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कनाडा में नाना-नानी और बुजूर्ग दिवस कनाडा में नाना-नानी और बुजूर्ग दिवस 

कनाडा की कलीसिया मनायेगी दादा-दादी एवं बुजूर्ग दिवस

कनाडा के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की परिवार और जीवन के लिए स्थायी समिति ने कलीसिया और समाज में बुजुर्गों के विशेष स्थान पर प्रकाश डाला है। कनाडा में रविवार को दादा-दादी और बुजुर्गों के लिए विश्व दिवस मनाया जाएगा।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

दादा-दादी एवं बुजूर्गों के लिए पहला विश्व दिवस 25 जुलाई को मनाया जाएगा जिसकी विषयवस्तु होगी, "मैं सदा तुम्हारे साथ हूँ।" (मती.28,20)

उद्घाटन समारोह से पहले, परिवार और जीवन के लिए कनाडा के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की स्थायी समिति (सीसीसीबी) ने एक वीडियो संदेश जारी किया है जिसमें युवाओं, परिवारों और समुदायों को निकट आने और दादा-दादी एवं बुजुर्गों के साथ समय बिताने के लिए आमंत्रित किया है, तथा कलीसिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका की याद करने और उन्हें महत्व देने का प्रोत्साहन दिया है।

प्रथम विश्व दिवस आमोरिस लेतित्सिया परिवार वर्ष हेतु संत पापा फ्रांसिस के विचार का हिस्सा है जो 19 मार्च 2021 से – जून 2022 तक जारी रहेगा। यह वर्ष ख्रीस्तीय समुदाय के भीतर बुजुर्गों की प्रेरितिक देखभाल के महत्व पर प्रकाश डालता है, जो  हमें एक-दूसरे के साथ समय बिताने और अंतर-पीढ़ी की बातचीत में संलग्न होने के लिए प्रोत्साहित करता है।

31 जनवरी को देवदूत प्रार्थना में विश्व दिवस की स्थापना करते हुए, संत पापा फ्राँसिस ने घोषणा की थी कि यह प्रत्येक वर्ष जुलाई के चौथे रविवार को येसु के नाना-नानी संत जोआकिम और संत अन्ना के पर्व के करीब मनाया जाएगा।

प्रभु और कलीसिया बुजुर्गों के करीब हैं

वीडियो संदेश में बुजूर्गों को सम्बोधित करते हुए कहा गया है, "दादा दादी और बुजुर्गों के लिए इस पहले विश्व दिवस पर, हम आप प्रत्येक के लिए और आपके द्वारा हमें दिए गए अनेक उपहारों के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं।

उत्सव का विषय रखते हुए, सीसीसीबी ने बुजुर्गों को आश्वासन दिया कि अनिश्चित और अशांत समय के बावजूद, प्रभु और कलीसिया उनके करीब हैं। इसके अलावा, "संत पिता पूरी दुनिया को याद दिलाना चाहते हैं कि बुजुर्गों की आवाज कीमती है, क्योंकि यह ईश्वर की स्तुति गाती है और लोगों की जड़ों को संरक्षित करती है।"

नाना-नानी और बुजूर्गो के लिए विश्व दिवस पर संत पापा का संदेश

कोविड-19 महामारी

संदेश में पिछले महीनों की याद की गई है जिनमें कोविड-19 महामारी के कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, खासकर, बुजूर्गों को।

संदेश में कहा गया है कि पूरी दुनिया में, “कई बुजुर्गों ने बहुत अधिक एकाकीपन का अनुभव किया। परिवार, नाती-पोते, माता-पिता, दोस्त और पड़ोसी सभी से अलग हो गए, उनसे दूर हो गए थे, और कई लोगों ने अपनों को खो दिया।"

"हम कैसे एक-दूसरे से मिलने, हाथ मिलाने, गले लगाने और खाने की मेज पर इकट्ठा होने एवं एक-दूसरे के साथ का आनंद लेने में असमर्थ रहे!"

चुनौतियों के बावजूद, धर्माध्यक्षों ने "डिजिटल दुनिया, टेलीफोन कॉल और हाथ से लिखे पत्रों" के लिए धन्यवाद दिया, जिसने एक-दूसरे के सामने शारीरिक रूप से उपस्थित न होने के बावजूद "हमें एकजुट रहने, बातचीत करने और बोझ को हल्का करने" एवं कठिनाई को कम करने में मदद दी है।

बुजूर्ग ˸ विश्वास के रखवाले और "हमारे कथाकार"

संत मती रचित सुसमाचार के अंतिम पाठ पर चिंतन करते हुए, संदेश में गौर किया गया है कि येसु ने शिष्यों को आश्वस्त किया कि वे हमेशा उनके साथ रहेंगे और उन्हें सुसमाचार का प्रचार करने तथा पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम पर सभी राष्ट्रों को बपतिस्मा देने के लिए भेजा।

सीसीसीबी के संदेश में कहा गया है कि यह वादा हमारे लिए भी है हम कभी अकेले नहीं हैं, आज यह हमारे लिए सच है।  बुजुर्ग कलीसिया और समाज के लिए "महान उपहार" हैं।

उन्होंने कहा, "आप विश्वास के रखवाले, दृढ़ और मजबूत हैं।" संत जॉन पॉल द्वितीय ने लिखा है कि बुजुर्ग "हमारी सामूहिक स्मृति के संरक्षक हैं जो समाज में जीवन का समर्थन और मार्गदर्शन करते हैं।"

दादा-दादी अतीत, वर्तमान और भविष्य से जुड़ते हैं

धर्माध्यक्षों ने आगे इस बात पर प्रकाश डाला कि दादा-दादी और बुजुर्गों की कहानियां और अनुभव "युवाओं को सपने देखने और महत्व देने के लिए प्रेरित करते हैं कि जीवन के सभी मौसमों में स्थायी सत्य, अच्छाई और सुंदरता है" क्योंकि जब वे अतीत को याद करते हैं और उनसे जुड़ते हैं, तो वे "हमारे वर्तमान और भविष्य के शक्तिशाली गवाह के रूप में खड़े होते हैं।"

सीसीसीबी ने बुजुर्गों से आग्रह किया, "कृपया स्नेह, कोमलता और उत्साह के साथ बांटना जारी रखें जिस तरह प्रभु आपके जीवन में आपके साथ रहे हैं,"। "अपने पोते-पोतियों को यह दिखने में साथ दें कि विश्वास की बीज कैसे बोया और विकसित किया जाता है।"

सुसमाचार प्रचार, उद्घोषणा और प्रार्थना का मिशन

वीडियो संदेश में बुजुर्गों को, संत पापा फ्राँसिस द्वारा उन्हें सौंपे गए मिशन, सुसमाचार प्रचार, उद्घोषणा और प्रार्थना की याद दिलाई गई है, जिसमें उन्हें अपने परिवारों और समुदायों में अनुग्रह के लिए प्रार्थना करने और सुसमाचार के आनंद को उनके जीवन को बदलने देने के लिए आमंत्रित किया गया है ताकि वे उन लोगों को प्रोत्साहित करना जारी रखें जो पीड़ित हैं और खो गए हैं।

"जिस तरह आप युवाओं को भविष्य के लिए उनके सपनों में विश्वास करने में मदद करते हैं, हमारी इच्छा है कि आप भी, जीवन के ईश्वर के उपहार के आश्चर्य और सुंदरता पर विचार करना जारी रखेंगे।"

धर्माध्यक्षों ने दादा-दादी से भी आग्रह किया कि वे महामारी और इसके प्रभावों से निराश न हों, यह कहते हुए कि आपसी समर्थन और एक-दूसरे की मदद करने से, "हम दुःख और अलगाव के कारण हुए दिल के दर्द से ठीक हो जाएंगे।"

वीडियो संदेश के अंत में धर्माध्यक्षों ने सभी दादा-दादी और बुजुर्गों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है, और सभी को जीवन के इस चरण में उनके साथ चलने का निमंत्रण दिया है।

"हम सब मिलकर जीवन और प्रेम के प्रभु की स्तुति करते हैं, भजनहार के शब्दों से, 'तू मुझे जीवन का मार्ग बताता है, तेरे सामने जीवन की परिपूर्णता है। (भजन 16:11)।'"

22 July 2021, 16:35