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अपनी नानी को फूल देकर शुभकामनाएँ देती एक पोती अपनी नानी को फूल देकर शुभकामनाएँ देती एक पोती  (Vatican Media)

युवाओं एवं दादा-दादी के बीच वार्तालाप के बिना इतिहास आगे नहीं बढ सकता

संत पापा फ्राँसिस ने रविवार को देवदूत प्रार्थना के उपरांत नाना-नानी एवं बुजूर्गों के लिए विश्व दिवस के अवसर पर उन्हें शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने नाना-नानी एवं पोते-पोतियों के बीच वार्तालाप पर जोर दिया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार, 25 जुलाई 2021 (रेई)- संत पापा ने नाना-नानी को सम्मानित करते हुए कहा, "हमने नाना-नानी एवं बुजूर्गों के प्रथम विश्व दिवस के अवसर पर समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित किया है। सभी दादा-दादी को सभी की ओर से तालियाँ....। दादा-दादी एवं पोते पोतियाँ, युवा और बुजूर्ग सभी मिलकर कलीसिया के एक सुन्दर चेहरे को प्रस्तुत करते हैं तथा पीढियों के बीच संबंध को दिखलाते हैं। मैं इस दिवस को सभी समुदायों में मनाने का निमंत्रण देता हूँ तथा दादा-दादी एवं बुजूर्गों से मुलाकात करने का प्रोत्साहन देता हूँ। जो बिलकुल अकेले हैं उन्हें मेरा संदेश पहुँचायें, जो येसु से प्रेरित है, "मैं हर दिन तुम्हारे साथ हूँ।"

बुजूर्गों के लिए संत पापा की प्रार्थना

संत पापा ने उनके लिए प्रार्थना करते हुए कहा, "मैं प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि यह पर्व उन लोगों को मदद करे जो काफी बुजूर्ग हैं वे जीवन के इस काल में अपने बुलावे का प्रत्युत्तर दे सकें, विशेषकर, इस दरकिनार करने की संस्कृति के समय में। दादा-दादी को युवाओं की जरूरत है और युवाओं को दादा-दादी की। उन्हें बात करना है, मुलाकात करना है। उनके पास इतिहास रूपी पेड़ का रस है जो बढ़ते वृक्ष को शक्ति प्रदान करता है।" उन्होंने कवि के एक पद की याद दिलाते हुए कहा, "पेड़ के फूलने में जो कुछ जरूरी है वह उसी से आता है जो जमीन के अंदर है।" युवाओं एवं दादा-दादी के बीच वार्तालाप के बिना इतिहास आगे नहीं बढ़ सकती, जीवन आगे नहीं बढ़ सकती। इसे पुनः शुरू करने की जरूरत है। इसे पुनः शुरू करने की आवश्यकता है यह हमारी संस्कृति के लिए एक चुनौती है। दादा-दादी को युवाओं को देखते हुए स्वप्न देखने का अधिकार है जबकि युवाओं को अपने दादा-दादी से रस लेकर भविष्यवाणी का साहस करना है। संत पापा ने सलाह देते हुए कहा, "दादा-दादी और युवा आप एक-दूसरे से मिलें, एक-दूसरे से बात करें। यह सभी को खुशी प्रदान करेगा।"  

चीन में बाढ़ पीड़ितों के प्रति संत पापा का सामीप्य

उसके बाद संत पापा ने चीन में आये बाढ़ से प्रभावित लोगों की याद करते हुए कहा, "पिछले दिनों, चीन के जेंगजौ एवं हेनान शहरों में मूसलाधार वर्षा के कारण भयांकर बाढ़ आयी है। मैं इसके शिकार लोगों और उनके परिवारवालों के लिए प्रार्थना करता हूँ। मैं उन सभी लोगों के प्रति सामीप्य एवं एकात्मता व्यक्त करता हूँ जो इस आपदा से पीड़ित हैं।"

ओलम्पिक खेल आशा और भाईचारा का प्रतीक बने

तब उन्होंने टोक्यो में चल रहे ओलंपिक खेल के प्रतिभागियों को प्रोत्साहन देते हुए कहा, "32वाँ ओलम्पिक खेल का उद्घाटन शुक्रवार को टोक्यो में हुआ। महामारी के इस समय में यह खेल स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के नाम पर एक आशा का चिन्ह, एक वैश्विक भाईचारा का प्रतीक बने। ईश्वर इसके आयोजकों, खिलाड़ियों और जो इस महान खेल उत्सव में सहयोग करते हैं उन्हें आशीष प्रदान करे।"

तत्पश्चात् संत पापा ने रोमवासियों एवं तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया। उन्होंने खासकर, रोविगो के नाना-नानी दल का अभिवादन किया। उन्होंने कहा, "यहाँ आने के लिए आप सभी को धन्यवाद।" संत पापा ने इमिलिया के रास्ते से चलकर रोम आनेवाले तीर्थयात्री युवाओं तथा चेनाकोलो समुदाय का भी अभिवादन किया।

अंत में, अपने लिए प्रार्थना का आग्रह करते हुए सभी को शुभ रविवार की मंगलकामनाएँ अर्पित की।     

25 July 2021, 15:59