है कि सेवा में वाटिकन के धर्मविधिक समारोहों में सेवा देनेवाले पुरोहितों और व्यवस्थापकों को निर्धारित राशि "फैब्रिका द्वारा भुगतान की जायेंगी"।  

एक हजार साल का इतिहास

वाटिकन में संत पेत्रुस महागिरजाघर का चैपटर, पुरोहितों का एक ऐसा समूह है जो पोप द्वारा मिस्सा समारोह के अनुष्ठान एवं व्यवस्था के लिए नियुक्त है। यह करीब एक हजार साल पुराना है। इसकी स्थापना 1053 ई. में संत पापा लेओ 9वें ने की थी, जो विभिन्न मठों से संबंधित मठवासियों द्वारा की गई धार्मिक और प्रार्थनापूर्ण सेवा के साथ महागिरजाघर में सदियों से मौजूद एक वास्तविकता की पुष्टि करता है।  

संत पापा यूजीन 4थे (1145-1153) से, चैपटर, मठ से धीरे-धीरे एक धर्मवैधानिक रूप में एक स्वतंत्र समुदाय बन गया।  

चैपटर का समर्पण

चैपटर के कार्य धर्मविधिक समारोहों का अनुष्ठान करने से लेकर बसिलिका की विरासत की देखरेख करना भी है। 16वीं शताब्दी में जब नये महागिरजाघर का निर्माण किया गया, तब चैपटर का इतिहास फब्रिका दी सन पीयेत्रो से जुड़ गया।

प्रार्थना की प्रेरिताई की खोज  

हाल के दशकों में जैसा कि संत पापा बेनेडिक्ट 16वें ने जब 7 अक्टूबर 2007 को कैनॉन पुरोहितों से मुलाकात की तब इस बात को रेखांकित किया था कि "वाटिकन महागिरजाघर के जीवन में चैपटर का कार्य प्रार्थना की प्रेरिताई में सबसे ऊपर, अपने वास्तविक मूल कार्यों की पुन: खोज की ओर उन्मुख है। (...) यही वाटिकन चैपटर का सही स्वभाव है और पोप आपसे सहयोग की अपेक्षा करते हैं कि आप संत पेत्रुस की कब्र पर अपनी प्रार्थनापूर्ण उपस्थिति के साथ याद रखें कि ईश्वर के सामने कुछ भी नहीं जा सकता; कि कलीसिया पूरी तरह से उसके और उसकी महिमा के लिए उन्मुख है; कि पेत्रुस की प्रधानता कलीसिया की एकता की सेवा में है, और यह, बदले में, परमपवित्र त्रिएक की मुक्ति योजना की सेवा में है।"

मौजूदा सुधार इसी रास्ते का हिस्सा है।

28 August 2021, 16:40