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लेबनान के ख्रीस्तीय धर्मगुरूओं ने पोप के साथ अपने राष्ट्र के लिए प्रार्थना की

लेबनान के ख्रीस्तीय धर्मगुरू आज 1 जुलाई को वाटिकन में पोप फ्राँसिस के साथ लेबनान में शांति हेतु प्रार्थना एवं चिंतन दिवस में भाग ले रहे हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 1 जुलाई 2021 (रेई)- लेबनान में विभिन्न ख्रीस्तीय कलीसियाओं एवं समुदायों के करीब 10 वरिष्ठ धर्मगुरू, अपने प्रतिनिधियों के साथ वाटिकन में लेबनान के लिए प्रार्थना एवं चिंतन दिवस में भाग ले रहे हैं। वे मध्यपूर्व में वर्तमान की संघर्षपूर्ण स्थिति और इसके भविष्य तथा शांति एवं स्थिरता की कृपा के लिए प्रार्थन कर रहे हैं। यह पहल राजनीतिक समाधान ढूँढ़ने के लिए नहीं है बल्कि प्रार्थना करने एवं भविष्य के चिन्ह को पढ़ने के लिए आयोजित की गई है ताकि लोगों की पुकार का प्रत्युत्तर दिया जा सके और उनके दुःखों को दूर किया जा सके।

लेबनान का संकट  

देश आधुनिक समय में दुनिया के सबसे गंभीर आर्थिक संकटों में से गुजर रहा है, जिसके गंभीर सामाजिक परिणाम हो रहे हैं। संकट जिसकी शुरूआत 2019 में हुई है दशकों के भ्रष्टाचार के कारण और गृहयुद्ध के बाद राजनीतिक वर्ग द्वारा कुप्रबंधन, कर्ज लेने और स्थानीय उद्योगों को कम प्रोत्साहित करने के कारण उत्पन्न हुई है जिसने देश को लगभग हर चीज के लिए आयात पर निर्भर रहने हेतु मजबूर होना पड़ा है।

संकट को 4 अगस्त 2020 के भारी विस्फोट ने और बढ़ा दिया, जब बेरूत बंदरगाह में एक उर्वरक भंडार में एक बड़ा विस्फोट हुआ और शहर को तहस-नहस कर दिया। इसने देश के पुराने घावों को फिर खोल दिया। विस्फोट में करीब 190 लोगों की मौत हो गई, 6000 लोग घायल थे और करीब 10 बिलियन की सम्पति की क्षति हुई, साथ ही, करीब 3,00,000 लोग आवासहीन हो गये थे।  

लेबनान में संकट जारी है। लेबनानी पाउंड 2019 से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने मूल्य का 90% से अधिक खो दिया है और मुद्रास्फीति आसमान छू रही है, और खाद्य पदार्थों की कीमतों को तिगुना कर रही है। बैंक खातों पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिससे लोग अपनी बचत निकालने या विदेश में पैसा ट्रांसफर करने में असमर्थ हैं।

विश्व बैंक की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, लेबनान का आर्थिक और वित्तीय संकट उन्नीसवीं सदी के मध्य के बाद से विश्व स्तर पर शीर्ष 10 में पहुँच गया है, संभवतः शीर्ष 3, उन्नीसवीं सदी के मध्य के बाद से विश्व स्तर पर सबसे गंभीर संकट की स्थिति है। भारी चुनौतियों का सामना करते हुए, निरंतर नीतिगत निष्क्रियता और कार्यशील सरकार की अनुपस्थिति के कारण संकटपूर्ण सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति और एक नाजुक सामाजिक शांति के लिए खतरा पैदा कर दिया है, जिसमें क्षितिज पर कोई स्पष्ट मोड़ नहीं है।

आशा एवं शांति को पुनः जागृत करना

1 जुलाई को लेबनान के लिए प्रार्थना एवं चिंतन दिवस का निमंत्रण संत पापा फ्राँसिस ने दी है ताकि देश में शांति एवं उम्मीद जगायी जा सके।

 पूर्वी कलीसियाओं के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के अध्यक्ष कार्डिनल लेओनार्दो सांद्री ने पहल का आयोजन किया है। पहल का उद्देश्य है "एक साथ चलना"। कलीसिया के धर्मगुरू अपने आपसे सवाल करेंगे, चिंतन करेंगे और एक साथ प्रार्थना करेंगे। वे अपने साथ लोगों की पुकार लेकर आये हैं। इस दिन की विषयवस्तु है "प्रभु ईश्वर के पास शांति की योजना है। एक साथ लेबनान के लिए।"  

संत पेत्रुस महागिरजाघर में

लेबनान के लिए प्रार्थना एवं चिंतन की शुरूआत वाटिकन के संत मर्था में की गई जहाँ पोप निवास करते हैं। संत पापा फ्राँसिस ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया, उसके बाद वे एक साथ संत पेत्रुस महागिरजाघर की ओर बढ़े।  

महागिरजाघर में प्रवेश करने के बाद वे पोप की वेदी के सामने रूके, पोप फ्रांसिस ने "हे हमारे पिता" की प्रार्थना की जिसको प्रतिनिधियों ने अरबी भाषा में किया। क्षणभर की मौन प्रार्थना के बाद, संत पापा वेदी के ठीक नीचे संत पेत्रुस की कब्र के पास गये जहाँ उन्होंने एक जलती मोमबत्ती चढ़ायी। सभी 10 प्रतिनिधियों ने भी अपनी मोमबत्ती चढ़ायी। कुछ देर मौन प्रार्थना के सभी वहाँ से बाहर निकाले।  

उसके बाद वे सभा के लिए प्रेरितिक आवास के क्लेमेंटीन सभागार गये। प्रार्थना दिवस का समापन शाम 6 बजे संत पापा के भाषण से होगा।

5 मिलियन आबादी वाला भूमध्यसागरीय राष्ट्र लेबनान में, मध्य पूर्व में ख्रीस्तीयों का सबसे बड़ा प्रतिशत है और यह एकमात्र अरब देश है जिसके राष्ट्रपति एक ख्रीस्तीय हैं।

संत पापा फ्रांसिस ने लेबनान में शांति के लिए प्रार्थना एवं चिंतन दिवस के बारे 30 मई के देवदूत प्रार्थना में बतलाते हुए कहा था कि इसका उद्देश्य होगा, "शांति एवं स्थिरता की कृपा के लिए एक साथ प्रार्थना।" उन्होंने प्रार्थना की अपील की थी ताकि लेबनान का भविष्य अधिक शांतिमय हो सके।

01 July 2021, 16:13