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लाजारे संघ के सदस्यों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस लाजारे संघ के सदस्यों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस  (@VaticanMedia)

लाजारे संघ से पोप ˸ उपनगरों में जाकर प्रेम की अग्नि प्रज्वलित करें

संत पापा फ्रांसिस ने शनिवार 28 अगस्त को फ्रांस के "लाजारे" संघ के 200 सदस्यों से वाटिकन के पौल छटवें सभागार में मुलाकात की तथा कहा कि वे उपनगरों में जाकर प्रेम की अग्नि प्रज्वलित करें। लाजारे संघ अपनी स्थापना की 10वीं वर्षगाँठ मना रहा है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 28 अगस्त 2021 (रेई)- संत पापा ने कहा, "मैं इस सुन्दर अनुभव के लिए ईश्वर को धन्यवाद देता हूँ कि आप एक साथ प्रतिदिन को भातृत्व में जीते हैं। यहाँ आप न केवल खुद के लिए बल्कि विश्व के लिए भी एक सामाजिक मित्रता का प्रदर्शन करते हैं जिसको जीने के लिए हम सभी बुलाये गये हैं।"

उन्होंने कहा, "एक ऐसे वार्तावरण में जो उदासीनता, व्यक्तिवाद और स्वार्थ से बिखरा हुआ है, आप हमें सच्चे जीवन का मूल्य समझाते हैं कि यह विविधताओं को स्वीकार करने, मानव प्रतिष्ठा का सम्मान करने, दूसरों को सुनने और उनपर ध्यान देने एवं दीन लोगों की सेवा करने में है। वास्तव में, दूसरों के प्रति प्रेम हमें उनके जीवन की उत्तम चीजों को खोजने की प्रेरणा देता है। सिर्फ इसी के द्वारा सामाजिक मित्रता संभव है जो किसी को दरकिनार नहीं करता और सभी के भाईचारा के लिए खुला है।"

संत पापा ने लाजारे संघ के संदस्यों को प्रोत्साहन देते हुए कहा कि समाज में उन्हें एकाकी, तिरस्कार एवं बहिष्कार का सामना करना पड़ सकता है किन्तु वे कभी न छोड़ दें, कभी निरूत्साहित न हों। अपने हृदय में आनन्द की आशा को बनाये रखें।

उन्होंने कहा, "आपके जीवन का साक्ष्य हमें स्मरण दिलाता है कि गरीब सच्चे सुसमाचार प्रचारक हैं क्योंकि वे ही हैं जिन्हें सबसे पहले सुसमाचार सुनाया गया था तथा वे प्रभु एवं उनके राज्य की धन्यताओं को साझा करने के लिए बुलाये गये थे।"     

संत पापा ने सदस्यों को आमंत्रित करते हुए कहा, "मैं आप सभी को निमंत्रण देता हूँ कि आप अपनी प्रतिबद्धता एवं विश्वास में दृढ़ बने रहें। आप ख्रीस्त के प्रेम के चेहरे हैं, अतः अपने आसपास इस प्रेम की आग को फैलायें जो ठंढ़े और सूखे हृदय को ऊष्मा प्रदान करता है। सिर्फ मित्रता के जीवन एवं अपने संघ में सदस्यों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करने से संतुष्ट न हों बल्कि आगे बढ़ें। मुफ्त देने और पानेवाले प्रेम की भावना को अपनायें। उपनगरों में जाएँ जहाँ एकाकीपन, उदासी, आंतरिक घाव है एवं जीवन जीने की रूचि नहीं रह गई है। पीड़ित हृदय में आपकी बातों एवं व्यवहार से सांत्वाना और चंगाई का तेल लगायें।

आप यह कभी न भूलें कि आप एक वरदान हैं, ईश्वर के आज हैं, उनके प्रेमी हृदय में आप एक विशेष स्थान रखते हैं। लोग भले ही आपको तिरस्कारपूर्ण नजर से देखें आप ईश्वर की नजरों में मूल्यवान हैं। ईश्वर आपको प्यार करते हैं और उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। अतः आनन्द के साथ जीने और दूसरों को जीने देने की आशा को कभी न खोयें।  

संत पापा ने उन्हें तथा उनके परिवारवालों को माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा प्रभु को समर्पित किया तथा उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।    

28 August 2021, 16:20