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खाद्य प्रणाली पर संयुक्त राष्ट्र पूर्व शिखर सम्मेलन रोम में खाद्य प्रणाली पर संयुक्त राष्ट्र पूर्व शिखर सम्मेलन रोम में  (ANSA)

यूएन खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन एक अधिक न्यायपूर्ण विश्व बनाने का अवसर

संत पापा फ्राँसिस ने खाद्य प्रणाली पर संयुक्त राष्ट्र पूर्व शिखर सम्मेलन के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव अंतोनियो गुटेर्रेस को एक संदेश भेजा। सम्मेलन 26-28 जुलाई तक रोम में चल रहा है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 27 जुलाई 2021 (रेई)- संयुक्त राष्ट्र के महासचिव अंतोनियो गुटेर्रेस के नेतृत्व तथा इताली सरकार की मेजबानी में आयोजित खाद्य प्रणाली पर संयुक्त राष्ट्र पूर्व शिखर सम्मेलन, खाद्य प्रणालियों को बदलने के लक्ष्य के साथ 2020 में शुरू की गई वैश्विक जुड़ाव प्रक्रिया के प्रयासों और योगदान को एक साथ लाएगा, और सितंबर में एक महत्वाकांक्षी और फलदार शिखर सम्मेलन का मार्ग प्रशस्त करेगा।

महासचिव को प्रेषित संदेश में संत पापा फ्रांसिस ने कहा है कि यह महत्वपूर्ण सम्मेलन प्रकाश डालता है कि किस तरह कोविड-19 काल में भूखमरी, भोजन असुरक्षा और कुपोषण से लड़ना आज हमारी सबसे बड़ी चुनौती है।

पृथ्वी की पुकार

उन्होंने कहा, "इस महामारी ने प्रणालीगत अन्याय से हमारा मुकाबला किया है जिसने मानव परिवार के रूप में हमारी एकता को कमजोर कर दिया है जबकि गरीब एवं खुद पृथ्वी, उन क्षतियों के लिए आवाज उठा रहे हैं जिनको हमने ईश्वर प्रदत्त संसाधनों के प्रयोग में लापारवाही एवं दुष्प्रयोग के द्वारा लाया है।"  

संत पापा ने गौर किया कि जब उस तरक्की के लिए नई तकनीकियाँ विकसित की गई, ताकि ग्रह अधिक फल ला सके, तब हमने इसका इतना शोषण किया कि यह बंजर होने की स्थिति में आ गई है। इस तरह न केवल बाह्य बल्कि आध्यात्मिक मरूस्थल बढ़ गया है।  

बहुतायत की दुनिया में भूखमरी का कलंक

संत पापा ने एक ऐसी दुनिया में जो सभी लोगों के लिए पर्याप्त भोजन उत्पन्न करती है भूखमरी के "कलंक" की निंदा की है और कहा है कि यह एक अपराध है जो "मौलिक मानव अधिकार का उलंघन करता है"।  

उन्होंने जोर दिया कि ठोस कदमों एवं सही अभ्यासों से और साहसी स्थानीय एवं अंतरराष्ट्रीय राजनीति के द्वारा इस अन्याय से लड़ना, सभी का कर्तव्य है।  

इस परिप्रेक्ष्य में, खाद्य प्रणालियों के सावधानीपूर्वक और सही परिवर्तन की महत्वपूर्ण भूमिका है।

नई मानसिकता

संत पापा ने रेखांकित किया कि "भोजन उत्पन्न करना काफी नहीं है"; इसके साथ नई मानसिकता, नये समग्र दृष्टिकोण और एक ऐसे खाद्य प्रणाली तैयार करने की जरूरत है जो पृथ्वी की रक्षा करे एवं मानव व्यक्ति की प्रतिष्ठा को केंद्र में बनाये रखे, जो विश्व स्तर पर पर्याप्त भोजन उपलब्ध करे एवं स्थानीय स्तर पर सम्मानित काम को प्रोत्साहित करे और भविष्य के साथ समझौता किये बिना आज के विश्व को पोषित करे।"

अपने संदेश में संत पापा ने ग्रामीण क्षेत्रों को केंद्र में रखे जाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है एवं "राजनीतिक और आर्थिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में कृषि क्षेत्र की प्राथमिक भूमिका की पुष्टि की है, जिसका उद्देश्य महामारी के बाद की 'पुनरारंभ' प्रक्रिया की रूपरेखा को रेखांकित करना है।"

परिवार का महत्व

संत पापा ने कहा, "छोटे किसान और परिवार खाद्य प्रणाली के आवश्यक विन्दु हैं अतः ऐसी नीतियों को अपनाया जाना चाहिए जो ग्रामीण महिलाओं की आवश्यकताओं पर ध्यान दे, युवा रोजगार को बढ़ावा दे और सबसे गरीब एवं सुदूर क्षेत्रों के किसानों के कार्य को बढ़ाये।"  

संत पापा ने गौर किया कि "यदि हम एक फलदायी बहुपक्षवाद और जिम्मेदारी पर आधारित खाद्य प्रणाली को बनाए रखना चाहते हैं, तो न्याय, शांति और मानव परिवार की एकता सर्वोपरि है।"

कलीसिया का समर्थन

संत पापा ने जोर दिया कि परमधर्मपीठ और काथलिक कलीसिया खुद को इस महान लक्ष्य की सेवा में लगाएंगे, अपना योगदान देंगे, इसके लिए अपनी शक्ति, इच्छा, कार्यों एवं विवेकशील निर्णयों को शामिल करेंगे।"

अंत में, संत पापा फ्राँसिस ने आशा व्यक्त की कि खाद्य प्रणालियों के उत्थान के लिए यह बैठक "हमें एक शांतिपूर्ण और समृद्ध समाज के निर्माण के मार्ग पर स्थापित करेगी और शांति के बीज बोएगी जो हमें सच्चे भ्रातृत्व में चलने की अनुमति देगी।"

 

27 July 2021, 15:47