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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस   (AFP or licensors)

देवदूत प्रार्थना ˸ हमें एक "हृदय की पारिस्थितिकी" विकसित करने की जरूरत है

रविवार को देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में उपस्थित विश्वासियों को सम्बोधित करते हुए संत पापा फ्रांसिस ने विश्राम, चिंतन और सहानुभूति के द्वारा "हृदय की पारिस्थितिकी" विकसित करने की सलाह दी और कहा कि ग्रीष्म इसके लिए उपयुक्त समय है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार, 18 जुलाई 2021 (रेई)- वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 18 जुलाई को संत पापा फ्रांसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

येसु का मनोभाव जिसको हम आज की धर्मविधि के सुसमाचार पाठ (मार.6,30-34) में गौर करते हैं हमें जीवन की दो महत्वपूर्ण बातों को समझने में मदद देता है। पहला, विश्राम। प्रेरित, मिशन काम से वापस लौटते हैं तथा उत्साह के साथ अपने काम की चर्चा शुरू करते हैं किन्तु येसु स्नेह से प्रेरितों को निमंत्रण देते हैं : “तुम  लोग अकेले ही मेरे पास निर्जन स्थान में चले आओ। ” (पद. 31) वे विश्राम हेतु निमंत्रण देते हैं।

येसु की चिंता   

संत पापा ने कहा, “ऐसा करते हुए येसु हमें एक बहुमूल्य शिक्षा देते हैं। शिष्यों को देखकर येसु उनके सफल उपदेश के लिए खुश जरूर होते हैं किन्तु वे उन्हें बधाई देने या उनसे प्रश्न करने में समय व्यतीत नहीं करते बल्कि उनके शारीरिक एवं आंतरिक थकान पर चिंता करते हैं। संत पापा ने कहा, "और वे ऐसा क्यों करते हैं"? क्योंकि वे उन्हें एक खतरे की चेतावनी देना चाहते हैं जो छिपकर हमारे पास आता है ˸ कर सकने के उन्माद के खतरे में अपने आपको पड़ने देना, सक्रियतावाद के जाल में फंसना, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण बात होती है हमारे काम का परिणाम, जिसका श्रेय हम खुद को देते हैं। कितनी बार कलीसिया में भी ऐसा होता है ˸ हम व्यस्त रहते, भाग-दौड़ करते, और सोचते हैं कि सब कुछ हमारे ऊपर निर्भर है और अंत में हम येसु को दरकिनार करने के खतरे में पड़ते हैं, हम अपने आपको को ही केंद्र में रख लेते हैं।

शरीर और हृदय दोनों का आराम जरूरी

यही कारण है कि येसु अपने मित्रों को अपने साथ थोड़ा आराम करने का निमंत्रण देते हैं। यह केवल शारीरिक आराम नहीं है बल्कि हृदय का भी आराम है। क्योंकि सिर्फ काम से अवकाश लेना पर्याप्त नहीं है, हमें सही में आराम करने की जरूरत है। पर आराम कैसे किया जाए? संत पापा ने कहा, "ऐसा करने के लिए आपको चीजों के बीच में वापस जाना होगा, रूकना, मौन रहना और प्रार्थना करना होगा ताकि आप काम से अवकाश की यात्रा में न चले जाएँ। येसु भीड़ की आवश्यकताओं से नहीं भागते बल्कि हर दिन, सबसे पहले, प्रार्थना के द्वारा अपने को प्रेरित करते और पिता के साथ संयुक्त करते हैं। उनका स्नेहित निमंत्रण – थोड़ विश्राम कर लो – हमारे साथ रहे। आइये, हम कार्यकुशलता से सचेत रहें, उन्मत्त की दौड़ से रूकें जो हमारे एजेंडे को निर्देश देता है। हम रूकना सीखें, आँखों से लोगों को देखने के लिए मोबाईल बंद करें, मौन रहें, प्रकृति पर चिंतन करें, ईश्वर के साथ वार्तालाप फिर शुरू करें।"

सहानुभूति        

हालांकि, सुसमाचार बतलाता है कि येसु और शिष्यों ने जैसा चाहा वैसा आराम नहीं कर सके। लोगों ने उन्हें देख लिया और सभी ओर से उनके पास आ गये। ऐसी स्थिति में येसु को तरस हो आयी। इस तरह दूसरा आयाम है – सहानुभूति, जो ईश्वर का तरीका है। ईश्वर का तरीका है – सामीप्य, सहानुभूति और कोमलता। कितनी बार हम सुसमाचार में, बाईबिल में, इस वाक्य को पाते हैं कि वे "दया से द्रवित हो गये"। तरस खाकर येसु ने अपने आपको लोगों के लिए समर्पित किया और पुनः शिक्षा देने लगे। (33-34) यह विरोधाभास के समान लगता है किन्तु यथार्थ में ऐसा नहीं है। वास्तव में, केवल वही हृदय जो अपने आपको जल्दबाजी में बहकने नहीं देता, तरस खा सकता है, अर्थात् अपने आपमें एवं चीजों को करने में नहीं खो जाता और दूसरों पर, उनके घावों एवं जरूरतों पर ध्यान दे पाता है। तरस खाना चिंतन करने से उत्पन्न होता है। संत पापा ने कहा कि यदि हम सचमुच आराम करना सीख जाते हैं तब हम सच्ची सहानुभूति प्रकट कर सकेंगे। यदि हम चिंतनशील नजर रखेंगे तब हम उन लोगों के लालची रवैये के बिना अपनी गतिविधियों को जारी रखेंगे जो सब कुछ रखना और उपभोग करना चाहते हैं। यदि हम प्रभु से जुड़े रहेंगे और अपने आप में अचेत नहीं रहेंगे, तब हमें जो करना है उसके पास हमारी सांस को रोकने और हमें नष्ट करने की शक्ति नहीं होगी। हमें "हृदय की पारिस्थितिकी" की आवश्यकता है जो विश्राम, चिंतन और सहानुभूति से बना हो। हम ग्रीष्म के समय में इसका लाभ उठायें।

इसके बाद संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए कहा, "अब आइये, हम माता मरियम से प्रार्थना करें, जो मौन रही, प्रार्थना की तथा चिंतन किया और हम, उनके बच्चे पर हमेशा कोमल स्नेह से प्रेरित होती हैं।"   

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना में संत पापा का संदेश
18 July 2021, 15:30