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सन्त पापा फ्राँसिस, तस्वीरः 22.04.2021  सन्त पापा फ्राँसिस, तस्वीरः 22.04.2021  

“शान्ति हेतु विज्ञान” सम्मेलन को सन्त पापा फ्राँसिस का सन्देश

सेन्ट गेब्रिएल वैज्ञानिक अनुसन्धान संस्थान की जयन्ती के उपलक्ष्य में, इटली के तेरामो शहर में "शांति हेतु विज्ञान" शीर्षक से आयोजित सम्मेलन को गुरुवार को प्रेषित एक विडियो सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने सम्मेलन में भाग लेनेवाले समस्त अकादमियों एवं वैज्ञानिकों का अभिवादन कर उनके योगदान के लिये आभार व्यक्त किया।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 2 जुलाई 2021(रेई, वाटिकन रेडियो): सेन्ट गेब्रिएल वैज्ञानिक अनुसन्धान संस्थान की जयन्ती के उपलक्ष्य में, इटली के तेरामो शहर में  "शांति हेतु विज्ञान" शीर्षक से आयोजित सम्मेलन को गुरुवार को प्रेषित एक विडियो सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने सम्मेलन में भाग लेनेवाले समस्त अकादमियों एवं वैज्ञानिकों का अभिवादन कर उनके योगदान के लिये आभार व्यक्त किया।

यूरोप के ग्रान सासो पर्वत की ढलानों पर ही, परमाणु भौतिकी सम्बन्धी सेन्ट गाब्रिएल राष्ट्रीय प्रयोगशालाएँ स्थित है, जहाँ विश्व वैज्ञानिक संघ के तत्वाधान में युवा वैज्ञानिक विभिन्न विषयों पर अनुसन्धान एवं अध्ययन में लगे हैं।  

सन्त पापा का सन्देश

विडियो सन्देश सन्त पापा ने इस प्रकार आरम्भ किया, "प्रिय और प्रतिष्ठित वैज्ञानिको, आपका सम्मेलन सम्पूर्ण मानवता के लिए आशा का एक अनमोल वरदान है। इससे पहले, कभी भी हमें, समकालीन समाज की चुनौतियों का सामना करने हेतु वैज्ञानिक अनुसंधान को फिर से शुरू करने की आवश्यकता के बारे में पता नहीं चला था, और मैं विशेष रूप से प्रसन्न हूँ कि इस सम्मेलन का आयोजन तेरामों धर्मप्रान्त द्वारा किया गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि विश्वास एवं विज्ञान के बीच किसी प्रकार का विरोध नहीं होना चाहिये।"

सन्त पापा ने कहा कि जैसा कि मैंने अपने विश्व पत्र फ्रातेल्ली तूती में स्मरण दिलाया है, एक साथ मिलकर निर्माण करने के लिये वास्तविकता को जानना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि ज्ञान की पिपासा को विकसित करने तथा उसे बढ़ाने के लिये वैज्ञानिक अनुसन्धान को अपने ख़ुद के संकेत समाज की सेवा में प्रस्तुत कर सहयोग और समन्वय के नये रास्ते खोजने होंगे।

शांति निर्माण हेतु विज्ञान

सन्त पापा ने कहा कि वैज्ञानिकों को इस भ्रम में नहीं चाहिये कि एकतरफा वैज्ञानिक प्रगति ही जीवन, समाज एवं विश्व को देखने का मापदण्ड है। उन्होंने कहा कि विगत माहों की स्वास्थ्य समस्याओं ने यह दर्शा दिया है कि वैज्ञानिक विश्व का कार्य केवल निवारण एवं उपचार तक ही सीमित नहीं हो सकता बल्कि उसे जीवन के सभी पहलुओं को साथ लेकर चलना होगा। उसे, विशेष रूप से, सामाजिकता और परिवार के सदस्यों के बीच संबंधों की गुणवत्ता और उससे भी बढ़कर, पीढ़ियों के दरम्यान जुड़े मानवशास्त्रीय निहितार्थों को ध्यान में रखना होगा। विज्ञान को एक ऐसे समाज की रचना का प्रयास करना होगा जिसमें प्रत्येक मानव व्यक्ति की गरिमा एवं प्रतिष्ठा का सम्मान किया जाये।      

02 July 2021, 11:57